Su-30MKI SDR upgrade: भारतीय वायुसेना के फ्रंटलाइन के लड़ाकू विमान सुखोई Su-30MKI के पूरे बेड़े की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इस विमान को अब 'सुपर सुखोई' बनाने की प्लानिंग के तहत स्वदेशी तकनीक जैसे 'सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो' (SDR) और 'रडार वार्निंग रिसीवर' (DR-118 RWR) जैसे एडवांस इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) सिस्टम से अपग्रेड किया जा रहा है. यह अपग्रेड Su-30MKI को जबरदस्त स्टील्थ क्षमता देगा, जिससे वह आधुनिक हवाई युद्ध के मैदान में दुश्मन के पांचवीं पीढ़ी के विमानों से भी टक्कर लेने के लिए तैयार हो जाएगा.
भारतीय वायुसेना (IAF) की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े को आधुनिक रणनीतिक युद्ध के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम विकास हुआ है. इंडियन एयरफोर्स ने अपने इन शक्तिशाली विमानों में 'सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो' (SDR) और एडवांस 'रडार वार्निंग रिसीवर' (DR-118 RWR) सिस्टम को शामिल करने का काम शुरू कर दिया है.
यह अपग्रेडेशन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) के क्षेत्र में Su-30MKI की क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला है. दरअसल, पारंपरिक लड़ाकू विमान आजकल के आधुनिक रडार और मिसाइलों के सामने अधिक कमजोर हो जाते हैं. इसी कमजोरी को दूर करने के लिए यह 'मिड-लाइफ मॉडर्नाइजेशन' जरूरी था.
SDR: सुरक्षित संचार और जैमिंग से बचाव
सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR) को आजकल की हवाई जंग में एक गेम चेंजर माना जाता है. यह एक मॉडर्न कम्युनिकेशन सिस्टम है जो पूरी तरह से सॉफ्टवेयर पर आधारित होती है. SDR पुराने हार्डवेयर आधारित रेडियो की तरह नहीं है. इसे जरूरत के हिसाब से सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए तुरंत नए फ्रीक्वेंसी या संचार प्रोटोकॉल पर ढाला जा सकता है. यह विशेषता इसे दुश्मन की जैमिंग और इंटरसेप्शन से बचने में मदद करती है.
वहीं, यह इंडियन एयरफोर्स के अन्य विमानों और ग्राउंड स्टेशनों के साथ बेहद सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड तरीके से डेटा और आवाज के आदान-प्रदान को सुनिश्चित करता है.
DR-118 RWR: दुश्मन को पहचानने की अचूक क्षमता
DR-118 रडार वार्निंग रिसीवर (RWR) एक अत्यंत संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है. RWR का मुख्य काम विमान की तरफ आने वाले दुश्मन के रडार सिग्नल को पकड़ना और उनका विश्लेषण करना होता है. इतना ही नहीं, DR-118 RWR एडवांस इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करके यह तुरंत पता लगाता है कि क्या Su-30MKI पर दुश्मन के किसी रडार या मिसाइल ने निशाना साधा है.
साथ ही यह सिस्टम विमान को दुश्मन के रडार के सिग्नल के स्रोत और प्रकार की जानकारी देती है, जिससे पायलट को जवाब देने या बचने के लिए ज्यादा समय मिलता है. यह एक तरह से विमान को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में 'अदृश्य' बना देता है.
चीनी J-20 लड़ाकू विमानों को टक्कर
ऐसे में, अपग्रेड किया गया Su-30MKI क्षेत्रीय खतरों खासकर चीन के पांचवीं पीढ़ी के J-20 फाइटर जेट और पाकिस्तान के एडवांस JF-17 लड़ाकू विमानों के सामने भारतीय वायुसेना की हवाई ताकत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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