भारत और इजराइल के बीच रक्षा साझेदारी नई ऊंचाई पर पहुंचने वाली है. रक्षा मंत्रालय (MoD) ने इजराइल के साथ दो अत्याधुनिक हवाई हथियार प्रणालियों को लेकर बात शुरू की है. इसके तहत इन हथियारों का ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) और लोकल प्रोडक्शन की चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक यह बातचीत Air Lora एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) और Ice Breaker एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (ALCM) को लेकर है. दोनों हथियारों को भारत में ही बनाने की योजना है.
भारत में बनेगी इजरायली मिसाइलें
इन मिसाइलों को भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बनाएंगी. दोनों कंपनियां पहले से इजराइल की रक्षा कंपनियों के साथ MoU पर काम कर रही हैं. इस समझौते की शर्तें लगभग तय हो चुकी हैं. 2026 तक इस पर आधिकारिक करार हो सकता है.
Air Lora लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल
Air Lora मिसाइल इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) की जमीन से छोड़ी जाने वाली LORA सिस्टम का हवाई संस्करण है. यह 400 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक वार कर सकती है. इसे Su-30MKI, Rafale और Tejas जैसे भारतीय लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकेगा. इसका वजन करीब 1600 किलो है. इसमें 570 किलो का वारहेड शामिल है. यह सुपरसोनिक स्पीड से उड़ती है. 10 मीटर से कम सर्कुलर एरर के साथ टारगेट को हिट कर सकती है.
इसमें INS/GPS नेविगेशन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर तकनीक है. इसे बेहद सटीक बनाती है. यह जैमिंग-प्रूफ GNSS सिस्टम के साथ आती है. फ्लाइट के दौरान टारगेट बदलने की क्षमता रखती है. BEL ने पहले ही Aero India 2023 में IAI के साथ LORA के लोकल प्रोडक्शन के लिए MoU साइन किया था. अब इसे भारत में पूरी तरह से असेंबल किया जाएगा.
दूसरी मिसाइल है Ice Breaker. इसे इजराइल की Rafael Advanced Defense Systems ने बनाया है. यह एक AI-इनेबल्ड, स्टेल्थ एयर-लॉन्च्ड क्रूज़ मिसाइल है. इसका वजन 400 किलो है. यह 300-500 किलोमीटर तक वार कर सकती है. यह जमीन और समुद्र दोनों पर मौजूद टारगेट्स पर हमला कर सकती है. जैसे एयरबेस, नौसैनिक जहाज या कोस्टल डिफेंस बैटरियां. यह मिसाइल Tejas Mk1A और Su-30MKI जैसे विमानों से छोड़ी जा सकती है. इसमें AI-बेस्ड गाइडेंस सिस्टम, ऑल-वेदर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर और सैटेलाइट डाटा लिंक है. GPS डिनाइड एरिया में भी सटीक वार करने में सक्षम है. जहां GPS सिग्नल नहीं मिलते, वहां भी यह काम करती है.
HAL को इस मिसाइल के लोकल प्रोडक्शन की जिम्मेदारी मिल सकती है. कंपनी ने जुलाई 2025 में IAI के साथ बैठक में Tejas फाइटर जेट पर इसकी इंटीग्रेशन को हरी झंडी दी थी. इसके कैप्टिव-कैरी ट्रायल्स 2027 में और फुल सर्टिफिकेशन 2028 में पूरे हो सकते हैं.
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम
यह साझेदारी ‘Make in India’ को बढ़ावा देगी. भारत की सटीक प्रहार क्षमता (Precision Strike) को भी नई दिशा देगी. BEL और HAL जैसी कंपनियों की भागीदारी से भारत अपने हथियारों का निर्यात भी कर सकेगा. अगर सबकुछ तय शेड्यूल के मुताबिक चला. 2026 तक दोनों मिसाइलें भारत की रक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन जाएंगी.
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