अब रोबोट डॉग करेंगे सरहद की निगरानी! इंडियन आर्मी ने Ghost Robotics Vision 60 को सीमा पर उतारा

Indian Army Vision 60 robot dog: Vision 60 जैसे रोबोटिक प्लेटफॉर्म को खासकर उन इलाकों में तैनात किया गया है जहां सैनिकों के लिए सामान ले जाना या निगरानी करना बहुत मुश्किल होता है. इसके साथ ही, टैक्टिकल हॉलर जैसे एडवांस वाहन लॉजिस्टिक्स की मुश्किलों को आसान करेंगे.

Written by - Prashant Singh | Last Updated : Nov 15, 2025, 11:10 AM IST
  • सरहद की निगरानी अब रोबोट करेंगे
  • Spear Corps ने शुरू की नई टेक वॉर
अब रोबोट डॉग करेंगे सरहद की निगरानी! इंडियन आर्मी ने Ghost Robotics Vision 60 को सीमा पर उतारा

Indian Army Vision 60 robot dog: भारतीय सेना का स्पीयर कॉर्प्स (Spear Corps) पूर्वोत्तर सीमा के दुर्गम और कठिन इलाकों में युद्ध की रणनीति को बदल रहा है. हाल ही में, सेना ने अपनी एक्सरसाइज में कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया है, जिसमें Ghost Robotics द्वारा विकसित Vision 60 रोबोट डॉग और नए टैक्टिकल हॉलर (Tactical Haulers) शामिल हैं. यह तैनाती इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना पारंपरिक लड़ाई के तरीकों को छोड़कर अब रोबोटिक्स और AI आधारित आधुनिक युद्ध की ओर तेजी से बढ़ रही है.

ऐसे में, सेना का मकसद स्पष्ट है. जोखिम कम करना, तेजी बढ़ाना और वास्तविक समय में डेटा हासिल करना ताकि दुश्मनों पर अचूक वार किया जा सके. यह तैनाती स्वदेशी मेक इन इंडिया पहल के तहत सेना के आधुनिकीकरण की स्पष्ट तस्वीर पेश करती है.

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रोबोट डॉग: Vision 60 की क्षमता
Ghost Robotics Vision 60 रोबोट को सेना ने कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तैनात किया है.

दुर्गम रास्तों पर नजर: यह रोबोट डॉग ऊबड़-खाबड़, बर्फीले या पहाड़ी रास्तों पर भी आसानी से चल सकता है, जहां सैनिकों को पहुंचने में मुश्किल होती है.

बेहतर निगरानी: इसे खास सेंसर्स और थर्मल विजन से लैस किया जा सकता है, जिससे यह दुश्मनों की घुसपैठ पर 24 घंटे नजर रख सकता है और रियल-टाइम डेटा भेज सकता है.

सैनिकों का बोझ कम: यह रोबोट खतरनाक मिशन पर सैनिकों को आगे भेजने से पहले खतरे की जांच करने और खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करता है, जिससे सैनिकों की जान को खतरा कम होता है.

टैक्टिकल हॉलर: लॉजिस्टिक्स का नया सहारा
अभ्यास में इस्तेमाल किए गए नए टैक्टिकल हॉलर सैनिकों के सामान ढोने का काम आसान करते हैं.

सामान ले जाने की क्षमता: यह विशेष वाहन दुर्गम इलाकों में भारी उपकरण, हथियार, गोला-बारूद और भोजन को कम समय में पहुंचाने में मदद करते हैं, जिससे फ्रंटलाइन पर सैनिकों की जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है.

तेज गतिशीलता: इन वाहनों को पहाड़ी और मुश्किल रास्तों के लिए ही डिजाइन किया गया है, जिससे गतिशीलता बढ़ती है और जरूरत पड़ने पर सैनिक तेजी से आगे बढ़ सकते हैं.

इस अभ्यास के जरिए, स्पीयर कॉर्प्स ने दिखा दिया है कि भारतीय सेना भविष्य के युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है, जहां रोबोट और सैनिक मिलकर काम करेंगे.

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