Mumbai flight information region NOTAM: दुनिया भर में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की बाढ़ सी आई हुई है. हथियारों-मिसाइलों के इस्तेमाल के साथ-साथ इलेक्टॉनिक वेपन भी अपना दमखम दिखा रहे हैं. जिसको लेकर भारत भी तैयारी में जुट चुका है. इसी कड़ी में मुंबई के फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन के GPS में रुकावट को लेकर NOTAM जारी किया गया है. आईडीआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक बड़ा संकेत है कि भारत की हवाई सीमाओं के पास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वारफेयर यानी साइबर और इलेक्ट्रॉनिक जंग की शुरुआत हो चुकी है. GPS सिग्नल में रुकावट का मतलब है कि दुश्मन, सिग्नल जैमिंग या स्पूफिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल करके विमानों के नेविगेशन सिस्टम को धोखा देने की कोशिश कर रहा है.
आपको बता दें, NOTAM एक खास तरह का नोटिस होता है जो विमानों को उड़ान भरने से पहले रास्ते में आने वाले किसी भी खतरे या बाधा के बारे में बताता है. मुंबई FIR के ऊपर GPS सिग्नल में रुकावट की चेतावनी देना एक असामान्य और गंभीर बात है. यह साफ इशारा करता है कि समुद्र या जमीन से कोई एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर इक्विपमेंट भारत के हवाई क्षेत्र को निशाना बना रहा है.
वहीं, GPS सिग्नल में रुकावट आने से नागरिक और सैन्य विमानों दोनों के लिए खतरा पैदा हो जाता है, क्योंकि विमान नेविगेशन के लिए पूरी तरह से GPS पर निर्भर होते हैं. सिग्नल जैम होने पर विमान को अपना रास्ता ढूंढने और सुरक्षित लैंडिंग में दिक्कत आ सकती है. यह NOTAM भारत को इस इलेक्ट्रॉनिक जंग का जवाब देने के लिए अपनी EW क्षमता को मजबूत करने का एक बड़ा संकेत देता है.
GPS इंटरफेरेंस का मतलब क्या?
GPS इंटरफेरेंस दो तरीके से हो सकता है, जो विमानों के लिए खतरा बन सकता है. पहला जैमिंग, यह तब होता है जब कोई डिवाइस GPS सिग्नल की फ्रीक्वेंसी पर एक तेज नॉइज सिग्नल भेजता है, जिससे असली सिग्नल दब जाता है और विमान को सही लोकेशन नहीं मिल पाती.
दूसरा स्पूफिंग, यह ज्यादा खतरनाक होता है. इसमें कोई डिवाइस GPS को फर्जी सिग्नल भेजता है, जिससे विमान को लगता है कि वह किसी और जगह है. इससे विमान को जानबूझकर गलत रास्ते पर ले जाया जा सकता है.
भारत के लिए खतरा और जवाब
इस NOTAM ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. GPS जैमिंग से नागरिक विमानों में नेविगेशन की दिक्कत आ सकती है, जिससे एयर क्रैश का खतरा बढ़ जाता है.
वहीं, इस खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत को अपने खुद के विमानों में एंटी-जैम्मिंग टेक्नोलॉजी और ज्यादा भरोसेमंद नेविगेशन सिस्टम जैसे भारत का नाविक/NaVIC को तेजी से लगाना होगा.
इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक जंग शुरू होने का मतलब है कि भारत को भी जवाबी कार्रवाई में दुश्मन के EW प्लेटफॉर्म की पहचान करके उन्हें जाम करने या नष्ट करने की तैयारी करनी होगी.
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