कोरोना के साथ महंगाई की भी मार, 8 साल के उच्चतम स्तर पर थोक महंगाई दर

देश में थोक महंगाई दर आठ साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. इससे पहले अक्टूबर, 2012 में महंगाई दर इस स्तर पर पहुंची थी. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Apr 15, 2021, 08:25 PM IST
  • अप्रैल में और बढ़ सकती है थोक महंगाई दर
  • नीतिगत दरें निम्न स्तर पर रहने की उम्मीद
कोरोना के साथ महंगाई की भी मार, 8 साल के उच्चतम स्तर पर थोक महंगाई दर

नई दिल्ली:  कच्चे तेल और धातु की बढ़ती कीमतों के कारण थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में आठ साल के उच्चतम स्तर 7.39 प्रतिशत पर पहुंच गई.

पिछले साल मार्च में मुद्रास्फीति का निम्न आधार होने के कारण भी मार्च 2021 में माच माह की महंगाई ऊंची रही है. पिछले साल कोविड-19 महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के चलते कीमतें कम थीं.

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति एक महीना पहले फरवरी में 4.17 प्रतिशत और एक साल पहले मार्च में 0.42 प्रतिशत पर रही थी.

डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा, 'मुद्रास्फीति की वार्षिक दर मार्च 2020 के मुकाबले मार्च 2021 में 7.39 प्रतिशत (अनंतिम) रही.'

डब्ल्यूपीआई का इतना उच्च स्तर इससे पहले अक्टूबर 2012 में रहा था, जब मुद्रास्फीति 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.

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मार्च में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 3.24 प्रतिशत रही और इस दौरान दाल, फल तथा धान की कीमतों में कमी आई है.

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण मार्च में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति 10.25 प्रतिशत रही, जो फरवरी में 0.58 प्रतिशत थी.

वहीं खुदरा मुद्रास्फीति की यदि बात की जाये तो इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति चार महीने के उच्च स्तर 5.52 प्रतिशत पर पहुंच गई.

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि थोक महंगाई में बढ़ोत्तरी धातु, वस्त्र, रसायन, रबर आदि से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के टीकाकरण से दुनिया भर में आशावाद बढ़ा है, जिसके चलते प्रमुख जिंसों की कीमतें बढ़ रही हैं.

उन्होंने कहा कि हालांकि, मार्च 2021 में कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तर से गिरावट देखने को मिली, लेकिन इस कारण अप्रैल 2021 में भी मुद्रास्फीति के बढ़ने का अनुमान है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा रुपये में गिरावट का असर भी महंगाई के रूप में देखने को मिलेगा.

इक्रा को उम्मीद है कि मुद्रास्फीति अगले दो महीनों तक बढ़ेगी और अपने चरम पर प्रमुख मुद्रास्फीति 11-11.5 प्रतिशत और डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति 8-8.5 प्रतिशत पर रह सकती है.

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंडरा) के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि उच्च थोक मुद्रास्फीति का असर एक समय के बाद खुदरा मुद्रास्फीति पर देखने को मिलता है और इससे केंद्रीय बैंक का काम मुश्किल हो जाता है. हालांकि, इंडरा को उम्मीद है कि नीतिगत दरें निम्न स्तर पर ही रहेंगी.

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