T-90 drone hunter: आधुनिक युद्ध में ड्रोन और सटीक हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए, भारतीय सेना अपने बख्तरबंद बेड़े को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रही है. इस दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जिसके तहत सेना के प्रमुख युद्धक टैंकों T-72 और T-90 को शक्तिशाली 'कैनिस्टर-लॉन्च लोइटरिंग म्यूनिशंस' (CLM) से लैस किया जाएगा. लोइटरिंग म्यूनिशंस को सामान्य भाषा में 'कामिकाज़ी ड्रोन' या 'स्विचब्लेड ड्रोन' भी कहा जाता है. इनकी खासियत यह है कि ये लॉन्च होने के बाद हवा में तय समय तक चक्कर लगा सकते हैं, अपने लक्ष्य को पहचानते हैं, और फिर उसी पर आत्मघाती हमला करके उसे नष्ट कर देते हैं.
ऐसे में, इन CLM को एक विशेष कंटेनर (कैनिस्टर) से सीधे टैंक से लॉन्च करने की क्षमता जोड़ने से T-72 और T-90 की न केवल मारक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें लड़ाई के मैदान में खुद को दुश्मन के एंटी-टैंक मिसाइल हमलों से बचाने की अतिरिक्त ताकत भी मिलेगी. यह स्वदेशी विकास भारत की जमीनी सेना को एक 'हंटर-किलर' की नई पहचान देगा.
लोइटरिंग म्यूनिशंस कैसे करते हैं काम?
लोइटरिंग म्यूनिशंस आधुनिक युद्ध की एक गेमचेंजर तकनीक है. यह भारतीय सेना के टैंकों को एक नया हथियार देगी.
हवा में ठहरना: CLM टैंक से दागने के बाद एक छोटे ड्रोन की तरह फैल जाते हैं और एक निश्चित ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं (लोइटरिंग). यह टैंक के क्रू को दुश्मन के ठिकानों, खासकर छिपे हुए एंटी-टैंक पोजीशन्स की पहचान करने में मदद करता है.
सटीक आत्मघाती हमला: जैसे ही ऑपरेटर लक्ष्य की पहचान करता है, यह ड्रोन तेजी से उस पर गोता लगाता है और खुद विस्फोट करके लक्ष्य को नष्ट कर देता है. यह टैंक की सीधी फायरिंग रेंज से बाहर के लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकता है.
T-72 और T-90 की क्षमताओं में इजाफा
भारत के पास T-72 और T-90 टैंकों का एक बड़ा बेड़ा है. इस नई तकनीक को जोड़ने से उनकी सामरिक उपयोगिता और बढ़ जाएगी. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CLM टैंकों को अपने बचाव के लिए भी एक 'हवाई आँख' प्रदान करेगा. टैंक क्रू इन ड्रोन का इस्तेमाल आसपास के खतरे को पहचानने और उसे नष्ट करने के लिए कर सकता है.
यह भारत को यूक्रेन युद्ध समेत अन्य आधुनिक संघर्षों से सीखने की क्षमता दिखाता है, जहां लोइटरिंग म्यूनिशंस ने युद्ध का परिदृश्य बदल दिया है. भारतीय सेना अब अपने बख्तरबंद स्तंभों (Armoured Columns) को दुश्मन के ड्रोन और एंटी-टैंक यूनिटों से बचाने में ज्यादा सक्षम होगी.
स्वदेशीकरण और भविष्य की योजना
इस परियोजना का बड़ा हिस्सा स्वदेशीकरण (Indigenization) पर केंद्रित है. माना जा रहा है कि इन CLM सिस्टम को डीआरडीओ (DRDO) या किसी प्रमुख स्वदेशी निर्माता कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा. इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि रखरखाव और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) भी सुरक्षित रहेगी.
ऐसे में, टैंकों पर इन सिस्टम को स्थापित करना और उन्हें टैंक के फायर कंट्रोल और कमांड नेटवर्क के साथ एकीकृत करना एक जटिल इंजीनियरिंग चुनौती है, जिसके लिए भारतीय इंजीनियर और तकनीशियन काम कर रहे हैं.
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