क्या रॉबर्ट वाड्रा राजनीति में आने वाले हैं?

कई मौकों पर मीडिया से दूर रहने वाले रॉबर्ट वाड्रा ने मंगलवार को पत्रकारों से बात की. वह अजमेर जाने के लिए जयपुर पहुंचे हुए थे. इस दौरान उन्होंने गांधी परिवार की हटाई गई एसपीजी सुरक्षा पर अपनी टिप्पणी दी. एक राजनीतिक मामले में रॉबर्ट वाड्रा की इस तरह की टिप्पणी एक सवाल पैदा कर रही है. फरवरी 2019 में वाड्रा ने राजनीति में आने के संकेत दिए थे, क्या ऐसा वाकई होने वाला है.

क्या रॉबर्ट वाड्रा राजनीति में आने वाले हैं?

नई दिल्लीः बात इस साल के शुरुआती दौर की है. देश में उस समय लोकसभा चुनाव का माहौल बनने लगा था. सभी सियासतदां अपने-अपने संसदीय इलाकों, शहरों, प्रदेशों में समीकरण फिट करने लगे थे. इन सबके बीच भाजपा अपनी पांच साल पहले वाली मोदी लहर को और तेज बनाने में जुटी थी तो कांग्रेस पिछले आम चुनाव में हुई हार के बाद नेतृत्व के सवाल पर उलझी थी. इसी बीच प्रियंका गांधी यानी कि प्रियंका वाड्रा का नाम सामने आया. उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई. जो हुआ वह सामने है, लेकिन बात बाकी है वाड्रा की, यानी रॉबर्ट वाड्रा की. यानी प्रियंका के पति की. देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने के संबंधी की.

लेकिन रॉबर्ट वाड्रा की बात क्यों?

आपने शीर्षक तो पढ़ ही लिया है. मतलब यह है कि कयास लग रहे हैं रॉबर्ट वाड्रा राजनीति में आने वाले हैं. इसीलिए हम उनकी बात कर रहे हैं. इसके पहले उनकी बारे में जब भी बात हुई तब महज उनकी संपत्तियों, उनके उद्योगों या फिर प्रियंका गांधी के पति के तौर पर हुई है. आज इन सबसे हट कर बात उनकी बात करने की वजह है कि उन्होंने राजनीतिक मामले में अपनी टिप्पणी दी है. वह मंगलवार को जयपुर पहुंचे हुए थे. देश की संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा है और 3 दिसंबर को एसपीजी संशोधन बिल राज्यसभा में पेश किया गया. सदन में हंगामा हुआ. दोनों ओर से बयानबाजी हुई जो कि लाजिमी थी. लेकिन लाजिमी नहीं था रॉबर्ट वाड्रा का बोलना.


 
क्या कह दिया रॉबर्ट वाड्रा ने

वॉड्रा ने जयपुर में पत्रकारों से एसपीजी सुरक्षा को लेकर बात की. उन्होंने उस घटना का भी जिक्र किया जिसे आधार बनाकर गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने का विरोध किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि एसपीजी को हटाया जाना एक बड़ी चूक है. कहा कि एक कार में सवार कुछ लोग बिना सुरक्षा जांच के लोधी एस्टेट स्थित आवास में आ गए. इसके बाद उन्होंने पूरी बातचीत को हैदराबाद और देश भर की महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया. उन्होंने कहा कि इस मामले में गृह मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. वाड्रा जयपुर से अजमेर जाने वाले थे, लेकिन बीच रास्ते मीडिया से इस तरह की बातचीत और राजनीतिक टिप्पणी यह संकेत देती है कि जल्द ही सियासी जमीन पर भी उनके नाम का बैनामा दर्ज हो सकता है.

इसके पहले भी मिल चुके हैं ऐसे संकेत

प्रियंका वाड्रा कांग्रेस महासचिव बनकर सक्रिय राजनीति में उतर चुकी थीं. उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान दी गई थी. इसके बाद फरवरी 2019 में रॉबर्ट वाड्रा ने एक फेसबुक पोस्ट लिखी. इसमें उन्होंने पहले तो ईडी की चल रही पूछताछ का जिक्र किया, फंसाए जाने के आरोप लगाए और फिर ऐसा लिखते हुए उन्होंने राजनीति में आने के संकेत दिए.  उत्तर प्रदेश से अपने खास लगाव का जिक्र करते हुए वाड्रा ने लिखा था कि देश के विभिन्न हिस्सों में महीनों और सालों तक लोगों के बीच काम करने के बाद ऐसा लगता है कि आम जनता के लिए बड़े स्तर पर कुछ करने की जरूरत है. खासतौर पर यूपी में काम करने के बाद ऐसा लगा कि यहां काफी कुछ करना बाकी है. यहां उनकी छोटी सी कोशिश से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. उन्होंने लिखा कि बीते कुछ सालों में सीखे गए अनुभव को यूं ही बेकार होने देना सही नहीं है.