आखिरकार फडणवीस ने तोड़ दी चुप्पी, चाचा पवार की 'दोहरी नीति' का खुलासा

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा मोड़ सामने आया है. पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को लेकर एक बड़ा खुलासा कर दिया है. जिसके बाद हर कोई सकपका गया है.

आखिरकार फडणवीस ने तोड़ दी चुप्पी, चाचा पवार की 'दोहरी नीति' का खुलासा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में कब कौन सा मोड़ आने वाला है, इसकी कल्पना करना भी मानों रेत से पानी निकालने के समान होता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक ऐसा दावा किया है, जिसके बाद से राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है.

ज़ी मीडिया पर फडणवीस का खुलासा

ज़ी मीडिया के मराठी न्यूज़ चैनल ज़ी 24 तास पर EXCLUSIVE बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसके बाद सियासी जंग का आगाज होना लाजमी है. फडणवीस के मुताबिक सीएम पद की शपथ लेने से पहले अजित पवार ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार और पार्टी के ज्यादातर विधायकों के समर्थन का दावा किया था. इसके तहत जूनियर पवार ने कई विधायकों से उनकी फोनपर बात भी कराई थी.

फडणवीस वे इस पूरे घटनाक्रम के बारे में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ये बताया कि भतीजे अजित पवार एनसीपी के सभी विधायकों का समर्थन होने और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार की इस फैसले पर रजामंदी होने का भरोसा दिया था.

फडणवीस ने ये बात स्वीकारी, 'विश्वास करना पड़ा भारी'

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ये बात स्वीकारी है कि उनका ये कदम उलटा पड़ा. फडणवीस ने ये भी दावा किया कि पूरे घटनाक्रम और पर्दे के पीछे की कहानी अगले कुछ वक्त में सामने आएगी. वहीं जब भाजपा ने शरद पवार पर इतना बड़ा खुलासा कर दिया तो भला एनसीपी कैसे शांत रहती, सकपकाई हुई एनसीपी ने डैमेज कंट्रोल का काम शुरू कर दिया है.

एनसीपी नेता और उद्धव सरकार में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर पलटवार किया है. भुजबल ने कहा कि 'फडणवीस गलत बोल रहे हैं. और हम रात के अंधेरे मे खेल करने वाले नेता की माने या फिर हमारे नेता शरद पवार जी की माने. शरद पवार जी पहले दिन से ही एनसीपी और शिवसेना से गठबंधन कर सरकार बनाने की राय रखते थे. मैं उस दौरान उनके साथ-साथ रहा.'

लेकिन यहां ये समझना आसान हो जाता है कि किस तरह से तिकड़मबाजी करके शिवसेना की अगुवाई में एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन ने महाविकास अघाड़ी बनाकर सरकार बनाई. इस पूरे प्रकरण में शरद पवार ने काफी अहम भूमिका निभाई है. दरअसल, पवार को समझना किसी राजनीतिक चाणक्य के बस की बात नहीं है. 

क्या कहता है इतिहास?

इतिहास गवाह है कि शरद पवार अपने डबल माइंड गेम के लिए कितने प्रचलित हैं. पैतरेंबाजी के लिए मशहूर पवार ने साल 1978 में जो खेल किया था उससे हर कोई वाकिफ है. वसंतदादा पाटील की सरकार में मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने पलटी मारकर 38 विधायकों को तोड़ लिया था और खुद सीएम की कुर्सी पर विराजमान हो गए थे. उस वक्त वसंतदादा पाटील की सरकार गिराकर पवार उस वक्त के सबसे युवा सीएम बन गए थे.

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सन् 1999 मे सोनिया गांधी के विदेशी मूल मुद्दे को हवा देकर कांग्रेस से अलग हुए और चुनाव जीतने के बाद उसी कांग्रेस से हाथ मिलाकर महाराष्ट्र में सरकार भी बना ली. इनका ही नहीं वो UPA की मनमोहन सरकार मे मंत्री भी बन बैठे थे. शरद पवार की राजनीति में चाणक्य नीति वक्त-वक्त पर अलग अलग देखी गई है. लेकिन फडणवीस के इस दावे के बाद एक बार फिर सवाल उठने शुरू हो गए हैं.

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