दाऊद डर गया और समझो मर गया

जो डर गया, समझो मर गया. फिल्म शोले में गब्बर सिंह का ये डायलॉग आतंकी और माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम पर बिल्कुल फिट बैठता है. जो इन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के डर से दुबका बैठा है. केन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद से ही दाऊद की सिट्टी पिट्टी गुम है. खबरें ये भी आ रही हैं कि दाऊद मर चुका है, लेकिन उसके साथी इस बात को छिपा रहे हैं. 

दाऊद डर गया और समझो मर गया
डोभाल के खौफ से खामोश हुआ दाऊद

नई दिल्ली: माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम की जुबां खामोश है. एक वक्त था जब उसकी आवाज मायानगरी मुंबई में दहशत का पर्याय थी. लेकिन केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद स्थितियां बदल गईं. 

अजित डोभाल के खौफ से सहमा दाऊद
मोस्ट वांटेड आतंकी और माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम के पीछे खुफिया एजेन्सी हाथ धोकर पड़ी हैं. इसका श्रेय जाता है अजित डोभाल को. जिन्होंने मोदी सरकार आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद संभाला और इसके बाद से ही दाऊद के दुर्दिन शुरु हो गए.

अजित डोभाल ने दाऊद के आर्थिक साम्राज्य को मिडिल ईस्ट और यूरोप में काफी हद तक बंद करवा दिया है. जिसके बाद दाऊद को भी पता चल गया कि दिल्ली में राष्ट्रवादी सरकार उसे किसी भी कीमत पर ठिकाने लगाने पर तुली हुई है. जिसके बाद दाऊद ने कछुए की तरह हाथ पैर समेटकर खुद को सुरक्षा कवर में कैद कर लिया. 

वो माफिया डॉन जिसकी आवाज से पूरा मुंबई थर्राता था. उसी दाऊद को अब फोन पर भी बात करने से डर लगता है. 

तीन साल से नहीं सुनाई दी आवाज
भारतीय सुरक्षा एजेन्सियां लगातार दाऊद को इंटरसेप्ट कर रही हैं. इस बात का पता दाऊद को भी रहता है. लेकिन पहले के दौर में दाऊद ने कभी इसकी परवाह नहीं की. लेकिन अजित डोभाल की सख्ती के बाद दाऊद जान गया था कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं. यही वजह है कि दाउद और उसका भाई अनीस इब्राहिम सेलफोन का इस्तेमाल करने से बचने लगे. 

दाऊद की आवाज आखिरी बार नवंबर 2016 में इंटरसेप्ट की गई थी. जिसके बाद उसने फोन पर बात करना बंद कर दिया. दिल्ली पुलिस ने दाऊद  के फोन कॉल को इंटरसेप्ट करके 15 मिनट तक उसकी रिकॉर्डिंग की थी. ये नंबर कराची का था, जिसे दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से रिकॉर्ड किया था. 

खत्म हो रहा है दाऊद का आतंकी और माफिया साम्राज्य
मिडिल ईस्ट और यूरोप में अजित डोभाल ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए दाऊद इब्राहिम के आर्थिक साम्राज्य को लगभग नष्ट कर दिया है. सूत्रों के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक खुद को लगे इस झटके के बाद दाऊद इब्राहिम सतर्क हो गया है. वह और उसका भाई अनीस इब्राहिम अब सेलफोन का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं. 

यहां तक कि दाऊद  का करीबी छोटा शकील भी डर गया है. वह अक्सर मुंबई के बड़े उद्योगपतियों को धमकाकर उगाही करता था. लेकिन डोभाल के डर से उसकी भी बोलती बंद है. 

पाकिस्तान में ही दाऊद का अड्डा
दाऊद पर इतना ज्यादा दबाव है कि वह पाकिस्तान से बाहर नहीं निकल रहा है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने खबर दी है कि वह अब भी कराची में ही रहता है. उसके गिरोह के करीबी सदस्य अब भी पाकिस्तान से ही अपनी आपराधिक हरकतों को अंजाम दे रहे है. भारतीय एजेन्सियों के पास पर्याप्त सबूत हैं. जो यह  बताते हैं कि वह पाकिस्तान में ही है. 

दरअसल दाऊद ने पाकिस्तान को अपना सुरक्षित अड्डा बना रखा है. क्योंकि पाकिस्तान की बदनाम आईएसआई और सेना उसे संरक्षण देती है. जिसकी सुरक्षा में दाऊद खुद को महफूज महसूस करता है. 

दाऊद को मिल रही है उसके पापों की सजा 
दाऊद  इब्राहिम के सर पर सैकड़ों मासूम लोगों के खून का इल्जाम है. उसने मुंबई में बम धमाका करवाया था. जिसमें 257 लोगों की मौत हुई थी. 

इतने बेगुनाहों की मौत का बोझ दाऊद अपने सिर पर लेकर भले ही कानून की पहुंच से बाहर हो चुका है.  लेकिन उसके गुनाहों की सजा उसे मिल रही है. वह बुरी तरह बीमार है. साल 2014-15 में खुफिया एजेन्सियों ने दाऊद का जो फौन टैप किया था, उससे  पता चलता है कि वह कई तरह की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो गया है. उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उसे कराची के अस्पताल में कई बार भर्ती कराना पड़ा. उसे दिल की बीमारी के साथ ब्रेन ट्यूमर भी है. 

जिसके बाद आखिरी बार साल 2016 में दाऊद की आवाज टैप की गई. तब से अब तक वह खामोश है. उसे आखिरी बार 17 अप्रैल 2017 को अपने समधी जावेद मियांदाद के घर एक समारोह में देखा गया था. जिसके बाद से उसे किसी ने देखा भी नहीं है. इसलिए ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि दाऊद मर चुका है. लेकिन डी कंपनी को बिखरने से बचाने के लिए उसके साथियों ने उसकी मौत की खबर छिपा रखी है.