क्या है DRDO की K-5 SLBM मिसाइल? 5000 की रेंज टेस्टिंग से दुश्मनों में हलचल, 'अरिहंत' पनडुब्बी की बढ़ाएगी ताकत

DRDO K-5 SLBM missile: भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने देश की सबसे खास बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक, K-5 SLBM यानी पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के दूसरे स्टेज के रॉकेट मोटर का सफल 'स्टैटिक टेस्ट' पूरा कर लिया है. यह टेस्ट मिसाइल की ताकत और सटीकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण था.

Written by - Prashant Singh | Last Updated : Nov 15, 2025, 11:16 AM IST
  • DRDO ने किया K-5 SLBM का सफल टेस्ट
  • नौसेना की अरिहंत पनडुब्बी होगी ताकतवर
क्या है DRDO की K-5 SLBM मिसाइल? 5000 की रेंज टेस्टिंग से दुश्मनों में हलचल, 'अरिहंत' पनडुब्बी की बढ़ाएगी ताकत

DRDO K-5 SLBM missile: K-5 SLBM. यानी सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल वह सबसे बड़ी ताकत है, जो भारतीय नौसेना की परमाणु पनडुब्बियों खासकर अरिहंत क्लास पर तैनात की जाएगी. इस मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 5000 किलोमीटर तक है. इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइलें भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से होने वाले खतरे का जवाब देने के लिए एक भरोसेमंद 'सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी' देती हैं. 'स्टैटिक टेस्ट' का मतलब होता है कि रॉकेट मोटर को जमीन पर बांधकर पूरी ताकत से चलाया गया ताकि उसके परफॉर्मेंस, थ्रस्ट और ईंधन जलाने की क्षमता की जांच की जा सके. दूसरे स्टेज के मोटर का सफल होना यह पक्का करता है कि मिसाइल अपनी यात्रा के दौरान जरूरी ऊंचाई और स्पीड हासिल कर सकेगी. यह टेस्ट दिखाता है कि K-5 मिसाइल का विकास अब फाइनल स्टेज में पहुंच रहा है.

K-5 SLBM क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
K-5 मिसाइल को भारत की परमाणु रणनीति में 'सागरिका' और 'K-4' जैसी मिसाइलों के बाद सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है.

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इसकी 5000 KM तक की मारक क्षमता है. ऐसे में, यह मिसाइल चीन के प्रमुख शहरों और ठिकानों तक पहुंचने की क्षमता देगी, जो भारत की रक्षात्मक क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है. वहीं, पनडुब्बी पानी के नीचे छुपी रहती है, जिससे दुश्मन को यह पता नहीं चल पाता कि हमला कहां से आएगा. K-5 मिसाइल इसी तरह की सीक्रेट और घातक हमला करने की क्षमता देती है.

इतना ही नहीं, यह मिसाइल, हवा (लड़ाकू विमान), जमीन (अग्नि मिसाइल) और समुद्र (पनडुब्बी) से परमाणु हमला करने की भारत की क्षमता, यानी परमाणु हमले को पूर्णता की ओर ले जाती है.

DRDO की इंजीनियरिंग सफलता
दूसरे स्टेज के रॉकेट मोटर को टेस्ट करना एक जटिल इंजीनियरिंग उपलब्धि है. K-5 मिसाइल सॉलिड ईंधन का इस्तेमाल करती है, जो तरल ईंधन की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और तेजी से लॉन्च करने की क्षमता देता है.

दूसरा स्टेज वह हिस्सा होता है जो मिसाइल को वातावरण से बाहर धकेलता है और उसे तेज रफ्तार देता है. इस मोटर का सफल टेस्ट मिसाइल की पूरी रेंज को हासिल करने के लिए बहुत जरूरी है.

K-5 SLBM के सफल टेस्ट ने भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई दी है और यह दिखाया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा.

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