HAL HTFE-25 Jet engine: इंडियन एयरफोर्स के पायलटों की स्किल में इजाफा करने के लिए ट्रेनर विमानों की भूमिका बेहद अहम होती है. इन विमानों के जरिए पायलटों को रियल कॉम्बैट का एक्सपीरिएंस मिलता है. ऐसे में, HAL ने एयरोस्पेस के क्षेत्र में भारत की ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. HAL द्वारा विकसित किया गया स्वदेशी टर्बोफैन इंजन 'HTFE-25' जल्द ही इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर (IJT) विमान HJT-36 के नए वेरिएंट को जबरदस्त ताकत देगा, जिसे 'यशस' नाम दिया गया है. भारतीय वायुसेना में पायलटों के स्टेज-2 ट्रेनिंग के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है. फिलहाल यह ट्रेनर जेट किसी और विदेशी इंजन पर निर्भर है, लेकिन HTFE-25 के जुड़ने से, यह विमान इंजन के मामले में पूरी तरह से देसी हो जाएगा.
सिंगल-इंजन वाले ट्रेनर जेट को देगा ताकत
HAL द्वारा 25 किलो न्यूटन थ्रस्ट क्लास में विकसित यह टर्बोफैन इंजन, पांच टन तक के सिंगल-इंजन वाले ट्रेनर जेट और मानव रहित विमानों को शक्ति देने के लिए डिजाइन किया गया है. HTFE-25 इंजन ने पहले ही कई जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए हैं, जिनमें कम तापमान में स्टार्ट होने के परीक्षण और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रदर्शन के परीक्षण शामिल हैं.
वहीं, इसकी सफलता भारतीय एयरोस्पेस उद्योग को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी, जो खुद जेट इंजन बनाने की क्षमता रखते हैं. एचएएल की योजना साल 2030 तक इस इंजन का उत्पादन शुरू करने की है, जिससे भविष्य के सैन्य और व्यावसायिक विमानों के लिए एक स्वदेशी विकल्प तैयार हो जाएगा. ऐसे में, 'यशस' ट्रेनर जेट को इस इंजन से मिलने वाली नई ताकत भारतीय पायलटों को और भी बेहतर और सुरक्षित ट्रेनिंग देने में मददगार साबित होगी.
IJT-36 'यशस' का नया अवतार
HAL का HJT-36 पहले 'सितारा' नाम से जाना जाता था, लेकिन कई सुधारों के बाद अब इसे 'यशस' नाम दिया गया है. यशस को पायलटों की सेकेंड स्टेज ट्रेनिंग के लिए डिजाइन किया गया है. यह ट्रेनर विमान, पायलटों को प्रोपेलर वाले विमान से सीधे तेजस या सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों को उड़ाने के लिए तैयार करने में पुल का काम करता है.
सुधारे गए यशस विमान में पूरी तरह से ग्लास कॉकपिट, मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले (MFD) और हेड्स अप डिस्प्ले (HUD) जैसे फीचर्स हैं, जो इसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के बराबर बनाती हैं.
HTFE-25 इंजन में क्या खास?
HTFE-25 को खास तौर पर भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह इंजन 25 किलो न्यूटन का थ्रस्ट पैदा करता है. यह क्षमता ट्रेनर जेट के लिए बेहतर थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो देती है, जिससे विमान का प्रदर्शन बेहतर होता है. वहीं, इस इंजन का इस्तेमाल केवल ट्रेनर जेट तक ही सीमित नहीं है. इसे छोटे बिजनेस जेट और भारत के ड्रोन प्रोजेक्ट जैसे 'रुस्तम-2' के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
कब तक होगा इंटीग्रेशन?
इंजन और विमान के इंटीग्रेशन में अभी कुछ साल लगेंगे. HTFE-25 को पूरी तरह से प्रमाणित करने के लिए अभी कुछ और परीक्षण बाकी हैं, जिसमें पंखों के नीचे इसकी फिटिंग और विमान के साथ इसका प्रदर्शन शामिल होगा. HTFE-25 और बड़े इंजन जैसे HTSE-1200 टर्बोशाफ्ट इंजन का विकास HAL के लिए एक रणनीतिक लक्ष्य है, जिससे भविष्य में HAL विमान और हेलीकॉप्टरों के लिए पूरी तरह से देसी इंजन की आपूर्ति कर सकेगा.
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