श्रीलंका के इतिहास में पहली बारः गोटाबाया राष्ट्रपति, महिंदा फिर बनेंगे पीएम

महिंदा राजपक्षे का राजनीतिक सफर रिकॉर्ड कायम करने वाला रहा है. 1970 से उनकी राजनीति ने परवान चढ़ना शुरू किया था. तब वह महज 24 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे. श्रीलंका के इतिहास में यब पहली बार है कि देश के दो सर्वोच्च पदों पर दो सगे भाई बैठेंगे.

श्रीलंका के इतिहास में पहली बारः  गोटाबाया राष्ट्रपति, महिंदा फिर बनेंगे पीएम

नई दिल्लीः श्रीलंका के इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है कि देश के दो सबसे उच्च पदों पर सगे भाई बैठेंगे. हाल में राष्ट्रपति चुने गए गोटाबाया राजपक्षे ने बड़े भाई महिंदा राजपक्षे को देश का प्रधानमंत्री नामित किया है. अभी तक इस पद पर रानिल विक्रमसिंघे मौजूद थे. बुधवार क उनके इस्तीफा देने के बाद यह निर्णय लिया गया.  महिंदा राजपक्षे इससे पहले राष्ट्रपति रह चुके हैं. उनका कार्यकाल 2005 से 2015 तक रहा है. यह वही समय था जब प्रभाकरण के नेतृत्व वाले संगठन एलटीटीए के खिलाफ लड़ाई तेज की गई थी और उसका सफाया किया गया था. 

महिंदा सबसे कम उम्र में बने थे सांसद, एक विवाद भी जुड़ा
महिंदा राजपक्षे का राजनीतिक सफर रिकॉर्ड कायम करने वाला रहा है. 1970 से उनकी राजनीति ने परवान चढ़ना शुरू किया था. तब वह महज 24 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे. विक्रमसिंघे गुरुवार को औपचारिक रूप से पद से हट जाएंगे जिसके बाद महिंदा पद की शपथ लेंगे. महिंदा ने 2005 में सत्ता हासिल की थी और इस दक्षिण एशियाई देश के सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहे थे.

महिंदा को 26 अक्टूबर, 2018 को तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना ने पीएम नियुक्त किया था, जिन्होंने एक विवादित कदम उठाते हुए विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सिरिसेना के फैसले को अवैध करार दिया गया था. 

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गोटाबाया ने प्रेमदासा को हराया
मौजूदा प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार दोपहर पीएम पद से इस्तीफे की घोषणा की. विक्रमसिंघे की पार्टी के नेता को राष्ट्रपति चुनाव में हार मिली है. गोटाबाया ने विक्रमिसंघे के डेप्युटी सजित प्रेमदासा को राष्ट्रपति चुनाव में हराया. विक्रमिसंघे ने कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति गोटाबाया से मंगलवार को मुलाकात की और श्रीलंका की संसद के भविष्य को लेकर बातचीत की. 

उन्होंने कहा कि संसद में उनकी सरकार को अभी भी बहुमत हासिल है और उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे को मिले जनादेश को देखते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है.

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विक्रमसिंघे तीन बार रहे हैं प्रधानमंत्री
रानिल विक्रमसिंघे 1994 से यूएनपी के नेता रहे हैं और तीन बार श्रीलंका के पीएम रहे हैं. प्रेमदासा की हार के बाद उनपर दबाव था. पार्टी के युवा नेता और मंत्री हरीन फर्नेंडो ने पत्रकारों से कहा कि वे चाहते हैं कि विक्रमसिंघे पार्टी नेतृत्व छोड़ें और प्रेमदासा को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करें.

महिंदा राजपक्षे की सरकार चलाने के लिए 15 सदस्यीय केयर टेकर कैबिनेट काम करेगी क्योंकि फरवरी में संवैधानिक रूप से संसद को भंग किया जाएगा.

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