भाजपा नेता ने जीतनराम मांझी को क्यों कहा ठग, जानिए पीछे का राज

राजनीति में किसी भी नेता या पार्टी का कोई भरोसा नहीं होता कि वह कब किस ओर मुड़ जाए. यहीं हाल बिहार के हिंदुस्तान आवाम मोर्चा प्रमुख जीतनराम मांझी का है जिन्होंने पहले तो ओवैसी से यह वायदा किया कि वे किशनगंज में सभा के दौरान उनके साथ मंच साझा करेंगे लेकिन पहुंच गए सोरेन के ताजपोशी में बड़े-बड़े नेताओं के संग मंच पर जगह लेने. क्यों, आइए जानते हैं.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 30, 2019, 07:37 PM IST
    • जदयू ने कहा बेलगाम है मांझी की महत्वाकांक्षाएं
    • भाजपा विधायक ने किया खुलासा लालू यादव के प्रभाव में आ गए मांझी
    • हम नेता ने कहा महागठबंधन के दबाव में रांची पहुंचे मांझी
    • राजद विधायक ने कहा जेल से लालू कैसे कर सकते हैं फोन ?
    • लालू के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं मांझी
भाजपा नेता ने जीतनराम मांझी को क्यों कहा ठग, जानिए पीछे का राज

पटना: जीतनराम मांझी कभी भाजपा के निकटतम साथियों में से एक थे. मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद जब जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने उनसे पदवी ले कर दोबारा अपनी ताजपोशी की, इसके बाद से ही मांझी जदयू से नाराज हो कर अलग हो गए. कुछ ही दिनों के भीतर अपनी ही एक पार्टी बना ली जिसका नाम था हिंदुस्तान आवाम मोर्चा. लेकिन राजनीति में मांझी के लिए एक कहावत मशहूर होने लगा जो बिहार में बड़ा प्रचलित है- बिन पेंदी के लोटा. इसका अर्थ मौकापरस्त से है. पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, CAA और NRC के मुद्दे पर विपक्षी में सभी दलों का साथ देने और असदुद्दीन ओवैसी की किशनगंज सभा में शामिल होने का दावा करने वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के मुखिया जीतन राम मांझी असदुद्दीन ओवैसी के साथ एक मंच पर नजर नहीं आए. वह इसलिए कि उन्होंने ओवैसी को छोड़ नए साथी हेमंत सोरेन की ताजपोशी में शिरकत करना अपने राजनीतिक करियर के लिहाज से ज्यादा मुनासिब समझा. लेकिन सवाल यह है कि क्या मांझी खुद ही शपथ ग्रहण समारोह में पहुंच गए या उनपर किसी के ज्ञान का प्रभाव हुआ. 

भाजपा विधायक ने किया खुलासा लालू यादव के प्रभाव में आ गए मांझी

अब इस मामले को लेकर भाजपा ने बड़ा खुलासा किया है. पार्टी के विधायक जीवेश मिश्रा ने दावा किया है कि होटवार जेल में बंद लालू यादव के दबाव पर जीतन राम मांझी रांची पहुंचे हैं. भाजपा प्रवक्ता जीवेश मिश्रा ने मांझी को मौकापरस्त बताया और कहा मांझी किसी के साथ नहीं हैं. मौके के अनुसार काम करते हैं. मौका मिलेगा तो भाजपा के साथ भी आ जाएंगे.

सभी दलों पर प्रेशर बनाकर अपने लिए चुनाव में सीट सुरक्षित करना चाहते हैं. वह दलित को धोखा दे चुके हैं और बिहार के मुस्लमानों को भी धोखा दे रहे हैं. मांझी सब को ठगने का काम कर रहे हैं और महागठबंधन के सभी दल इस बात को समझ रहे हैं. 
 
हम नेता ने कहा महागठबंधन के दबाव में रांची पहुंचे मांझी

वहीं मांझी की पार्टी के नेताओ का कहना है कि मांझी को किशनगंज में ओवैसी के साथ शिरकत करना था, लेकिन ऐन वक्त पर कार्यक्रम में बदलाव किया गया. पार्टी के प्रवक्ता विजय यादव की मानें तो हेमंत सोरेन का फोन आया और रांची जाने के लिए लालू यादव, तेजस्वी यादव के साथ महागठबंधन का दबाव था इसलिए वह रांची पहुंच गए.

राजद विधायक ने कहा जेल से लालू कैसे कर सकते हैं फोन ? 

वहीं राजद के विधायक विजय प्रकाश का कहना है कि जीतन राम माझी सभी वर्गों के नेता रहे हैं. सभी को साथ लेकर चलते हैं, जब लालू यादव के साथ है तो ओवैसी मांझी के लिए छोटा चीज हैं. असली रहनुमाई करने वाले लालू यादव है तो झारखंड के मंच पर सोरेनजी का साथ देने के लिए मांझी पहुंचे. लालू यादव फोन नहीं किए, क्योंकि वह जेल में हैं. यदि लालू यादव फोन कर पाए हैं तो इसमें राज्य में कार्यकारी सरकार जो कि भाजपा की थी, वह ही असल जिम्मेदार है और राज्य के निकम्मे ऑफिसर भी.
 
जदयू ने कहा बेलगाम है मांझी की महत्वाकांक्षाएं

इस मामले पर जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि जीतन राम मांझी को कोई भी बरगला सकता है और कोई भी इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि उनकी महत्वाकांक्षा बेलगाम है. आगे उनको कुछ भी दिखता है उस तरफ हो  लेते हैं. मांझी ऐसे बयानों के जरिए चर्चा में रहते हैं. बोलते कुछ और हैं करते कुछ और

लालू के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं मांझी 

भाजपा ने जिस तरह से जीतन राम मांझी की रणनीति पर आरोप लगाया है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि मांझी बिहार में लालू यादव के नक्शेकदम पर बढ़ने को बेताब हैं. राजद सुप्रीमो लालू यदव के MY यानी मुस्लिम यादव समीकरण को चुनौती देते हुए मांझी MD  यानी की मुस्लिम दलित समीकरण को साधने में लगे हुए हैं. लेकिन शायद लालू इस बात को समझ गए और इस पर पहले ही ब्रेक लगा दिया.

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