भारत और आर्मेनिया के बीच करीब 4 अरब डॉलर की डिफेंस डील फाइनल होने की तैयारी में है. दोनों देशों के बीच (MoUs) के तहत यह डील होगी. यह आर्मेनिया की एयर डिफेंस, मिसाइल सिस्टम और तोपखाना क्षमता को मजबूत करेंगे. बताया जा रहा है कि इन डील्स में एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाश-NG’ (Akash-Next Generation) का अहम रोल होगा.
आकाश-NG से मिलेगी नई ढाल
आकाश-NG सिस्टम मौजूदा आकाश मिसाइल का अपग्रेडेड वर्जन है. इसे DRDO और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने तैयार किया है. इसकी खासियत है कि यह पहले की तुलना में दोगुनी दूरी से टारगेट को इंटरसेप्ट कर सकता है. इसकी रेंज अब 70 से 80 किलोमीटर तक बढ़ाई गई है. साथ ही इसमें 360 डिग्री मल्टी-फंक्शन रडार (MFDR) और 9 चैनल टारगेट हैंडलिंग सिस्टम दिया गया है. इसे एक साथ कई दुश्मन ड्रोन या मिसाइलों को निशाना बना सकता है. इसका सॉलिड-फ्यूल, रैमजेट इंजन इसे Mach 2.5 की रफ्तार तक ले जाता है. यह सिस्टम ड्रोन, क्रूज मिसाइल और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों से निपटने में सक्षम है.
2022 में आर्मेनिया बना था पहला विदेशी खरीदार
आर्मेनिया ने साल 2022 में भारत से 15 बैटरियों वाला आकाश-1S सिस्टम करीब 720 मिलियन डॉलर में खरीदा था. अब नए सौदे में आकाश-NG की 4 से 6 बैटरियों की खरीद की बात चल रही है. इसकी कीमत करीब 800 से 1000 मिलियन डॉलर होगी. इन सिस्टम्स को 2026 से पहले फ्रांस की Thales कंपनी के रडार सिस्टम के साथ जोड़कर टेस्ट किया जा सकता है.
आर्टिलरी की ताकत भी बढ़ेगी
इस डील में आर्टिलरी सिस्टम भी शामिल हैं. आर्मेनिया भारत से 155mm Advanced Towed Artillery Gun Systems (ATAGS) खरीदने जा रहा है. यह तोप DRDO द्वारा विकसित है. 48 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. Excalibur राउंड्स के साथ इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. करीब 600 से 800 मिलियन डॉलर के इस पैकेज में दो ब्रिगेड्स को यह सिस्टम मिलेगा. इसके साथ ZADS Counter-Drone Jammers भी दिए जाएंगे. ताकि दुश्मन ड्रोन से सुरक्षा मिल सके.
Make in India मॉडल पर लोकल प्रोडक्शन
इस डील में करीब 70% तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) का प्रावधान होगा. यानी कई पार्ट्स और असेंबली का काम आर्मेनिया के लोकल इंडस्ट्रियल यूनिट्स में किया जाएगा. इससे वहां की Scientific Research Center for Defense Technologies जैसी संस्थाओं को भी फायदा मिलेगा.
भारत बना नया भरोसेमंद पार्टनर
रूस के यूक्रेन युद्ध में फंसे होने के बाद आर्मेनिया अब अपनी डिफेंस जरूरतों के लिए भारत की तरफ देख रहा है. साल 2022 के बाद से ही भारत और आर्मेनिया के बीच करीब 1.5 अरब डॉलर की हथियार डील हो चुकी है. नई डील इसे अगले स्तर पर ले जाएगी. इसके साथ ही भारत कॉकस क्षेत्र (Caucasus) में अपनी पकड़ और मजबूत करेगा. अब तक रूस और तुर्की का प्रभाव रहा है.
सिर्फ डील नहीं, रणनीतिक साझेदारी
भारत और आर्मेनिया के बीच यह डिफेंस सहयोग अब सिर्फ हथियार बेचने तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें को-डेवलपमेंट और जॉइंट एक्सरसाइज भी शामिल होंगी. दोनों देशों ने 2024 में Indra-Arm एयर डिफेंस ड्रिल शुरू की थी. भविष्य में इसे और बढ़ाया जाएगा.
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