• पूरे देश में कोरोना वायरस के कुल सक्रिय मामले अभी तक 4312 हैं, अभी तक 124 लोगों की मृत्यु हुई, 353 लोग इलाज के बाद ठीक हुए
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल और अन्य सुविधाओं को तीन भागों में बांटा.
  • भारतीय रेलवे अपने डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा के लिए हर रोज एक हजार पीपीआई किट का निर्माण करेगी
  • कोरोना से निपटने के लिए राहत कार्यों में योगदान देने के लिए पूर्व सैनिकों ने स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान की
  • लॉकडाउन के बीच जहाजों का आवागमन होगा, पोत परिवहन मंत्रालय ने सुनिश्चित किया
  • सरकार के दीक्षा ऐप पर कोरोना से जूझने वालों के लिए इंटीग्रेटेड ऑनलाइन गवर्नमेन्ट ट्रेनिंग यानी IGOT कोर्स लाया गया है
  • पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की चपेट में 1,428,428, अब तक कुल 82,020 की मौत हो चुकी है. 3,00,198 मरीज ठीक भी हुए.
  • राज्यों में कुल कोरोना संक्रमण- महाराष्ट्र में 1161, तमिलनाडु में 690, दिल्ली में 606, तंलंगाना में 404, केरल में 336
  • उत्तर प्रदेश में 332 राजस्थान में 343, आंध्र में 324, मध्य प्रदेश में 280, कर्नाटक में 204, गुजरात में 168

Rakesh maira book: कांग्रेस राज में कर्तव्य निभाने पर ईमानदार अधिकारियों को मिलती थी सजा

देश में कांग्रेस ने कई स्तर पर भ्रष्टाचार और झूठ का बाजार गर्म कर रखा था. हालत ये थी कि ईमानदार अधिकारियों को कर्तव्य निभाने के लिए सजा दी जाती थी. मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की किताब से ये सनसनीखेज खुलासा हुआ है.

Rakesh maira book: कांग्रेस राज में कर्तव्य निभाने पर ईमानदार अधिकारियों को मिलती थी सजा

मुंबई: राकेश मारिया की किताब 'LET ME SAY IT NOW' ने कांग्रेस शासनकाल की कई गंभीर अनियमितताओं पर सवाल उठाया है. राकेश मारिया के समय में महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी की सरकार थी. जिसके नेता ईमानदार अधिकारियों पर अवांछित कार्यों के लिए दबाव डालते थे.

किताब में सनसनीखेज खुलासा
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया (Rakesh Maria) ने किताब में एक और बड़ा खुलासा किया है. अपनी किताब 'लेट मी से ईट नाऊ' में राकेश मारिया ने कांग्रेस-एनसीपी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. राकेश मारिया ने विलासराव देशमुख की सरकार में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एनसीपी नेता छगन भुजबल पर पुलिस जांच में दखलअंदाजी करने का आरोप लगाया है. मारिया की किताब के मुताबिक, दिसंबर 1999 में एक केस में उपमुख्यमंत्री के मन मुताबिक पुलिसिया कारवाई ना होने की वजह से तत्कालीन कांग्रेस एनसीपी सरकार ने मारिया का ट्रांसफर कर दिया था.

दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करने पर मिली सजा
साल 1999 में राकेश मारिया नॉर्थ वेस्ट रीजन के एडिशनल कमिश्नर थे. उस दौरान बांद्रा के रेस्तरां में कुछ रसूखदार लोगों ने होटल स्टाफ के साथ इसलिए मारपीट की थी क्यूंकि उनसे बिल भरने के लिए कहा गया था. मामले की शिकायत दर्ज हो गई. लेकिन राकेश मारिया तो तब बहुत आश्चर्य हुआ जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल ने मारिया को फोन करके इशारा कि मारपीट करने वाले आरोपियों के खिलाफ शिकायत को ज्यादा अहमियत ना दी जाए. यहां तक कि छगन भुजबल ने बिना पुलिस जांच पूरी हुए इतना तक कह दिया कि आरोपियों के खिलाफ दायर शिकायत झूठी है.

मारिया ने कर्तव्य निभाया
हालांकि ईमानदार अधिकारी राकेश मारिया राजनीतिक दबाव के आगे झुके नहीं. उनके निर्देश पर पुलिस ने शिकायत दर्ज करके मारपीट करने वाले कथित रसूखदारों को नवंबर 1999 में गिरफ्तार कर लिया था.

मिली ईमानदारी की सजा
राकेश मारिया में अपनी किताब में लिखा कि उनकी इस कार्रवाई से नाराज होकर दिसंबर 1999 में रेलवे कमिश्नर के पद से तबादला कर दिया गया था. ये एक ऐसी पोस्टिंग थी जिसे डिमोशन माना जाता था. जबकि नियम के मुताबिक उन्हें नॉर्थ वेस्ट रीजन में कम से कम दो साल की सेवा देनी थी, लेकिन मात्र 13 महीनों में ही उनका तबादला कर दिया गया.

राकेश मारिया की यह उदाहरण बताता है कि कांग्रेस  सरकार के समय में ईमानदार अधिकारियों पर कितना ज्यादा अवांछित दबाव डाला जाता था. जिसकी वजह से गुंडा तत्वों के हौसले बुलंद रहते थे. 

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