'डोकलाम प्रकरण और गलवान झड़प में सशस्त्र बलों की भूमिका ने बढ़ाया भारत का कद'

एक कार्यक्रम में सेना उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सी पी मोहंती ने कहा, 'वह समय अब अधिक दूर नहीं है, जब हमें भी दुनिया की महाशक्तियों में गिना जाएगा.'

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 27, 2021, 08:28 AM IST
  • सेना उपप्रमुख ने सशस्त्र बलों के योगदान को सराहा
  • पिछले साल जून में गलवान में हुआ था संघर्ष
'डोकलाम प्रकरण और गलवान झड़प में सशस्त्र बलों की भूमिका ने बढ़ाया भारत का कद'

नई दिल्लीः भारतीय सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सी पी मोहंती ने रविवार को डोकलाम प्रकरण और गलवान घाटी संघर्ष का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि डोकलाम प्रकरण और गलवान घाटी संघर्ष के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा निभाई गई भूमिका ने न केवल देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाया, बल्कि इससे वैश्विक स्तर पर भारत का कद ऊंचा हुआ है.

1965 और 1971 के युद्ध को किया याद
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल मोहंती ने भारतीय सशस्त्र बलों के मूल चरित्र पर विस्तार से बात की और 1965 के युद्ध, 1971 के युद्ध और कारगिल संघर्ष के दौरान सुरक्षाबलों के प्रमुख योगदान पर प्रकाश डाला.

सुरक्षा प्रदाता देश के रूप में होती है भारत की बात
लेफ्टिनेंट जनरल मोहंती ने हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा, 'डोकलाम और गलवान में जो कुछ हुआ, उसने न केवल देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारा कद भी ऊंचा हुआ है. आज हर कोई भारत के बारे में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता देश के रूप में बात करता है.'

'दुनिया की महाशक्तियों में गिना जाएगा भारत'
विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (VIPS) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सेना उपप्रमुख ने कहा, 'वह समय अब अधिक दूर नहीं है, जब हमें भी दुनिया की महाशक्तियों में गिना जाएगा.'

73 दिनों तक रहा था गतिरोध
गौरतलब है कि 2017 में डोकलाम ट्राई-जंक्शन में भारत और चीन के सैनिकों के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बना रहा था. इसके परिणामस्वरूप परमाणु हथियार संपन्न दोनों पड़ोसी देशों के बीच युद्ध की आशंका भी पैदा हो गई थी. डोकलाम क्षेत्र में चीन की तरफ से सड़क बनाने का भारत ने कड़ा विरोध किया था. 

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दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह विवाद समाप्त हुआ था. इसके बाद 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारतीय सेना ने शातिर चीनी सैनिकों के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया था.

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