तो क्या ISIS ने रची कमलेश तिवारी के हत्या की साजिश? यहां पढ़ें- पूरा सच

उत्तर प्रदेश में हिंदु महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के पीछे इतने बड़े संगठन का हाथ हो सकता है,इसका अंदाजा किसी को न था. हालांकि कमलेश के बार-बार सुरक्षा की मांग के बावजूद सरकार की कानून व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा कमलेश की जान जाने का कारण तो नहीं बन गया, आइए जानते हैं.  

तो क्या ISIS ने रची कमलेश तिवारी के हत्या की साजिश? यहां पढ़ें- पूरा सच

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नाका इलाके में हिंदु महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ था. इसी बीच इस हत्याकांड मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ जिसके बाद लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई. दरअसल, कमलेश तिवारी की हत्या के पीछे ISIS का हाथ बताया जा रहा है. वीडियो फुटेज में भगवा और लाल कुर्ता पहने हत्या की जगह से फरार हो रहे नकाबपोशों की तस्वीर सामने आने के बाद अब एक बड़ा सबूत हाथ लगा है. इसके साथ ही हत्या का सूरत कनेक्शन क्या है, उस की छानबीन भी शुरू कर दी गई.

क्या है 'मिठाई कनेक्शन'?

दरअसल, हमलावर जिस मिठाई के डिब्बे में हथियार लेकर हत्या करने पहुंचे थे, उसी तरह का एक और मिठाई का डिब्बा गुजरात के सूरत में एक कमरे से बरामद हुआ है. खुफिया सूत्रों की मानें तो ये एक प्री-प्लांड मर्डर है जिसमें ISIS का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, इस बात की पुष्टि अभी होनी बाकी है. कमलेश की हत्या के बाद उनके समर्थकों में खासा रोष पैदा हो गया है. उत्तर प्रदेश सरकार पर लॉ एंड ऑर्डर के नाम पर ये सवाल पूछे जा रहे हैं कि 2017 में एटीएस (एंटी टेरोरिस्ट स्कॉव्ड) के द्वारा दिए गए कमलेश पर आतंकी हमले की आशंका के इनपुट के बाद भी आखिर सुरक्षा को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई.

वीडियो दिखा कर कराई थी कमलेश की पहचान

कमलेश तिवारी के हत्या के मामले में फिलहाल जिन दो शख्स की तस्वीरें सीसीटीवी फुटेज में दिखी है उनकी पहचान नकाब की वजह से नहीं हो पाई है. लेकिन 2017 में गुजरात एटीएस के द्वारा पकड़े गए दो संदिग्धों, उबैद मिर्जा और कासिम ने कमलेश तिवारी का जिक्र किया था. यह भी बताया जा रहा है कि कमलेश तिवारी आतंकी संगठन आईएसआईएस के हिटलिस्ट में काफी दिनों से थे. हिंदु महासभा के पूर्व अध्यक्ष कमलेश तिवारी की वीडियो दिखाकर उन्हें मारने का फरमान जारी किया था. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हत्याकांड को अंजाम दिए जाने के बाद योगी सरकार में कानून और सुरक्षा के मुस्तैदी के ऊपर भी उठने लगे हैं.

तीन साल पहले की थी सुरक्षा की मांग

मिली जानकारी के मुताबिक कमलेश को 2016 से ही जान से मार देने की धमकियां मिल रही थी. उसी साल नवंबर में कमलेश तिवारी ने इसका खुलासा भी किया था कि कुछ मजहबी कट्टरपंथी लोग उनकी हत्या के लिए योजना बना रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने राज्यपाल को चिठ्ठी भी लिखी थी. इसका एक कारण यह भी है कि कमलेश पर मुस्लिम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहिब पर विवादास्पद बयान देने के लिए रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया गया था. हालांकि, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद इसे रफा-दफा कर दिया था.