13 टन वजनी आसमानी हत्यारा! सुपर देसी हेलीकॉप्टर IMRH की तैयारी पूरी, Mi-17 की छुट्टी कर दुश्मनों का निकालेगा कचूमर

IMRH helicopter: IMRH, भारत का अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्रोजेक्ट है, जिसे सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया जा रहा है.

Written by - Sachendra Singh | Last Updated : Nov 15, 2025, 05:24 PM IST
  • HAL को मार्च 2026 तक मंजूरी की उम्मीद
  • 13 टन वजनी स्वदेशी मल्टीरोल हेलीकॉप्टर
13 टन वजनी आसमानी हत्यारा! सुपर देसी हेलीकॉप्टर IMRH की तैयारी पूरी, Mi-17 की छुट्टी कर दुश्मनों का निकालेगा कचूमर

IMRH helicopter: भारतीय सशस्त्र बल की हवाई ताकत में जबरदस्त इजाफा होने वाला है. सेना को यह ताकत मल्टीरोल हेलीकॉप्टर से मिलने वाली है. जिसको लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड HAL को उम्मीद है कि भारत सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी CCS मार्च 2026 तक महत्वाकांक्षी इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) प्रोग्राम को मंजूरी दे देगी. यह मंजूरी इस 13 टन वजनी हेलीकॉप्टर के विकास और उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है. वहीं, दूसरी ओर HAL इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, और इसके डिज़ाइन को अंतिम रूप देने का काम यानी 'डिजाइन फ्रीज' एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका है, जो एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.

आईडीआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, HAL का मानना है कि CCS की मंजूरी के बाद इस हेलीकॉप्टर के प्रोटोटाइप का काम तेजी से शुरू हो जाएगा. डिजाइन फ्रीज का मतलब है कि हेलीकॉप्टर के डिजाइन और इंजीनियरिंग से जुड़े सभी मुख्य फैसले लिए जा चुके हैं, और अब आगे का काम उसी तय डिजाइन पर होगा. यह हेलीकॉप्टर Mi-17 जैसे पुराने हो चुके बेड़े की जगह लेगा और भारतीय सशस्त्र बलों को एक मजबूत, आधुनिक और पूरी तरह से स्वदेशी ताकत देगा.

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IMRH क्यों है इतना खास?
IMRH को भारतीय सशस्त्र बलों की कई जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो इसे मल्टीरोल वाला हेलीकॉप्टर बनाता है. यह 13 टन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है, जो भारी डिवाइसों, सैनिकों और राहत सामग्री को ले जाने की बड़ी क्षमता रखता है.

इसे सिर्फ सैनिकों को ले जाने के लिए ही नहीं, बल्कि हमला करने, खोज और बचाव, मेडिकल निकासी, और खास ऑपरेशनों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा. वहीं, इसका डिजाइन एडवांस है, जिसमें बेहतर एयरोडायनामिक्स और आधुनिक एवियोनिक्स शामिल हैं, जिससे यह ऊंचे पहाड़ों और मुश्किल मौसम में भी आसानी से काम कर सकता है.

प्रोजेक्ट का आगे का रास्ता
HAL इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि जल्द से जल्द हेलीकॉप्टर को सेना को सौंपा जा सके. डिजाइन फ्रीज एक तकनीकी मील का पत्थर है. इसका मतलब है कि अब डिजाइन में बड़े बदलाव नहीं होंगे और HAL सीधे प्रोटोटाइप बनाने और उसके परीक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकता है.

वहीं, CCS की मंजूरी मिलने का मतलब है कि इस पूरे प्रोग्राम के लिए सरकारी तौर पर बड़ी मात्रा में फंड जारी हो जाएगा. इससे IMRH का उत्पादन और विकास बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ पाएगा.

कब आएगा पहला प्रोटोटाइप?
सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो अगले कुछ सालों में IMRH का पहला प्रोटोटाइप तैयार होकर अपनी पहली उड़ान भर सकता है. यह स्वदेशी IMRH प्रोजेक्ट भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करेगा जो अपनी जरूरतों के लिए खुद ही इस श्रेणी के भारी और एडवांस हेलीकॉप्टर बनाने की क्षमता रखते हैं.

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About the Author

Sachendra Singh

सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई 'संगम नगरी' प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर 'ज़ी भारत : ZEE Bharat' के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. ...और पढ़ें

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