नकली रेमडेसिविर इन्जेक्शन बनाने वाले गिरोह का भांडाफोड़, इंदौर और सूरत से पकड़े गए अपराधी

विजयनगर पुलिस इससे पहले इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है जिसमें से 6 के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया. वहीं रविवार को पकड़े गए 11 आरोपियों में से 6 के खिलाफ भी रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : May 10, 2021, 07:34 AM IST
  • सूरत दिले के मोरावी स्थित फॉर्म हाउस में बनती है नकली रेमडेसिविर
  • आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे ग्लूकोज से इंजेक्शन तैयार करते थे.
नकली रेमडेसिविर इन्जेक्शन बनाने वाले गिरोह का भांडाफोड़, इंदौर और सूरत से पकड़े गए अपराधी

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी लगातार बनी हुई है. ऐसे में कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजन किसी भी तरह से कोशिश करके इन्जेक्शन का इंतजाम करने में जुटे हैं जिससे कि मरीज की जान बचाई जा सके.

लोगों की इसी मजबूरी का फायदा कालाबाजारी करने वाले लोग उठा रहे हैं. कोरोना संक्रमण में उपयोगी जीवन रक्षक दवा टोसी और रेमडेसीविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले 11 लोगों को इंदौर के विजय नगर थाने की पुलिस ने शुक्रवार को हिरासत में लिया है. इन आरोपियों के पास से रेमडेसिविर के 14 इन्जेक्शन और फेवी फ्लू दवा के 5 बॉक्स पुलिस ने बरामद किए हैं.

आरोपी सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंदों से संपर्क करते और उन्हें महंगे दामों पर इंजेक्शन उपलब्ध कराते थे. इस मामले में रीवा के रहने वाले मुख्य सरगना सुनील मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. सुनील मिश्रा का लिंक मोरबी गुजरात की नकली रेमडेसीविर फैक्ट्री से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.

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11 में से 6 आरोपियों के ऊपर लगा रासुका
विजयनगर पुलिस इससे पहले इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है जिसमें से 6 के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया. वहीं रविवार को पकड़े गए 11 आरोपियों में से 6 के खिलाफ भी रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है. पुलिस गिरफ्त में आए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से संबंधित जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है.

गुजरात में बनते थे नकली इन्जेक्शन
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने सूरत दिले के मोरावी स्थित फॉर्म हाउस में स्थिति रेमडेसिविर की नकली फैक्ट्री के बारे में खुलासा किया. उनकी निशानदेही पर गुजरात पुलिस ने सूरत जिले के मोरवी स्थित फॉर्म हाउस पर दबिश दी. जांच के दौरान यहां पुलिस को बड़ी संख्या में नकली रेमड़ेसिविर इंजेक्शन बरामद हुए.

गुजरात पुलिस के गिरफ्त में आए आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे ग्लूकोज से इंजेक्शन तैयार करते थे. नकली रेमडेसिविर बनाने में कुल लागत तकरीबन 80 रुपये आती थी. जिसे देश के अलग-अलग राज्यों में 17 हजार से लेकर 35 हजार रुपये तक की कीमत पर बेचा जाता था. ये लोग मुंबई के रास्ते रेमडेसिविर की पूरे देश में सप्लाई किया करते थे. पूछताछ में आरोपियों ने मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, चेन्नई में इंजेक्शन बेचने की बात कबूल की है.

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पुलिस ने खबर मिलने पर बिछाया था जाल
इंदौर के विजय नगर थाना पुलिस को जानकारी मिली थी कि वहां के लिंबोदी इलाके में रहने वाला सुनील मिश्रा और उसके कुछ साथी नकली इंजेक्शन बेचने का काम कर रहे हैं, इसी सूचना के बाद थाने के एक सिपाही को ग्राहक बनकर उसके पास भेजा और उसने कुछ इंजेक्शन उससे खरीदने की बात कही.

आरोपी ने इसके बाद पुलिस कर्मचारी को इन्जेक्शन मुहैया करा दिए. लेकिन उन्हें देखते पर पता चला कि सभी इन्जेक्शन पर एक ही बैच नंबर प्रिंट था. इससे पुलिस का शक यकीन में बदल गया.

इसके बाद पुलिस ने अपने कर्मचारी की निशानदेही पर दबिश देकर तकरीबन 11 लोगों को अपनी हिरासत में लिया है. पूछताछ के दौपान इन लोगों ने बताया कि इन्होंने गुजरात से लगभग 1000 इंजेक्शन मंगाए थे और उनमें से अधिकांश को बाजार में खपा दिया.

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