ना रेड, ना ग्रीन, ना येलो... फिर भी ट्रैफिक चलता है मस्त! भारत का पहला सिग्नल-फ्री शहर जहां जाम का नामोनिशान नहीं!

India first signal free city: आज हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताएंगे जो हमारी सोच बदल देती है की किसी शहर में बिना ट्रैफिक लाइट के कैसे संभाला जा सकता है ट्रैफिक. यहां के लोग बिना ट्रैफिक लाइट के भी सड़कों पर एकदम सही तालमेल बनाकर चलते हैं.  

Written by - Ishita Tyagi | Last Updated : Nov 8, 2025, 10:37 AM IST
  • फ्लाईओवर और अंडरपास से खत्म हुआ जाम
  • बिना लाइट भी सड़कों पर चलता है ट्रैफिक
ना रेड, ना ग्रीन, ना येलो... फिर भी ट्रैफिक चलता है मस्त! भारत का पहला सिग्नल-फ्री शहर जहां जाम का नामोनिशान नहीं!

India first signal free city: भारत के व्यस्त शहरों में ट्रैफिक जाम और ट्रैफिक लाइट की समस्या आम है. लेकिन राजस्थान का एक ऐसा शहर इससे अलग है. यहां एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं है. यह शहर पूरी तरह सिग्नल-फ्री है. लाखों छात्रों का यह केंद्र अब ट्रैफिक के मामले में भी मिसाल बन गया है. आइए आज हम आपको बताएंगे भारत के किस शहर में नहीं है ट्रैफिक लाइट.

भारत के किस शहर में नहीं है ट्रैफिक लाइट?
भारत का कोटा शहर अब ऐसा शहर बन गया है, जहां कोई ट्रैफिक लाइट नहीं है. ययह भारत का पहला ट्रैफिक लाइट फ्री शहर है. कोटा में ट्रैफिक संभालने के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास और राउंडअबाउट बनाए गए हैं, जिनसे अब सड़कों पर जाम नहीं लगता. यहां का ट्रैफिक बिना लाइट के भी आसानी से चलता है. 

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कोटा की खासियत
कोटा को कोचिंग कैपिटल कहा जाता है. यहां हर साल लाखों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. लेकिन शहर की सड़कें कभी जाम से परेशान नहीं होतीं. यहां कोई ट्रैफिक सिग्नल ही नहीं है. कोटा यूआईटी (अर्बन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट) ने स्मार्ट प्लानिंग से यह कमाल किया. छोटे-छोटे डायवर्जन रोड बनाए गए. सड़कें चौड़ी की गईं. चौराहों पर ओवरब्रिज और अंडरपास लगाए गए. रूट ऐसे डिजाइन किए गए कि वाहनों को रुकने की जरूरत ही न पड़े.  
पहले कोटा में ट्रैफिक की भारी समस्या थी. छात्रों की भीड़ और बढ़ते वाहनों से जाम लगता था. लेकिन 2024 में यूआईटी ने सभी सिग्नल हटा दिए. अब शहर सही तरह से चलता है. यह भारत का पहला और इकलौता ऐसा शहर है. 

कैसे संभलता है ट्रैफिक?
बिना लाइट के ट्रैफिक कैसे मैनेज होता है, यह सवाल सबके मन में आता है. कोटा में रिंग रोड सिस्टम है. मुख्य सड़कें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. वाहन आसानी से बायपास हो जाते हैं. ट्रैफिक पुलिस को कम मेहनत करनी पड़ती है. हादसे भी कम हुए हैं. शहर की आबादी 12 लाख से ज्यादा है, फिर भी सड़कें फ्लो पर चलती हैं.

लोगों को फायदा
कोटा के छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ मिला. पहले परीक्षा के समय जाम से देरी होती थी. अब समय पर पहुंचना आसान है. कोचिंग संस्थान जैसे अलन, रेजोनेंस यहां फल-फूल रहे हैं. शहर की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई. यात्री भी आकर्षित हो रहे हैं. चंबल नदी का किनारा और गरड़िया महादेव मंदिर देखने लायक हैं.

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About the Author

Ishita Tyagi

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से ताल्लकु रखने वाली इशिता त्यागी को जनरल नॉलेज की खबरों में खूब दिलचस्पी है. इन्होंने अपनी पत्रकारिता करियर की शुरुआत ज़ी मीडिया के साथ की है. वो फिलहाल ज़ी भारत के लिए ट्रेनी जर्नलिस्ट है. ...और पढ़ें

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