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कुछ इस तरह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटाने की तैयारी कर रही है केन्द्र सरकार

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर तमाम विशेषज्ञों की टिप्पणियों के बीच सरकार ने एक काउंसिल का गठन किया. इस पैनल में कुछ ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया गया है जिसके रहते अर्थव्यवस्था को ले कर कुछ सकारात्मक परिणाम दिख सकते हैं.  

कुछ इस तरह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटाने की तैयारी कर रही है केन्द्र सरकार





ऩई दिल्ली: भारत में हाल के दिनों में आर्थिक विषयों पर कई चर्चाएं फिलहाल सुर्खियों में बनी हुई है. वित्त मंत्री ने पिछले दिनों आर्थिक सुस्ती का जिम्मेदार पिछली सरकार की कमजोर आर्थिक नीतियों को बताया, जिसके तुरंत बाद कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप कर रही है. इसी तथाकथित ब्लेम गेम के बीच सरकार ने आर्थिक हालातों में तेजी से सुधार के लिए इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल( EAC) का गठन किया जिसमें हाल ही में कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी निलेश शाह और इंडिया स्ट्रैटजिस्ट एंड को-हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटजी के एमडी नीलकंठ मिश्रा को  भी जोड़ा गया.



इससे पहले ईएसी का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में किया गया. इस काउंसिल के गठन का मुख्य उद्देश्य बाजार में आई आर्थिक सुस्ती से निपटना है. दरअसल, रियल इस्टेट, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में उत्पादन से लेकर नौकरियों तक में कटौती के बाद बाजार की क्रय शक्ति( Purchasing Power) को काफी नुकसान हुआ जिसके बाद से सरकार ने कई तरीके अपनाने शुरू कर दिए. आर्थिक विशेषज्ञों के सलाह पर आर्थिक नीतियों को ढालने के एवज में ईएसी की शक्ल में कई कमिटियों का न सिर्फ गठन किया गया है, बल्कि नीति आयोग समेत फाइनेंस से जुड़ी उन सभी सरकारी संस्थाओं के कार्यान्वयन की रिपोर्टों की समीक्षा भी की जा रही है.



सरकार के द्वारा अब तक अपनाए गए कुछ नुस्खे



1. ऑटोमोबाइल सेक्टर में 36 फीसदी तक की गिरावट दर्ज किए जाने के बाद सरकार ने बैंक दरों को सस्ता किया ताकि बाजार में रूपए की लेनदेन (फ्लो) प्रभावित न हो जाए.

2.  इसके अलावा भारतीय बाजार का एक बड़ा हिस्सा विदेशी पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट के योगदान पर टिका हुआ है. बजट पेश होने के बाद तकरीबन 20,000 करोड़ का विदेशी इंवेस्टमेंट भारतीय बाजार से निकलने लगा था, जिसे रोकने के लिए वित्त मंत्रालय ने टैरिफ को संतुलित किया.

3. सस्ते दरों पर लोन मुहैया कराने के भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इसके लिए सरकार ने सरकारी बैंकों को 70,000 करोड़ दिए हैं.

4. लघु और मझोले उद्योगों के लिए सरकार ने जीएसटी के दायरों और अतिरिक्त दबाव को कम किया है ताकि व्यवसाय बिना बाधित हुए चलता रहे.

5.  इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाउसिंग लोन को और भी सस्ता और ज्यादा से ज्यादा को लाभ मिल सके उस दर पर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी संस्थाओं को दिशा-निर्देश दे दिए हैं.  




आर्थिक विशेषज्ञों के सलाह से पटरी पर लौटेगी इकोनॉमी



ईएसी के गठन के बाद फोर्ब्स मार्शल के सह-अध्यक्ष नौशाद फोर्ब्स ने कहा कि इस तरह के प्रयोग आर्थिक नीतियों के लिए बेहतर परिणाम वाले हो सकते हैं. बेहतरीन आर्थिक जानकारों को एक साथ एक संस्था के अंदर ला कर आर्थिक दशा को बहुत आसानी से बदला जा सकता है. बता दें कि ईएसी काउंसिल में पहले से भी कुछ आर्थिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो सरकार को आर्थिक नीतियों के कार्यान्व्यन को लेकर अपने-अपने सलाह देंगे.



विश्व बैंक ने भी लगाए थे अपने अनुमान



देश की आर्थिक स्थिति पर हर दिन आर्थिक जानकारों की कुछ न कुछ टिप्पणियां आ रही हैं. हाल ही में विश्वबैंक ने साल 2019-20 में भारत का विकास दर को 7.5 फीसदी से 6 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया है. मोदी सरकार 2.0 में निर्मला सीतारमण को  वित्त मंत्री बनाया गया जिसके तुरंत बाद पूरा विश्व ही आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया. उसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा. रियल इस्टेट, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में पिछले 2 दशक में सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई. जिसके बाद वित्त मंत्री सीतारमण को  ये सारी नीतियां अपनानी पड़ी. अब इन नीतियों के कितने बेहतर परिणाम निकल कर सामने आते हैं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.