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इस एक मामले ने पीके की जिंदगी में खलबली मचा दी है, कस रहा है शिकंजा

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) की 12 नंबर की अदालत में प्रशांत किशोर ने जमानत की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद शनिवार को खारिज कर दिया.  शाश्वत गौतम नाम के शख्स ने प्रशांत किशोर पर कॉन्टेंट चोरी करने का आरोप लगाते हुए पटना के पाटलिपुत्र थाने में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करा था. इसके बाद प्रशांत किशोर जमानत के लिए अदालत की शरण में चले गए थे.

इस एक मामले ने पीके की जिंदगी में खलबली मचा दी है, कस रहा है शिकंजा

पटनाः जनता दल (यूनाइटेड) से निकाले गए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर मुश्किलों में फंसते जा रहे हैं. पटना की एक अदालत ने कॉन्टेंट चोरी के मामले में प्रशांत किशोर की जमानत अर्जी शनिवार को खारिज कर दी. प्रशांत के खिलाफ इस सिलसिले में पहले ही केस दर्ज हो चुका है.

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) की 12 नंबर की अदालत में प्रशांत किशोर ने जमानत की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद शनिवार को खारिज कर दिया.  शाश्वत गौतम नाम के शख्स ने प्रशांत किशोर पर कॉन्टेंट चोरी करने का आरोप लगाते हुए पटना के पाटलिपुत्र थाने में फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करा था. इसके बाद प्रशांत किशोर जमानत के लिए अदालत की शरण में चले गए थे.

प्रशांत किशोर के खिलाफ पटना के पाटलिपुत्र थाने में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (विश्वास तोड़ना) के तहत मामला दर्ज कराया गया है. अपने अभियान (बात बिहार की) के लिए कंटेट की नकल करने को लेकर पीके यानी प्रशांत किशोर फंसते नजर आ रहे हैं. मोतिहारी के रहने वाले शाश्वत गौतम ने एफआईआर दर्ज कराई है. एफआईआर में एक अन्य युवक ओसामा का भी नाम है. 

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एक और युवक का नाम है शामिल
ओसामा पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ सचिव का चुनाव लड़ चुका है. केस दर्ज करवाने वाले शाश्वत पूर्व में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं. दरअसल शाश्वत गौतम ने 'बिहार की बात' के नाम से अपना एक प्रोजेक्ट बनाया था, जिसे भविष्य में लॉन्च करने की बात चल रही थी. इसी बीच उनके यहां काम करने वाले ओसामा नाम के युवक ने इस्तीफा दे दिया.

आरोपों की मानें तो उसी ने शाश्वत गौतम के प्रोजेक्ट (बिहार की बात) के सारे कंटेंट प्रशांत किशोर के हवाले कर दिए. इसके बाद प्रशांत किशोर ने उन सारे कंटेंट को अपनी वेबसाइट पर डाल दिया.

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जांच में जुटी पुलिस
सूत्रों के मुताबिक, शाश्वत गौतम ने पुलिस को साक्ष्य भी दिए हैं. उनका दावा है कि अपने कंटेंट के साथ उन्होंने वेबसाइट को जनवरी में ही रजिस्टर्ड करवाया था. जबकि प्रशांत किशोर ने अपनी वेबसाइट को फरवरी में पंजीकृत करवाया. इधर, केस दर्ज होने के बाद पटना पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है. धारा 420, 406 के तहत हुई एफआईआर में कई कागजातों को जांच टीम खंगालेगी.

इस मामले में पटना पुलिस के आला अफसर सुपरविजन करेंगे जिसके बाद केस को सही या गलत करार दिया जाएगा. फिर आगे की कार्रवाई होगी.