कांग्रेस परिवार में कैसे आया उधार का सरनेम 'गाँधी'

राहुल और सोनिया वाले आज के शीर्ष कांग्रेस परिवार में इंदिरा गाँधी के समय आया था 'गाँधी' सरनेम, किन्तु नेहरू से गाँधी सरनेम के इस परिवर्तन की वजह वैसे तो राजनीतिक नज़र नहीं आती थी, फिर भी मूल रूप से राजनीतिक ही थी.. 

कांग्रेस परिवार में कैसे आया उधार का सरनेम 'गाँधी'

नई दिल्ली. आज देश में गाँधी परिवार के नाम से जाना जाने वाला सोनिया-राहुल का परिवार मूल रूप से गाँधी सरनेम वाला नहीं है, यह सब जानते हैं. तीन पीढ़ियों से जुड़े इस सरनेम ने इस गाँधी परिवार को न केवल कांग्रेस में बल्कि देश में भी सर्वोच्च स्थान प्रदान किया. ये गाँधी सरनेम कब जुड़ा यह सरनेम और कैसे जुड़ा इस शीर्ष कांग्रेस परिवार से, आइये जानते हैं. 

इंदिरा के ज़माने से जुड़ा नेहरू परिवार में 'गाँधी' 

वैसे तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी मूल रूप से जवाहर लाल नेहरू की पुत्री होने के नाते इंदिरा नेहरू थीं किन्तु वे अपना नाम शुरू से ही इंदिरा प्रियदर्शिनी लिखा करती थीं. एक घटना ने उनके जीवन में 'गाँधी' सरनेम जोड़ दिया जिसका लाभ उनके वंशजों को आज तक मिलता आया है.

कैसे जुड़ा 'गाँधी' सरनेम इंदिरा नेहरू से 

अपने पिता जवाहर लाल नेहरू के कारण इंदिरा नेहरू भी महात्मा गाँधी के आश्रम की अति-प्रिय बेटियों में से थीं. इंदिरा नेहरू प्रायः साबरमती आश्रम जाया करती थीं. जब उनके विवाह वाली घटना ने उनके जीवन में दस्तक दीं तब नेहरू परिवार की बेटी का पारसी युवक फिरोज़ से विवाह रूढ़िवादी देश में आलोचना का विषय बन सकता शा. इस परिस्थितिजन्य समस्या का तोड़ निकला स्वयं गाँधी जी ने. और फिर गाँधी जी ने ही इंदिरा को गाँधी सरनेम दान दे दिया. 

गाँधी सरनेम का लाभ मिला नेहरू के परिवार को 

गाँधी के नाम से अच्छा नाम और क्या हो सकता था भारत में. देश के आमजन गाँधी जी की मिली-जुली राजनीतिक सोच से उतने परिचित न थे जितने वे उनसे प्रभावित थे. देश में गाँधी नाम एक आदर्श स्तम्भ के रूप में स्थापित था. इसलिए गाँधी नाम मिलना न केवल नेहरू परिवार के वंशजों के लिए वरदान सिद्ध हुआ बल्कि आगे के राजनीतिक भारत में समूची कांग्रेस को इसने लगातार जीवनदान दिया. 

नेहरू क्यों थे चिंतित इंदिरा प्रियदर्शिनी के विवाह को लेकर?

 जवाहर लाल नेहरू एक खांटी राजनीतिज्ञ थे. मूल रूप से उनकी सोच में विलासिता का दर्शन तो दिखाई देता था किन्तु  समानांतर रूप से वे राजनीति के पैंतरे बखूबी जानते थे. इसलिए इंदिरा के होने वाले इस विवाह के परिणाम को उन्होंने राजनीतिक चश्मे से देखा और ज़ाहिर उनके चिंतित होने का पूरा कारण बनता था. 

गांधी सरनेम ने तैयार कर दिया देश का प्रधानमंत्री परिवार

गाँधी सरनेम का सबसे बड़ा लाभ नेहरू परिवार को यह मिला कि इस नाम से इस परिवार ने देश की भावनाओं को जम कर भुनाया. चाहे वो खुद इंदिरा हों या आज की सोनिया, गांधी नाम का भावनात्मक लाभ इस परिवार को लगातार मिला और इतना मिला कि यह विश्व का सबसे बड़ा प्रधानमंत्री-परिवार बन चुका है.

जहां एक तरफ इंदिरा नेहरू मूल रूप से कश्मीरी पंडित परिवार से थीं, पारसी फिरोज़ मुंबई में जन्में थे किन्तु रहने वाले गुजरात के थे. युवा कांग्रेस के युवा नेता फिरोज़ नेहरू परिवार से जुड़े थे और इस तरह ही उनके प्रेम विवाह की यह भूमिका बनी थी,