INS इक्षक इंडियन नेवी में शामिल; थर्राया ड्रैगन, हिंद महासागर में भारत का यह ऑलराउंडर युद्धपोत बरपाएगा कहर

INS Ikshak Joins Indian Navy: यह इंडियन नेवी चीफ की मौजूदगी में कमीशनिंग हो गई है. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने केरल के कोच्चि नेवल बेस पर इक्षक को हरी झंडी दिखाई. इक्षक के नेवी में शामिल होने से नौसेना की समुद्र में पकड़ और मजबूत होगी. 

Written by - Sachendra Singh | Last Updated : Nov 6, 2025, 06:41 PM IST
  • इक्षक से नेवी को मिली नई हाई-टेक ताकत
  • जरूरत पड़ने पर बनेगा 40-बेड अस्पताल
INS इक्षक इंडियन नेवी में शामिल; थर्राया ड्रैगन, हिंद महासागर में भारत का यह ऑलराउंडर युद्धपोत बरपाएगा कहर

INS Ikshak Joins Indian Navy: भारतीय नौसेना को गुरुवार, 6 नवंबर को एक नई हाई-टेक ताकत मिल गई है. इसका नाम इक्षक है. यह इंडियन नेवी चीफ की मौजूदगी में कमीशनिंग हो गई है. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने केरल के कोच्चि नेवल बेस पर इक्षक को हरी झंडी दिखाई. इक्षक के नेवी में शामिल होने से नौसेना की समुद्र में पकड़ और मजबूत होगी. इक्षक से पहले दो सर्वेक्षण युद्धपोत भारतीय नौसेना के पास थे. इक्षक तीसरा बड़ा सर्वेक्षण युद्धपोत है. यह देश में बनी आधुनिक Sandhayak-Class Hydrographic Survey Vessel है. जो समुद्र की गहराइयों का नक्शा तैयार करेगी और पानी के भीतर छिपे खतरों की पहचान करेगी.

क्या है INS Ikshak?
INS Ikshak को मझगांव डॉक में तैयार किया गया है. इसकी लंबाई 110 मीटर, चौड़ाई 16 मीटर और वजन करीब 3,300 टन है. इसमें 231 क्रू मेंबर और 20 अफसर रह सकते हैं. यह जहाज 18 नॉट की रफ्तार से चल सकता है. इसमें दो डीजल इंजन लगे हैं. कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन त्रिभुवन सिंह ने बताया कि इक्षक सिर्फ एक सर्वे वेसल नहीं है. यह भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.

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खासियतें जो इसे खास बनाती हैं
इस जहाज में अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक उपकरण लगे हैं. इनमें हाई-रेजोल्यूशन मल्टी-बीम इको साउंडर, ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और चार सर्वे मोटर बोट्स (SMB) शामिल हैं. इसके अलावा एक हेलिकॉप्टर डेक भी है. जो इसके ऑपरेशन रेंज को बढ़ाता है. इसके जरिए समुद्र की गहराइयों का स्कैन, डूबे हुए जहाजों, तेल पाइपलाइनों और अंडरवॉटर केबल्स की पहचान की जा सकती है.

40-बेड का फ्लोटिंग हॉस्पिटल
INS Ikshak सिर्फ सर्वे के लिए नहीं है. जरूरत पड़ने पर इसे 40-बेड वाले फ्लोटिंग हॉस्पिटल में भी बदला जा सकता है. जहाज पर पहले से ही एक 6-बेड अस्पताल, ऑपरेशन थिएटर, आइसोलेशन वार्ड, ब्लड बैंक, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन की सुविधा है. बेस हॉस्पिटल की मेडिकल टीम (सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट आदि) भी जहाज पर तैनात की जा सकती है.

10000 मीटर तक सर्वे की क्षमता
इक्षक में लगे AUV और ROV सिस्टम समुद्र में 10000 मीटर तक की गहराई में सर्वे कर सकते हैं. यह सिस्टम 1000 मीटर की गहराई से 1500 मीटर तक के दायरे को स्कैन कर सकता है. AUV एक ऑनबोर्ड कंप्यूटर की तरह काम करता है. इसे लैपटॉप से प्रोग्राम करके 24 घंटे तक लगातार मिशन पर रखा जा सकता है.

विदेशी सर्वे मिशनों में भी काम आएगा
इक्षक के बनाए गए नेविगेशन चार्ट्स को नेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑफिस में भेजा जाएगा. जहां उनकी क्वालिटी जांच होगी. भारत ने अब तक मॉरीशस, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के लिए भी ऐसे हाइड्रोग्राफिक सर्वे किए हैं.

देसी तकनीक का बोलबाला
INS Ikshak का 80% हिस्सा स्वदेशी तकनीक से बना है. इसमें भारत में बनी स्टील, उपकरण और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है. यह पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ पहल का प्रतीक जहाज है. यह न सिर्फ समुद्र की गहराइयों को मापेगा. भारत की आत्मनिर्भर नौसेना का नया चेहरा भी बनेगा.

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About the Author

Sachendra Singh

सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई 'संगम नगरी' प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर 'ज़ी भारत : ZEE Bharat' के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. ...और पढ़ें

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