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बंगाल और केंद्र सरकार में एक बार फिर ठन गई! जानिए- क्या है वजह?

एक बार फिर बंगाल की सियासत में उबाल तेज हो गया है. राज्य की ममता सरकार और केंद्र के बीच ठनी हुई है. आखिर क्या है इस सियासी जंग की वजह?

बंगाल और केंद्र सरकार में एक बार फिर ठन गई! जानिए- क्या है वजह?

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने एक बार फिर बीजेपी और केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है. दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने सूबे के गवर्नर जगदीप धनखड़ की ना सिर्फ अनदेखी की है बल्कि उन्हें नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. राज्यपाल धनखड़ मंगलवार को नॉर्थ 24 परगना के दौरे पर थे और जिले के आला अधिकारियों के साथ उनकी बैठक होने वाली थी. लेकिन जिले के डीएम ने राजभवन को चिट्ठी लिखकर दो टूक कह दिया कि जब तक राज्य सरकार आदेश नहीं देगी तबतक बैठक के लिए किसी को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा.

चिट्ठी में क्या लिखा था?

चिट्ठी में ये भी लिखा गया कि अधिकारी भी इस बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे क्योंकि सभी वरिष्ठ अफसर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उत्तर बंगाल दौरे पर साथ गए हुए हैं. गौर करने वाली बात ये है कि गवर्नर जगदीप धनखड़ ने 17 अक्टूबर को ही जिला प्रशासन को चिट्ठी लिखकर अपने दौरे के बारे में जानकारी दे दी थी. अब खुद की हुई नाफरमानी से वे बेहद खफा हैं. और सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वे राज्य सरकार के अधीन हैं.

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि 'मुझे ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल में किसी प्रकार की सेंसरशिप है. मेरी यात्रा के बारे में 17 अक्टूबर को जिला प्रशासन को सूचित कर दिया गया था. जिलाधिकारी ने इस पर जवाब दिया कि राज्य सरकार की अनुमति के बाद अनुमति दी जाएगी. यह पूरी तरह असंवैधानिक है.'

ममता पर भाजपा ने साधा निशाना

साफ है कि गवर्नर की रुसवाई कर ममता सरकार ने केंद्र को खुली चुनौती दी है. इस मामले को लेकर बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार संविधान का पालन नहीं करती है. उन्होंने कहा कि अगर राज्य के राज्यपाल को अनुमति लेनी पड़े तो इसका मतलब है कि ममता जी का कानून पश्चिम बंगाल में काम करता है, ना कि देश का कानून.

दरअसल पश्चिम बंगाल और केंद्र में एनआरसी को लेकर पहले से ही ठनी हुई है. बीजेपी पूरे देश में एनआरसी की बात कह रही है जबकि ममता बनर्जी ने खुलेआम कह दिया है कि वो पश्चिम बंगाल में एनआरसी लागू नहीं होने देंगी.

ममता ने क्या बोला?

हाल ही में सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि 'नॉर्थ बंगाल में एनआरसी को लेकर सबसे ज्यादा घबराहट है. यहां अभी मेरी सरकार है और आगे भी रहेगी. आपलोगों की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है. यहां एनआरसी लागू नहीं होगी.'

साफ है कि ममता केंद्र सरकार को खुली चुनौती दे रही हैं. उधर बीजेपी का कहना है कि एनआरसी राज्य का मसला नहीं है. ये केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आता है. और जब केंद्र सरकार ये तय कर लेगी कि उसे एनआरसी लागू करना है तो फिर कोई नहीं रोक पाएगा.

और शुरू हो गई जुबानी जंग

कैलाश विजयवर्गीय ने ममता पर पलटवार करते हुए कहा कि 'वो अभी बंगाल की मुख्यमंत्री हैं देश की प्रधानमंत्री नहीं हैं. देश के अंदर एनआरसी लागू करना है कि नहीं करना ये केंद्र सरकार का काम है. देश के प्रधानमंत्री का काम है, देश के गृहमंत्री का काम है. वो काहे को परेशान हो रही हैं इतनी ज्यादा. केंद्र सरकार यदि निर्णय लेगी कि हमें एनआरसी लागू करना है तो लागू होगा उसमें ममता जी कुछ भी नहीं कर पाएंगी. क्योंकि ये केंद्र सरकार का निर्णय होगा.'

गौर करने वाली बात है कि असम में जब एनआरसी लागू हुई तो पड़ताल के दौरान वहां 19 लाख लोग अवैध रहते हुए पाए गए. पश्चिम बंगाल में ये तादाद असम से कहीं ज्यादा है. लेकिन अवैध घुसपैठियों ने किसी न किसी तरीके से अपना वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया है. अब ममता की नजर इस वोट बैंक पर है. ममता को भरोसा है कि ये घुसपैठिए उनका वोट बैंक हैं. अब केंद्र सरकार एनआरसी के जरिए अवैध तरीके से रहने वाले घुसपैठियों की पहचान करना चाहती है ताकि उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सके. लेकिन केंद्र की इस मुहिम में सबसे बड़ा रोड़ा ममता सरकार है.