Gorakh Dhanda: क्या है गोरखधंधा, इस शब्द के इस्तेमाल पर क्यों लगा हरियाणा में प्रतिबंध

Haryana govt bans use of word Gorakh Dhanda: मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोरखनाथ एक संत थे और किसी भी राजभाषा, भाषण या किसी भी संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग उनके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करता है, इसलिए किसी भी संदर्भ में इस शब्द का उपयोग राज्य में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. इस संबंध में सरकार की ओर से जल्द ही एक अधिसूचना जारी की जाएगी.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Aug 19, 2021, 11:15 AM IST
  • 'गोरखधंधा' नाथ संप्रदाय के संत गुरु गोरखनाथ से जुड़ा हुआ है
  • इस शब्द के नकारात्मक अर्थ निकालने से पहुंचती है लोगों को ठेस

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Gorakh Dhanda: क्या है गोरखधंधा, इस शब्द के इस्तेमाल पर क्यों लगा हरियाणा में प्रतिबंध

Haryana govt bans use of word Gorakh Dhanda: चंडीगढ़:  हरियाण में अब 'गोरखधंधा' शब्द नहीं बोला जाएगा. मनोहर लाल खट्टर सरकार ने 'गोरखधंधा' शब्द के प्रयोग किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस फैसले के पीछे के जरूरी कारणों में बताया गया है कि एक सकारात्मक शब्द को बड़े ही नकारात्मक अर्थ में समझ लिया गया है.

इस शब्‍द का इस्‍तेमाल आमतौर पर अनैतिक प्रथाओं का ज‍िक्र करने के लिए किया जाता है. 'गोरखधंधा' नाथ संप्रदाय के संत गुरु गोरखनाथ से जुड़ा हुआ है. आधिकारिक बयान के अनुसार, गोरखनाथ समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद सीएम मनोहर लाल खट्टर ने यह फैसला किया है. 

संत गोरखनाथ के अनुयायियों को ठेस
जानकारी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से 'गोरखधंधा' शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था. उन्होंने कहा कि इस शब्द के नकारात्मक अर्थ निकालने से संत गोरखनाथ के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है.

जल्द जारी होगी अधिसूचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोरखनाथ एक संत थे और किसी भी राजभाषा, भाषण या किसी भी संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग उनके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करता है, इसलिए किसी भी संदर्भ में इस शब्द का उपयोग राज्य में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है. इस संबंध में सरकार की ओर से जल्द ही एक अधिसूचना जारी की जाएगी.

कहां से आया 'गोरखधंधा' शब्द
विकिपीडिया पर गोरखधंधा शब्द के ऐतिहासिक सफर का जिक्र है. इसके मुताबिक, गोरख धंधा शब्द गुरु गोरखनाथ के कई चमात्कारिक सिद्धियों के कारण प्रयोग में आया था. वह तंत्र के ज्ञाता थे. शुरुआत में बहुत जटिल, बहुत उलझे हुए काम को गोरखधंधा कहा जाता था. एक भजन भी है, 'माया का गोरखधंधा, कोई समझ न पाए रे'. यहीं से नुसरत फतेह अली खान, जब अपनी कव्वाली गाते हैं तो मुखड़े में कहते हैं, "तुम इक गोरखधंधा हो." यह कव्वाली कई सालों से काफी मशहूर है. 

कभी यहाँ तुम्हें ढूँढा, कभी वहाँ पहुँचा
तुम्हारी दीद की ख़ातिर कहाँ-कहाँ पहुँचा
ग़रीब मिट गए, पामाल हो गए लेकिन
किसी तलक न तेरा आज तक निशां पहुँचा

हो भी नहीं और, हर जा हो
हो भी नहीं और, हर जा हो
तुम इक गोरख धंधा हो!

पवित्र शब्द रहा है गोरखधंधा
यह तो हुई इस शब्द के सफर की बात. लेकिन, आजकल (तकरीबन पांच दशक से) सामान्य तौर पर किसी भी बुरे कार्य जैसे मिलावट, धोखा-धड़ी, छल-कपट, चोरी-छिपे भ्रष्ट कामों के लिए यह शब्द प्रयोग होने लगा है. संभवतः इसकी शुरुआत अंग्रेजों के दौर में हुई, जिस दौरान अंग्रेज भारतीय संस्कृति और सभ्यता के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे और साधु-संन्यासियों को कपटी बताने की हवा चल पड़ी थी. लेकिन गोरखधंधा इससे बहुत अलग और बहुत पवित्र रहा है. 

दरअसल, सारी गड़बड़ हुई यहां से कि लोग हिंदी में धंधा शब्द का सिर्फ एक ही अर्थ जानते हैं. धंधा यानी व्यापार करना या पेशा. लेकिन इसके तत्सम अर्थ में जाएं तो यह सिर्फ काम-काज और पेशे की बात नहीं करता, इसका एक अर्थ 'वृत्ति' भी है. वृत्ति यानी Tendency

गुरु गोरखनाथ ने बनाया था एक खास यंत्र
गोरखनाथ जिस धंधा का प्रयोग करते थे, दरअसल यह उनके एक यंत्र का नाम था, जिसे धंधारी या धंधाधारी कहा जाता था. गोरखपंथी साधु लोहे या लकड़ी की सलाइयों के हेर-फेर से एक चक्र बनाते हैं. उस चक्र के बीच में एक छेद करते हैं. इस छेद में से कौड़ी जो कि धागे से बंधी होती है, उसे डालते हैं. फिर मन्त्र पढ़कर उसे निकालते हैं. गोरखपंथियों का मानना था कि जो भी इस कौड़ी को सही तरीके से बाहर निकाल लेता था उस पर गुरु गोरखनाथ की विशेष कृपा होती थी और वह जीवन भर किसी भी किस्म के जंजाल में नहीं उलझता था. धागे में बंधी इस कौड़ी को बिना धागे के उलझे या किसी अन्य वस्तु को छुए निकालना होती थी.

इस तरह देखा जाए तो ‘गोरखधंधा’ कोई अपमानजनक शब्द नहीं है. वास्तव में यह शब्द तो खुद गुरु गोरखनाथ ने घुमंतु गोरखपंथी साधुओं के लिए ईजाद किया था. ऐसे में ‘गोरखधंधा’ शब्द पर पाबंदी लगाए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा था. 

क्या लोग समझ पाएंगे शब्द का सही अर्थ
धार्मिक मामलों के इतिहासकार भी कहते हैं कि मनुष्य के भीतर, अंतस की खोज के लिए गुरु गोरखनाथ ने जितना आविष्कार किया उतना शायद किसी ने भी नहीं किया है. उन्होंने इतनी विधियां दीं कि लोग उलझ गये की कौन-सी ठीक, कौन-सी गलत, कौन-सी करें, कौन-सी नहीं करें. यह उलझन हताशा बन गया और गोरख-धंधा शब्द प्रचलन में आ गया. जो समझ में ना आ सके वो गोरख-धंधा है.

हरियाणा सरकार ने गोरखधंधा पर प्रतिबंध तो लगा दिया है, लेकिन देखना यह है कि क्या वाकई यह शब्द फिर से अपने सकारात्मक अर्थ को पा सकेगा या नहीं. क्योंकि गुरु गोरखनाथ के ही शब्दों नें आप बाहरी रोक-टोक तो कर सकते हैं, लेकिन अंदर की रोक खुद ही करनी होगी. यानी लोगों को अपने मन में खुद ही इसके सही अर्थ को स्वीकार करना पड़ेगा. 

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