क्या लालू की चारा चोर वाली छवि साफ करने के लिए वायरल हो रहा 30 साल पुराना वीडियो

दिल्ली में हिंसा के बीच लालू प्रसाद यादव (राजद प्रमुख) का 30 साल पुराना वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें लालू यादव जो भाषण दे रहे हैं वह आज भी मौजूं हैं. लेकिन बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तरह लालू के इस वीडियो में ऐसा क्या है, जो इसे आज दिल्ली हिंसा के बीच जरूरी संदेश की तरह समझा जा रहा है. कहीं न कहीं इसमें चारा घोटाले के दाग को छुटाने की कोशिश लग रही है. 

क्या लालू की चारा चोर वाली छवि साफ करने के लिए वायरल हो रहा 30 साल पुराना वीडियो

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली 4 दिनों तक हिंसा की चपेट में रही है. सीएए के विरोध में हुई इस हिंसा ने आधिकारिक तौर पर 24 लोगों की जिंदगी लील है. कई इलाकों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है. ऐसे माहौल में राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में लालू प्रसाद यादव मंच से मानवता, लोकतंत्र और एक आम नागरिक की जान की कीमत की बात कहते दिखाई-सुनाई दे रहे हैं. दिल्ली हिंसा के बीच ट्वविटर पर आए इस वीडियो के कई सवालिया मायने दिख रहे हैं. 

पहले जानते हैं, वीडियो में क्या है?
आरजेडी मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव का कई साल पुराना विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. यह विडियो 1990 का है जब भाजपा ने लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में देशभर में रथ यात्रा निकाली थी. बिहार सरकार ने तब आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था. इस विडियो में लालू बिना नाम लिए आडवाणी को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं. उनकी शैली काफी आक्रामक लग रही है.  

यह कह रहे हैं लालू
1990 में बिहार में एक रैली के दौरान बिहार की जनता को संबोधित करते हुए लालू प्रसाद यादव कह रहे हैं, 'देशहित में अगर इंसान ही नहीं रहेगा तो मंदिर में घंटी कौन बजाएगा? जब इंसानियत पर खतरा हो, इंसान नहीं रहेगा तो मस्जिद में कौन इबादत देने जाएगा. लालू आगे कह रहे हैं, '24 घंटे मैं निगाह रखा हूं.

हमने अपने शासन की तरफ से पूरा उनकी सुरक्षा का भी व्यवस्था किया, लेकिन दूसरी तरफ हमारा सवाल है अगर एक नेता और एक प्रधानमंत्री का जितना जान का कीमत है, उतना एक आम आदमी का जान का भी कीमत है. 

इस वीडियो से किस पर निशाना?
सवाल है कि इस वीडियो से किस पर निशाना साधा जा रहा है. क्या यह वीडियो यह जताने-बताने की कोशिश है कि आज केंद्र में बैठी सरकार राजधानी में ही पनपे और फैल गए दंगों को नहीं काबू कर पा रही है. या फिर यह बताने की कोशिश है कि केवल लालू राज में ही जनता और आम नागरिक की जान का पूरा ख्याल रखा गया. केंद्र सरकार इसमें फेल रही है. उनका इशारा नागरिकता कानून की तरफ भी हो सकता है, जिसकी वजह से यह दिल्ली में यह दंगा भड़का है. 

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क्या लालू की छवि सुधारने की कोशिश है
एक बड़ा सवाल और उठता है, जिसके घेरे में लालू खुद आ जाते हैं. दरअसल राजद प्रमुख चारा घोटाल में जेल काट रहे हैं. आने वाले महीनों में बिहार चुनाव होने वाले हैं.  ऐसे में यह भी कोशिश होगी कि चारा घोटाले की वजह से जो छवि खराब हो गई है, उसे लोगों के सामने फिर से बनाया जाए. ऐसे माहौल में इस तरह के वीडियो से लोगों की नजर में आसानी से आया जा सकता है. लालू प्रसाद यादव की ओर से ऐसी कोशिश तो की गई है,  परिणाम क्या आता है, वक्त बताएगा.