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विश्वबैंक के इस रिपोर्ट ने दिया पूरे भारत को खुश होने का मौका

विश्वबैंक के एक रिपोर्ट ने भारत के चेहरे पर खोई हुई खुशी वापस ला दी और देश के उन तमाम लोगों को एक सांत्वना दिया जो एक आयरिश ऐड एजेंसी और जर्मन ऑर्गनाइजेशन के द्वारा जारी किए गए ग्लोबल हंगर रिपोर्ट में भारत की दयनीय स्थिति को देख मुंह लटकाए हुए थे. विश्वबैंक ने कहा कि भारत की वृद्धि रफ्तार के जारी रहने और एक दशक में अति गरीबी को पूरी तरह समाप्त कर लेने का अनुमान है.

विश्वबैंक के इस रिपोर्ट ने दिया पूरे भारत को खुश होने का मौका

नई दिल्ली: दरअसल, उस रिपोर्ट में भारत को ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 117 देशों की सूची में 102वां स्थान पर रखा गया है. लेकिन इसी बीच बुधवार को विश्वबैंक ने एक रिपोर्ट जारी किया जिसके आंकड़ें भारत सरकार को चैन की सांस दिलाने  में मददगार हो सकते हैं. विश्वबैंक ने जारी रिपोर्ट में कहा कि पिछले 15 साल में भारत ने न सिर्फ 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है बल्कि 1990 के बाद से गरीबी दर को घटाकर आधे पर ला दिया है. विश्वबैंक ने यह भी कहा कि अगर भारत इसी  वृद्धि रफ्तार से बढ़ता रहा तो  एक दशक के बीत जाने तक  गरीबी को पूरी तरह समाप्त कर पाने की दिशा में बेहतर परिणाम दिखा सकती है.

महिला कामगरों की संख्या में आई कमी 

विश्वबैंक की रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया कि प्रतिवर्ष तकरीबन 1.30 करोड़ लोग रोजगार पाने योग्य हो जाते हैं लेकिन बमुश्किल 30 लाख लोगों को ही रोजगार मिल पाता है. हाल के दिनों में ये संख्या और भी कम हुई है. इतना ही नहीं भारत में महिला कामगरों की संख्या में भी गिरावट आई है. जो भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. फिलहाल भारत में रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 27 प्रतिशत है, जो विश्व के कई विकासशील देशों से भी कम है.

इन विषयों पर दुनिया को भारत से लेनी चाहिए सीख: विश्वबैंक

विश्वबैंक ने यह बातें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ होने वाली सालाना बैठक से पूर्व कही. विश्वबैंक ने कहा कि भारत गरीबी को दूर करने से ले कर पर्यावरण में आ रहे लगातार बदलावों जैसे अहम गंभीर मुद्दों पर वैश्विक विश्व को एक नई सीख दे रहा है और उसके ये प्रयास दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं. हालांकि विश्वबैंक ने ये भी कहा कि भारत के सामने अभी कई चुनौतियां भी हैं जो उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित भी कर रहे हैं. देश पर कम संसाधनों में बेहतर कार्य करने का दबाव भी है. फिर चाहे वो जमीन की उपलब्धता से संबंधित हो या कृषि के लिए उपकरणों की आवश्यकता, इन तमाम चीजों पर भारत को किसी तरह नए रोडमैप के साथ आगे बढ़ना होगा. 

जल प्रबंधन को लेकर ठोस कदम लेने की आवश्यकता 

भारत में जल प्रबंधन पर विशेष काम किए जाने की आवश्यकता के बारे में विश्वबैंक ने कहा कि भारत को जल प्रबंधन के लिए जल्द ही कोई ठोस नीति अपनानी होगी तभी समेकित विकास किया जा सकेगा. देश को कार्बन उत्सर्जन वाले विद्युत उत्पादन को कम करने और बिजली आपूर्ति के बेहतर इंतेजाम किए जाने की सलाह भी विश्वबैंक ने दी. इसके अलावा विश्वबैंक ने बताया कि भारत को अपने आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए बुनियादी संरचना कुछ बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना होगा. इसके लिए जीडीपी को 8.8 प्रतिशत के बराबर यानी 343 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत को सबसे अहम रोजगार के नए आयाम भी खोलने होंगे तभी लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है.