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निजी कंपनी ने जाति के आधार पर निकाला नौकरी का विज्ञापन, फिर मांगी माफी

IRCTC के कैटरिंग कांट्रैक्टर के तौर पर जुड़ी बृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स प्रा. लि. ने  रेलवे फूड प्लाजा मैनेजर, ट्रेन कैटरिंग मैनेजर और बेस किचन मैनेजर के सौ पदों पर भर्ती के लिए पिछले दिनों एक अंग्रेजी अखबार में विज्ञापन निकाला था.इस विज्ञापन में साफ तौर पर अभ्यर्थियों के लिए अन्य योग्यताओं के साथ एक खास जाति का होने की शर्त रखी गई थी

निजी कंपनी ने जाति के आधार पर  निकाला  नौकरी का विज्ञापन, फिर मांगी माफी

नई दिल्लीः रेलवे की कैटरिंग के लिए जाति आधार पर भर्ती का विज्ञापन निकालना एक कैटरिंग कंपनी के लिए भारी पड़ गया. इस विज्ञापन के कारण जहां लोगों ने सोशल मीडिया पर कंपनी को ट्रोल किया वहीं रेलवे को भी आड़े हाथों लिया. मामला तूल पकड़ने के बाद रेलवे की ओर से कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद कंपनी ने न केवल गलती के लिए माफी मांगी, बल्कि संशोधित विज्ञापन प्रकाशित करने का आदेश दिया है. यह कारनामा किया आइआरसीटीसी के कैटरिंग कांट्रैक्टर के तौर पर जुड़ी बृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स प्रा. लि. ने, जिसने अग्रवाल जाति के लिए नौकरी निकाली थी.

यह रहा पूरा मामला
दरअसल आईआरसीटीसी अपने कुछ सेक्टर को प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से चला रहा है. फूडिंग और केटरिंग सेक्टर भी इनमें शामिल है. दूसरी ओर हमारा भारतीय संविधान सरकारी नौकरियों में जातिगत आरक्षण तो देता है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर इससे परे है. हालांकि केवल जाति आधारित भर्तियों की अनुमति निजी नियामकों (प्राइवेट सेक्टर) को भी नहीं है. रेलवे में आइआरसीटीसी के कैटरिंग कांट्रैक्टर के तौर पर जुड़ी बृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स प्रा. लि. ने ऐसा ही किया. कंपनी ने रेलवे फूड प्लाजा मैनेजर, ट्रेन कैटरिंग मैनेजर और बेस किचन मैनेजर के सौ पदों पर भर्ती के लिए पिछले दिनों एक अंग्रेजी अखबार में विज्ञापन निकाला था.

इस विज्ञापन में साफ तौर पर अभ्यर्थियों के लिए अन्य योग्यताओं के साथ अग्रवाल वैश्य समुदाय से होने की शर्त रखी गई थी. बुधवार को यह विज्ञापन प्रकाशित हुआ और जैसा कि हर सोशल मीडिया कंटेंट में लिखा होता है कि दोस्तों इसे आग की तरह फैला दो, तो यह विज्ञापन खूब फैल गया. इतना फैला कि रेलवे तक पहुंच गया. 

फिर रेल मंत्रालय ने मांगा जवाब
रेल मंत्रालय के अधिकारियों इस पर संज्ञान लिया और आइआरसीटीसी से तुरंत जवाब मांगा, साथ ही कारण बताओ नोटिस भी जारी कर दिया. मामले की नजाकत को देखते हुए कंपनी ने अपनी गलती मानी और अपने जूनियर एचआर मैनेजर को निलबिंत करने के साथ सीनियर एचआर मैनेजर को फटकार लगाई. बृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स प्रा. लि. रेलवे के लिए काम करने वाले प्रमुख कैटरिंग व हॉस्पिटैलिटी कॉन्ट्रैक्टर आरके एसोसिएट्स की सब्सिडियरी कंपनी है. आरके एसोसिएट्स के पास तकरीबन 100 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाओं का ठेका है और 5 हजार कर्मचारी इसमें काम करते हैं.

निदेशक ने कहा-गलती से लिखी शर्त
आरके एसोसिएट्स के प्रबंधन निदेशक राजीव मित्तल ने कहा कि अग्रवाल वैश्य समुदाय वाली शर्त गलती से लिख गई थी. उन्होंने सफाई दी कि दो अलग-अलग विज्ञापन जाने थे. इनमें एक रेलवे केटरिंग से और दूसरा हमारे वैश्य समुदाय के युवक-युवतियों से संबधित था, जिनके लिए कंपनी ट्रेनिंग का प्रोग्राम चलाती है. लेकिन एचआर मैनेजर ने गलती से उसे रेलवे कैटरिंग वाले विज्ञापन के साथ जोड़ दिया. जल्द ही संशोधित विज्ञापन जारी किया जाएगा. आइआरसीटीसी के प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि कंपनी को सख्त चेतावनी देकर छोड़ा गया है. 

यहां तो परीक्षा में भी पूछे जाते हैं जातिगत प्रश्न
नौकरी में जातिगत शर्त सामने आना अपने आप में नया मसला है, लेकिन इससे कुछ-कुछ मिलता-जुलता पहले भी घटता रहा है. दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की ओर से होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा में जातिगत प्रश्न पूछा गया था. 2018 में हिंदी विषय के प्रशन पत्र में प्रश्न संख्या 61 पर पूछे गए सवाल को जाति सूचक व भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया था. इस दौरान लोगों ने खूब हंगामा काटा था. समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने इस पर ऐतराज जताया था और बेहद गंभीर बताते हुए इसे बर्दाश्त नहीं करने की बात कही थी.

तमिलनाडु में भी सामने आया था मामला
तमिलनाडु में केंद्रीय विद्यालय के छठी कक्षा में भी बच्चों से जाति सूचक प्रश्न पूछा गया था. यह मामला सितंबर 2019 का है और द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने इस पर ट्वीट किया तो इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया. उन्होंने लिखा कि केंद्रीय विद्यालय की छठी कक्षा में पूछे गए सवाल को देखकर स्तब्ध हूं. यह सवाल जातिगत भेदभाव और सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करता है. इस प्रश्नपत्र को बनाने में जिसका भी हाथ है, उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. हालांकि सीबीएसई ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस प्रश्नपत्र को फर्जी करार दिया था.

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