ग्वालियर एयरबेस पर राफेल की नई चौकी! बड़े फाइटर जेट बेस के लिए IAF ने कसी कमर, चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी सीधी नजर

Air Force Base Upgrade: ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन को अपग्रेड कर दिया गया है. ताकि यहां दसॉल्ट रफाल लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त स्क्वॉड्रन तैनात की जा सके. फिलहाल रफाल की एक-एक स्क्वॉड्रन अंबाला और हासीमारा में तैनात है. अब ग्वालियर को भी भविष्य के लिए तैयार कर दिया गया है.

Written by - Sachendra Singh | Last Updated : Nov 15, 2025, 02:31 PM IST
  • ग्वालियर एयरबेस रफाल तैनाती के लिए तैयार
  • 1200 करोड़ में बड़ा अपग्रेड पूरा
ग्वालियर एयरबेस पर राफेल की नई चौकी! बड़े फाइटर जेट बेस के लिए IAF ने कसी कमर, चीन-पाकिस्तान सीमा पर होगी सीधी नजर

भारतीय वायुसेना (IAF) ने चुपचाप एक बड़ी रणनीतिक चाल चली है. खबर है कि ग्वालियर एयर फोर्स स्टेशन को अपग्रेड कर दिया गया है. ताकि यहां दसॉल्ट रफाल लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त स्क्वॉड्रन तैनात की जा सके. फिलहाल रफाल की एक-एक स्क्वॉड्रन अंबाला और हासीमारा में तैनात है. अब ग्वालियर को भी भविष्य के लिए तैयार कर दिया गया है. भारत 114 नए फाइटर जेट्स खरीदने का प्लान MRFA प्रोग्राम के तहत आगे बढ़ा रहा है. ऐसे में IAF के लिए यह जरूरी हो गया था.

ग्वालियर कैसे बदला?
साल 2024 की शुरुआत में अपग्रेड का काम शुरू हुआ था. 2025 के बीच तक इसे लगभग पूरा कर लिया गया. अब यह बेस सिर्फ मिराज-2000 का घर नहीं रहा है. यह पूरी तरह से Rafale-ready एयरबेस बन चुका है.

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बेस पर किए गए बड़े बदलाव
18 से 20 रफाल जेट्स के लिए नए हैंगर और शेल्टर बनाए गए हैं. यहां पर एडवांस्ड मेंटेनेंस सुविधाएं तैयार की गई हैं. रनवे और सपोर्ट सिस्टम को अपग्रेड किया गया है. कुल मिलाकर 1,500 एकड़ का यह एयरबेस अब एक साथ बड़े स्तर पर ऑपरेशन संभाल सकता है.

ग्वालियर की लोकेशन इसे ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स में मदद करेगी. इस स्टेशन से जरूरत पड़ने पर किसी भी दिशा में तेजी से तैनाती में आसानी होगी.

IAF की समस्या क्या है?
वायुसेना की स्क्वॉड्रन संख्या फिलहाल 42 के मुकाबले सिर्फ 31 रह गई है. ऐसे में नए बेस की तैयारी जरूरी है, ताकि भविष्य में आने वाले लड़ाकू विमानों को सुरक्षित और फैलाकर तैनात किया जा सके. अंबाला (17 स्क्वॉड्रन) और हासीमारा (101 स्क्वॉड्रन) पर पहले से दबाव है. ऐसे में ग्वालियर तीसरा मजबूत केंद्र बनेगा.

ग्वालियर अपग्रेड पर कितना खर्च हुआ?
इस एयरबेस को अपग्रेड करने पर करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इसमें इंडियन टेक्नोलॉजी के साथ फ्रेंच कंपनी Thales की मदद भी ली गई है. अंबाला एयरबेस के शुरुआती अनुभव, जैसे धूल की समस्या से सबक लिया गया है. वहीं ग्वालियर में बेहतर फ़िल्टर और साफ-सुथरा इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया गया है.

ग्वालियर में 2028 तक पहली रफाल स्क्वॉड्रन तैनात हो सकती है. यह या तो नंबर 20 स्क्वॉड्रन होगी या फिर IAF इसके लिए एक नई स्क्वॉड्रन बना सकता है.

भारत का बड़ा MRFA सौदा
IAF 114 फाइटर जेट खरीदने की तैयारी कर रहा है. रफाल का मुकाबला F-21, यूरोफाइटर और ग्रिपेन से है. फ्रांस का रिकॉर्ड 36 रफाल समय पर डिलीवर करना और भारत में मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी उसे बढ़त देती है.

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About the Author

Sachendra Singh

सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई 'संगम नगरी' प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर 'ज़ी भारत : ZEE Bharat' के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. ...और पढ़ें

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