देश में भ्रष्टाचार के मामलों में गिरावट, लेकिन पुलिस अब भी भ्रष्ट

क्या आप भी कभी रिश्वतखोरी के शिकार हुए हैं. एक कहावत है कि भारत में रहते हुए और सरकारी दफ्तरों में काम के लिए एक बार भी पधारे हों तो भ्रष्टाचार के दर्शन से अछूते नहीं रहे होंगे. ट्रैफिक से लेकर सरकरी दफ्तरों की कागजी प्रक्रियाओं तक में करप्शन नाम का भूत आपका पीछा नहीं छोड़ता. अब उसी भ्रष्टाचार से संबंधित एक रिपोर्ट आई है कि भारत भ्रष्टाचार के मामलों में सुधार कर रहा है.   

देश में भ्रष्टाचार के मामलों में गिरावट, लेकिन पुलिस अब भी भ्रष्ट

नई दिल्ली: इंडिया करप्शन सर्वे-2019( India Corruption Survey) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, भारत में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर. दिलचस्प बात यह है कि भारत में यह मामले काफी कम हुए हैं और देश की रैंकिंग भी सुधरी है, पिछले वर्ष की तुलना में. भारत इस वर्ष 180 देशों की सूची में 78वें स्थान पर है. पिछले वर्ष 81वीं स्थान पर रहा था, यानी इस वर्ष तीन स्थान का फायदा हुआ है. इसके बावजूद कुछ मामले ऐसे हैं जहां भ्रष्टाचार नाम का भूत कम होने का नाम नहीं ले रहा. पिछले 12 महीनों में देश के 51 फीसदी लोग कहीं न कहीं रिश्वतखोरी का शिकार होते ही हैं. फिर चाहे वह प्रॉपर्टी रजिस्ट्री की बात हो या पुलिसिया मामला, नगर निगम और ट्रांस्पोर्ट क्षेत्र के मामले, सभी जगह भ्रष्टाचार अभी भी व्याप्त मात्रा में है ही. 

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री मामलों में भ्रष्टाचार चरम पर

इंडिया करप्शन सर्वे  की रिपोर्टों पर एक नजर डालेंगे तो पाएंगे कि भारत में कुछ क्षेत्रों में सुधार तो हुए हैं लेकिन कई क्षेत्र ज्यों की त्यों बने हुए हैं. भ्रष्टाचार निरोधक कानून का संशोधन 2018 में किया गया. इसमें यह प्रावधान है कि सरकारी कर्मचारियों पर जो रिश्वत लेते हैं या किसी भी तरह से निजी फायदे के चक्कर में लोगों को घनचक्कर बनाते हैं, उनपर लगाम कसने के लिए कानून में कुछ कड़े प्रावधान हैं. भ्रष्टाचार को जमीन से खत्म या कम करने के लिए जरूरी है कि लोगों को पहले जागरूक किया जाए. 61 फीसदी लोगों को तो सरकार के हॉटलाइन सुविधाओं की जानकारी ही नहीं है जो पिछले कई दिनों से सक्रिय है. इस हॉटलाइन या हेल्पलाइन सुविधा का लाभ कई राज्यों में लोगों ने खूब उठाया भी है तो कई राज्यों में इस्तेमाल तक नहीं हुआ.  

पुलिसिया व्यवस्था में अब भी नहीं घटी रिश्वतखोरी

भ्रष्टाचार को कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए. सरकारी दफ्तरों में सीसीटीवी से लेकर दफ्तरों में पारदर्शिता लाने की कवायद, इन तमाम कदमों से रिश्वतखोरी को कम करने की कोशिश की गई. यहां तक की डिजिटालाइजेशन को प्रोमोट कर के कंप्यूटरीकृत व्यवस्था तक किए गए लेकिन बावजूद इसके दलाली के माध्यम से रिश्वतखोरी के नए-नए तरीके इजात कर लिए जा रहे हैं. ज्यादातर मामले प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से ही निकल कर सामने आ रहे हैं. इसके अलावा एक परेशानी का सबब यह भी है कि पुलिसिया व्यवस्था में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की घटनाओं पर अब भी लगाम नहीं कसा गया है. इस साल रिपोर्ट में पुलिसिया भ्रष्टाचार के मामलों में कोई कमी नहीं आई है. 

सरकारी बाबू हैं रिश्वत देने के लिए करते हैं  मजबूर

देश में एक समस्या अल्पसंख्यकों को ज्यादा दबाए जाने की भी है. रिपोर्ट में सर्वे के दौरान बताया गया कि अल्पसंख्यकों को डरा-धमका कर और जबरन सरकारी बाबू रिश्वत देने के लिए मजबूर करते हैं. सर्वे के दौरान मात्र 6 फीसदी लोगों ने ही कहा कि राज्य सरकार या लोकल प्रशासन की ओर से जरूरत के दौरान भी मदद मिली हो. 

देशभर के 20 राज्यों में कराए गए हैं सर्वे

यह सर्वे देश भर में 20 राज्यों में कराया गया. दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल, गोवा और ओडिशा कुछ ऐसे राज्य हैं जहां भ्रष्टाचार के कम मामले दर्ज किए गए या सामने आए. वहीं राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश, तेलांगना, कर्नाटक, तमिलनाडू, झारखंड और पंजाब में यह मामले लगातार बढ़ते ही जाते हैं और अब भी कहीं ज्यादा हैं. इन राज्यों में भ्रष्टाचार के इतने मामले आए हैं कि देश का औसत भी बिगड़ गया है.

सरकारी प्रयासों से आया है यह थोड़ा बदलाव

हालांकि, भ्रष्टाचार के मामले में थोड़ी-बहुत कमी जो भी आई है वह सरकारी कदमों की बदौलत ही आई है. देश में एंटी-करप्शन आंदोलन की शुरुआत करने वाले अन्ना हजारे ने जो जन लोकपाल की मांग की और उसे पूरा तो नहीं कुछ संशोधनों के साथ लागू किया गया, उसका लाभ जरूर मिला है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने नोटबंदी, बेनामी ट्रांजेक्शन बिल में संशोधन और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए जो कुछ कदम उठाए हैं, वह कुछ न कुछ योगदान दे रहा है. 

इंडिया करप्शन सर्वे-2019 की रिपोर्ट में देशभर के 248 जिलों से कुल 1,90,000 आवेदनों के माध्यम से मूल्यांकन किया गया है. जिसके बाद यह निकल कर सामने आया कि पिछले 12 महीनों में भ्रष्टाचार के मामले घटकर 51 फीसदी पर आ गए हैं. इसे ट्रांस्पारेंसी इंटरनेशनल इंडिया (Transparency International India) और लोकलसर्कल्स (LocalCircles)ने मिलकर तैयार किया है.