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इसलिए बेहद खास है पाकिस्तान के खिलाफ इस बार की सर्जिकल स्ट्राइक-3

पाकिस्तान के आतंकवादी कैंपों के खिलाफ भारत ने तीसरी बार कार्रवाई की. जिसमें दो दर्जन आतंकवादी और 8 से 10 पाकिस्तानी फौजी मारे गए. इसके पहले पीओके में पैदल घुसकर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक की और फिर बालाकोट में लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक किया था. आतंकी कैंप इस बार भी तबाह किए गए हैं. लेकिन इस बार सर्जिकल स्ट्राइक-3 का तरीका बिल्कुल अलग था. 

इसलिए बेहद खास है पाकिस्तान के खिलाफ इस बार की सर्जिकल स्ट्राइक-3
तोपखाने से तबाह हुए आतंकी कैंप

नई दिल्ली: पाकिस्तान पर भारत का कहर जारी है. हमारे देश के खिलाफ दुश्मन हर बार अपने आजमाए हुए पैंतरे चल रहा है. लेकिन केन्द्र में बैठी मजबूत सरकार उसके हर दुस्साहस का ऐसा करारा जवाब देती कि उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है. रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. जब पाकिस्तान ने अचानक सीजफायर तोड़कर हमारे दो जवानों को शहीद कर दिया. उसके बाद उसे अपने 10 फौजियों और दो दर्जन आतंकियों से हाथ धोना पड़ा. पहले की दो सर्जिकल स्ट्राइक की ही तरह कई आतंकी अड्डे तबाह कर दिए गए. आईए बताते हैं कि इस बार की सर्जिकल स्ट्राइक कैसे बेहद खास रही- 

बिना सीमा पार किए पूरा हुआ लक्ष्य
भारतीय सेना को हर बार आतंकवादियों के अड्डों को तबाह करने के लिए सीमा पार करने की जरुरत पड़ती थी. 

- साल 2016 के 29-29 सितंबर की रात में पीओके में आतंकी अड्डों के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय जवानों ने नियंत्रण रेखा से 3 किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकियों के 7 अड्डों को तबाह कर दिया था. इस अभियान में हमारे जवानों में  बहुत ज्यादा खतरा उठाया था. लेकिन खुशकिस्मती से सभी सुरक्षित लौट आए थे. 

- दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक लड़ाकू विमानों के जरिए हुई. 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना के 12 मिराज-2000 लड़ाकू विमान नियंत्रण रेखा पार करके बालाकोट में आतंकवादी कैंपों पर हमला किया और 250 से 300 आतंकियों को मार गिराया. इस दौरान भारतीय लड़ाकू विमानों को लगातार पाकिस्तान के रडारों और लड़ाकू विमान स्क्वैड्रन का खतरा रहा. 

- लेकिन रविवार को हुई सर्जिकल स्ट्राइक बिल्कुल अलग थी. इसमें भारतीय पक्ष ने बिना कोई खतरा मोल लिए, अपना लक्ष्य पूरा कर लिया. इस बार का हमला पहले से बिल्कुल अलग था. पहली बार पैदल सेना के जवानों ने पराक्रम दिखाया, दूसरी बार वायुसेना की तेजी ने कमाल किया लेकिन इस बार बारी थी तोपखाने की.

भारतीय के तोपखाने ने बिना सीमा पार किए जमकर गोलाबारी की. उनके निशाने पर नियंत्रण रेखा से से आधे किलोमीटर के क्षेत्र में बने आतंकी अड्डे थे. जिनपर तोपखाने का कहर बरस पड़ा. एक एक तोप ने घंटे में 60-60 गोले बरसाए. जिसकी वजह से चार आतंकी लांचिंग पैड्स पर मौजूद दो दर्जन(लगभग 24) आतंकवादी मारे गए. यही नहीं 8 से 10 पाकिस्तानी फौजी भी अंजाम तक पहुंचा दिए गए. 

हमले से दहशत में आ गया पाकिस्तान

इस हमले की शुरुआत पाकिस्तान ने ही की थी. उसने पहले की ही तरह सीजफायर तोड़कर सुबह सुबह कुपवाड़ा के तंगधार इलाके में गोलीबारी शुरु कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी से जब तक भारतीय जवान संभलते तब तक दो जवान शहीद हो चुके थे. एक नागरिक की मौत की भी खबर आ गई थी. 

लेकिन पाकिस्तान को अपना ये दुस्साहस बेहद महंगा पड़ा. दुश्मन भूल गया था कि केन्द्र में इस बार मजबूर नहीं बल्कि मजबूत सरकार है. जिसने अपने सिपाहियों को दुश्मन के खिलाफ हर तरह की छूट दे रखी है. अपने साथियों की शहादत से भारतीय सिपाहियों का गुस्सा भड़क गया. उन्होंने भारी तोपखाने का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी की नीलम और लीपा घाटी में बने आतंकी कैंपों पर कहर बरपाना शुरु कर दिया. 

भारतीय तोपखाने के इस भीषण हमले से पाकिस्तानी फौजी भाग खड़े हुए. फिर भी दुश्मन को अपने लगभग 10 जवानों से हाथ धोना पड़ा. चार आतंकी लांच पैड बुरी तरह तबाह हो गए. हालात इतने बिगड़ गए कि इस्लामाबाद तक पाकिस्तान की सत्ता हिलने लगी. 

पाकिस्तान ने भारत के डिप्टी हाईकमिश्नर गौरव आहलूवालिया को सीमा पर हुई गोलीबारी के बीच तलब कर लिया और उनसे सवाल जवाब किया. 

बेहद जरुरी थी यह कार्रवाई
हालांकि शुरुआत पाकिस्तान ने ही की थी. लेकिन भारत की तरफ से आतंकियों के लांचिंग पैड के खिलाफ कार्रवाई किया जाना बेहद जरुरी था. क्योंकि धारा 370 हटाए जाने के बाद भी घाटी में शांति है. यह स्थिति पाकिस्तान से देखी नहीं जा रही है. 

ऐसी खबर मिली थी कि पाकिस्तान इस बार नियंत्रण रेखा के बिल्कुल पास आतंकियों के लांच पैड बनाए थे. जहां पर भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के लिए आतंकवादी तैयार बैठे हुए थे. ऐसी भी खबर थी कि पाकिस्तानी फौज और वहां की बदनाम खुफिया एजेन्सी आईएसआई के अधिकारी कुछ दिनों पहले पाकिस्तान गए थे. जहां से वह 60 खूंखार आतंकवादियों को लेकर आए थे. 

इन अफगान आतंकियों को नियंत्रण रेखा के पास ही लांच पैड पर ठहराया गया था. यह बेहद अनुभवी और जंगजू आतंकवादी हैं. जो केवल पश्तो में बातें करते हैं. इसलिए उनकी बातें इंटरसेप्ट करना मुश्किल होता है. यह आतंकवादी अगर भारतीय सीमा में घुस आते तो बेहद मुश्किल होती.

इन अफगान आतंकियों सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में और भी कई आतंकियों को प्रशिक्षण देकर भारतीय सीमा में घुसाने की तैयारी की जा रही थी. लेकिन सीमा के इस पार से भारतीय तोपखाने के हमले ने इन आतंकी कैंपों को तबाह करके पाकिस्तान के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. 

 

इस मायने में भी अलग है इस बार की सर्जिकल स्ट्राइक
सीमा के इस पार से की गई सर्जिकल स्ट्राइक इस मायने में भी अलग है कि क्योंकि इसके पहले की दोनों सर्जिकल स्ट्राइक को पाकिस्तान ने हर बार नकारने की कोशिश की है. लेकिन इस बार दिन दहाड़े उजाले में भारतीय तोपखाने के दिवाली धमाके को झुठलाना पाकिस्तान के लिए भी आसान नहीं था. उसे भारतीय हमले की खबर स्वीकार करनी ही पड़ी.

हालांकि पाकिस्तान खुद से ज्यादा भारत के नुकसान का दावा कर रहा है. लेकिन नियंत्रण रेखा के उस पार भारतीय तोपखाने के वार से मची तबाही साफ साफ सच बयां कर रही है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 35 तक बताई जा रही है. मिल रही खबरों के मुताबिक भारतीय तोपखाने के हमले में पाकिस्तानी फौज का हथियार तथा तेल के डिपो को भी भारी नुकसान पहुंचा है.