• कोरोना वायरस पर नवीनतम जानकारी: भारत में संक्रमण के सक्रिय मामले- 3,11,565 और अबतक कुल केस- 9,06,752: स्त्रोत PIB
  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 5,71,460 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 23,727 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 63.01% से बेहतर होकर 63.02% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 17,989 मरीज ठीक हुए
  • कोविड-19 के 5.5 लाख से ज्यादा मरीज ठीक हुए; सक्रिय मामलों की संख्या से ठीक हुए मरीजों की संख्या 2.5 लाख अधिक है
  • प्रति मिलियन परीक्षण में लगातार वृद्धि, पिछले 24 घंटे में 2,19,103 नमूनों का परीक्षण किया गया
  • भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए गूगल भारत में 10 अरब डॉलर का निवेश करेगा
  • सीबीडीटी आकलन वर्ष 2015-16 से 2019-20 के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से फाइल किए गए आईटीआर के सत्यापन में एक बार छूट प्रदान की है
  • जिन्होंने आईटीआर- V फॉर्म नही भरा और जिनके रिटर्न की प्रोसेसिंग लंबित हैं उनके लिए छूट
  • एमएचआरडी: यूजीसी के एमओओसी प्लेटफॉर्म पर 'फूड केमिस्ट्री' का कोर्स उपलब्ध है
  • कोविड मरीजों के साथ दुर्व्यवहार न करें, एक सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें

लॉकडाउन की डरवानी तस्वीरें: जगह-जगह सड़कों पर उतरे मजदूरों ने कहा, "घर जाना है"

मजदूरों की सिर्फ एक ही मांग है कि उन्हें घर जाना है. ऐशे में लॉकडाउन के बीच सरकार धीरे-धीरे करके उन्हें घर पहुंचाने का काम भी कर रही है, लेकिन कई जगहों पर उनके सब्र का बांध टूट गया है...

लॉकडाउन की डरवानी तस्वीरें: जगह-जगह सड़कों पर उतरे मजदूरों ने कहा, "घर जाना है"

नई दिल्ली: लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी कोई झेल रहा है तो वो प्रवासी मजदूर हैं. उनके घर जाने की व्यवस्था सरकारें कर रही है. उनके लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है लेकिन कई राज्यों में उनके सब्र का बांध टूटता जा रहा है. उनकी नाराजगी सड़कों पर दिख रही है.

सड़कों पर उतरे मजदूर, "हमें घर जाना है"

गुजरात के राजकोट और हरियाणा के गुरूग्राम में मजदूर घर जाने की जिद में सड़क पर उतर आए. फिर जो सामाजिक दूरी और लॉकडाउन की धज्जियां उड़ी वो घातक साबित हो सकती है.

राजकोट में कोरोना काल के सबसे डरावने पहलू

3 मई 2020 यानी रविवार को कोरोना काल में लॉकडाउन के बीच डराने वाली भीड़ सड़क पर उतरी. गुजरात के राजकोट में अचानक सैकड़ों मजदूर सड़क पर आकर प्रदर्शन करने लगे, हंगामा करने लगे और ये मांग करने लगे की उन्हें जल्द उनके घर भेजा जाए.

उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले इन मजदूरों का आरोप है कि उन्हें राशन, खाना नहीं मिल रहा है. कोई काम नहीं ऐसे में उन्हें घर भेजा जाए. सरकार कई राज्यों से स्पेशल ट्रेन चलाकर मजदूरों को उनके जिले में भेज रही हैं. लेकिन, कई जगह पर मजदूरों के सब्र का बांध टूट चुका है. उन्हें बस घर जाना है, लेकिन ये प्रदर्शन जहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है उनके और दूसरों के लिए घातक साबित हो सकती है.

लॉकडाउन में लापरवाही का जिम्मेदार कौन?

कुछ ऐसा ही मामला गुरूग्राम से आया, मानेसर में घर जाने की जिद में मजूदरों की भीड़ सड़क पर उतर गई. दरअसल, यहां मजदूर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए एक स्कूल  में पहुंच गए. इस भीड़ में सामाजिक दूरी तो भूल जाइए, लोगों के चेहरे पर मास्क तक नहीं था. किसी ने खबर फैलाई की घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन हो रहा है. फिर सैकड़ों की संख्या में मजदूर स्कूल में जुटना शुरू हो गए. जिसकी वजह से पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी.

भीड़ बेकाबू, उल्लंघन करने वालों पर नहीं काबू!

अब आपको तमिलनाडु के मदुरै की कुछ तस्वीरों को देखना चाहिए, जहां का नजारा देख हर कोई दंग रह गया.

तमिलनाडु के मदुरै में तो लोगों का हुजूम निकल पड़ा. साउथ वेली स्ट्रीट पर रविवार को बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर इकट्ठा हो गए. ये लोग लॉकडाउन में जारी पाबंदियों का विरोध कर रहे थे. इनकी मांग थी कि सरकार लॉकडाउन के चलते लगाई गई पाबंदियां हटाए. हालांकि, कुछ देर बाद पुलिस ने इन लोगों को वापस भेज दिया.

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देश में लॉकडाउन के तीसरे चरण से कोरोना को हराने का प्रण लिया जा रहा है लेकिन दूसरी ओर ऐसी तस्वीरें महामारी का डर बढ़ा रही है. सवाल ये है कि अगर सामाजिक दूरी अधूरी होगी, तो कोरोना को भगाने की जंग कैसे पूरी होगी.

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