Bhopal Gas Tragedy की बरसी पर MP में अवकाश, क्या सरकार जहरीला कचरा भी हटाएगी

1984 की भोपाल की वह रात आज भी उन मौतों का शांत शोर ढोती है जो मौतें बिना किसी चीख और बिना शिकवा-शिकायत के हो गईं. 36 सालों का तकाजा यह है कि उस गैस कांड के पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी भी त्रासदी का दंश लेकर पैदा होती हैं और इसी के साथ जीने को मजबूर हैं. 

Bhopal Gas Tragedy की बरसी पर MP में अवकाश, क्या सरकार जहरीला कचरा भी हटाएगी

भोपालः आज से 36 साल पहले 3 दिसंबर की सर्द अंधेरी रात और अधिक स्याह हो गई थी, जब इसकी सुबह हुई तो 3000 से अधिक लोगों के लिए धुंध और कोहरा ही कफन था. एक बेरहम गुबार ने उन्हें अचेत कर दिया था. उनका दम घुट गया और वे असमय ही काल के गाल में समा गए.

1984 की भोपाल की वह रात आज भी उन मौतों का शांत शोर ढोती है जो मौतें बिना किसी चीख और बिना शिकवा-शिकायत के हो गईं. 36 सालों का तकाजा यह है कि उस गैस कांड के पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी भी त्रासदी का दंश लेकर पैदा होती हैं और इसी के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं. 

बंद रहेंगे कारखाने
इसी दर्द भरी रात के दुखभरे दर्द को एक बाऱ फिर मध्य प्रदेश सरकार ने याद किया है. जानकारी के मुताबिक, मध्‍य प्रदेश की शिवराज सरकार (Madhya Pradesh Government) ने भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) की याद में 3 दिसंबर को भोपाल में सभी सरकारी कार्यालयों को बंद रखने की घोषणा की है. 

मारे गए थे 3 हजार से अधिक लोग
3 दिसंबर 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कीटनाशक संयंत्र से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था. इस हादसे में कई हजार लोगों की मौत हुई, तो घायल होने वालों की तादाद भी हजारों में थी. इसके साथ ही इस हादसे से अजन्मे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी सवालिया निशान लग गया है.

यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन के भोपाल स्थित संयंत्र से दो-तीन दिसंबर, 1984 को एमआईसी गैस के रिसाव के कारण हुयी त्रासदी में तीन हजार से अधिक लोग मारे गये थे और 1.02 लाख लोग इससे बुरी तरह प्रभावित हुये थे. 

आज भी मौजूद है कचरे का जहर
जो त्रासदी हुई सो तो हुई, लेकिन सरकारों के आलसीपने और निष्क्रियता का आलम यह है कि आज तक मौत के इस कारखाने में जहरीला कचरा जस का तस पड़ा है. वह भी कोई दस-बीस, या 100 किलो नहीं, पूरे 350 टन जहरीला कचरा यहां मौजूद है जो आज तक लोगों को बीमार कर रहा है.

अदालतें तमाम आदेश दे चुकी हैं, लेकिन कचरा अपनी जगह से नहीं हिला. इसके कारण यहां की जमीन-जल और वनस्पतियां भी बरबाद हो रहे हैं. इंसानी नस्लें तो बीमार पैदा हो ही रही हैं. 

कचरे से 42 बस्तियों का भूजल जहरीला
साल 2012 में सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाने में दफन जहरीला कचरा राज्य की सरकारें हटवाने में आज तक नाकाम रहीं. सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निष्पादन किया जाए, लेकिन कारखाने में पड़े  350 टन जहरीले कचरे में से 2015 तक केवल एक टन कचरे को हटाया जा सका है.

इसे हटाने का ठेका रामको इन्वायरो नामक कंपनी को दिया गया है, लेकिन कचरा अभी तक क्यों नहीं हटाया जा सका, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. इस कचरे के कारण यूनियन कार्बाइड से आसपास की 42 से ज्यादा बस्तियों का भूजल जहरीला हो चुका है. पानी पीने लायक नहीं है, लेकिन किसी को फिक्र नहीं है.

मुआवजा...फैसला फाइलों में अटका
मुआवजे के मामले में कंपनी और केन्द्र सरकार के बीच हुए समझौते के बाद 705 करोड़ रुपये मिले थे. इसके बाद भोपाल गैस पीड़ित संगठनों की ओर से 2010 में एक पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें 7728 करोड़ मुआवजे की मांग की गई थी. इस मामले में अब तक फैसला नहीं हो पाया.

तीसरी पीढ़ी भी पैदा हो रही है दिव्यांग
Bhopal Gas Tragedy का असर इतना बुरा है कि आज 36 साल बाद भी तीसरी पीढ़ी का जन्म शारीरिक विक्रितियों के साथ होता है. समय पर भ्रूण का विकास न होना, जन्म के बाद कमजोर शरीर, दुबले-पतले कुपोषित बच्चे इस गैस कांड को हमेशा ताजा रखते हैं.

यहां के पीड़ित मीडिया बातचीत में कहते हैं कि आपको लगता होगा कि हादसे को 36 बरस हुए, हमारे घर में तो यह हादसा कल हुआ था, और आज भी जिंदा है. हमारे कमजोर बच्चे और उनकी अगली पीढ़ी भी इसे जी रही है. 

आंकड़ों की तस्वीर है भयावह
इस दर्द को आंकड़ों की शक्ल दे दें तो तस्वीर और भयावह है. गैस पीड़ि‍त संगठनों ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की तो पता चला कि 1048  गैस पीड़ि‍त महिलाओं के बच्चों में 9 प्रतिशत तक विकृतियां पाई गईं थीं. 247 सामान्य महिलाओं के बच्चों में विकृति की दर 1.3 फीसद थी.

हालांकि 2016 में किए गए इस अध्य्यन को त्रुटिपूर्ण बताकर खारिज कर दिया गया था. संस्थाओं के आरोप लगते हैं कि दूसरी और तीसरी पीढ़ी पर दुष्प्रभाव को उजागर करने से बचने की कोशिश होती रही है. 

वर्तमान सरकार से है उम्मीद
हालांकि वर्तमान में शिवराज सरकार ने इस आपदा के दिन को याद कर अवकाश की घोषणा की है. ऐसा करके उन्होंने उन निर्दोष मौतों को मान तो दिया है, साथ ही एक उम्मीद भी जगाई है कि हो न हो अब राज्य सरकार कारखाने से इस जहरीले कचरे का निष्पादन करेगी और गैस कांड के जारी इस लंबे दुष्प्रभाव पर नियंत्रण के लिए भी प्रयास करेगी. 

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