राम मंदिर बनना शुरु नहीं हुआ कि महंतों में होने लगी जंग

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से राम मंदिर निर्माण की देखरेख के लिए ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है. लेकिन इसको लेकर महंतों में जंग छिड़ गई है. हालत इतने बिगड़े किए एक कथित परमहंस पर पथराव भी किया गया. जिससे उनके सिर में चोट आ गई. भगवा धारण करने वाले महंतों को इस बात की कतई चिंता नहीं कि उनके ऐसे कारनामों से विरोधियों को धार्मिक संस्थाओं पर उंगली उठाने का मौका मिलेगा. 

राम मंदिर बनना शुरु नहीं हुआ कि महंतों में होने लगी जंग

अयोध्या: राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया अभी शुरु होने ही वाली है महंत आपस में ही भिड़ गए हैं. इस मुद्दे पर एक ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद कई महंत आपस में ही भिड़ गए हैं. 

परमहंस दास को छावनी परिषद् से हटाया गया
रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास कथित रुप से अशोभनीय टिप्पणी करने के आरोप में परमहंस दास को तपस्वी छावनी मंदिर से हटा दिया गया है. वह वाराणसी चले गए हैं. उन्होंने बयान दिया है कि 'अगर कुछ देर और पुलिस ना पहुंचती तो राम जन्मभूमि न्यास परिषद के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के गुंडे उनकी हत्या कर देते'. 
दरअसल नृत्यगोपाल दास के समर्थकों ने परमहंस दास का घेराव करने के बाद पथराव किया था. परमहंस दास के विरोधी तपस्वी छावनी मंदिर के महंत सर्वेश्वर दास ने आरोप लगाया है कि परमहंस दास का असली नाम उदय नारायण दास है और खुद को फर्जी तरीके से मंदिर का महंत बताते हैं. 

ये है विवाद की वजह 
महंतों के बीच छिड़े विवाद की वजह एक ऑडियो क्लिप है. जिसमें कथित रुप से राम मंदिर आंदोलन के दौरान चर्चा में रहने वाले राम विलास वेदांती मंदिर निर्माण ट्रस्ट का प्रमुख बनने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं. इस क्लिप में नृत्य गोपाल दास के लिए घटिया भाषा का इस्तेमाल किया गया  है. 

मंदिर ट्रस्ट पर कब्जे के लिेए महंतों में होड़
अयोध्या में चल रही चर्चा के मुताबिक राम जन्मभूमि निर्माण ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने से इतिहास में नाम दर्ज हो जाएगा. खबरों के मुताबिक विश्व हिंदू परिषद् द्वारा बनाए गए राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास का नाम सबसे आगे चल रहा है. लेकिन भाजपा के पूर्व सांसद और महंत राम विलास वेदांती भी इस ट्रस्ट का प्रमुख बनना चाहते हैं. विवाद का कारण यही है. 

कुछ ऐसा होगा ट्रस्ट का स्वरुप
खबरों के अनुसार राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में एक आईएएस अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होंगे, जो कि यह तय करेंगे कि राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक ही हो. इसके अलावा इस ट्रस्ट में उत्तर प्रदेश सरकार का कोई मंत्री या वरिष्ठ भाजपा नेता शामिल हो सकता है. 
बताया जा रहा है कि इस ट्रस्ट में किसी विवादास्पद पृष्ठभूमि के व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाएगा. इसमें सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज या विद्वान को भी जगह दी जा सकती है.