close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

कच्चे सूत जैसा नाजुक हो चुका है भाजपा जदयू का संबंध

बिहार में राजनीति कब करवट बदल ले, ये बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के भी पल्ले नहीं पड़ती. हाल ही में भाजपा-जदयू के बीच की 'तू-तू-मैं-मैं' मुख्य धारा में बनी हुई है, क्या एक बार फिर टूट सकता है, भाजपा से जदयू का नाता?  

कच्चे सूत जैसा नाजुक हो चुका है भाजपा जदयू का संबंध

पटना: देश के सियासत में जब बिहार का जिक्र होता है तो, सियासी हवा अपने ही रंग में आ जाती है. शायद यही वजह है कि ये माना जाता है कि बिहार का बच्चा-बच्चा राजनीति के हर पहलू को बखूबी भाप लेता है. एक बार फिर भाजपा और जदयू का दोस्ताना हाशिए पर आ गया है. बिहार की राजधानी पटना में भारी जल-जमाव से त्रस्त जीवन के बाद ये नोंक-झोंक कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. बाढ़ के बाद जो सियासी हालात पैदा हुए हैं, वो नीतीश सरकार के लिए परेशानी का सबब बन चुका है.

लोकसभा चुनाव के बाद ही दिखने लगी थी दरार 

बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन की गांठ लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद कैबिनेट में मंत्री पद के लिए जदयू के जिद्दी रवैये के बाद से ही कमजोर दिखने लगी. जल-जमाव के कारण नीतीश सरकार के उदासीन व्यवस्था संचालन पर सवाल उठाए जाने लगे. भाजपा सरकार में तो गठबंधन में है, लेकिन नीतीश सरकार की इस नाकामी में ये गठजोड़ मजबूत नहीं दिखती.

गिरिराज-अशोक की तू-तू-मैं-मैं

इस बीच हालात बदलने के आसार भी खूब नजर आने लगे हैं. भाजपा के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गांधी जयंती के मौके पर नीतीश सरकार पर टिप्पणी करते हुए बोला था कि "नशा सत्ता का हो, ज़मीन नजर न आता हो, आंख पर पर्दा हो और लोगों का दर्द सुनाई न दे तो सत्ता हमेशा सजग चौकीदार से ही सवाल पूछती है. मेरे क्षेत्र में होने का प्रमाण बेगूसराय की जनता, राजनीतिक शह से अंधे बिहार सरकार के अधिकारी दे सकते हैं." 
इस बयान के बाद भला जदयू कहां पीछे हटने वाली थी. जदयू की ओर से अशोक चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह सच्चाई है कि लोकसभा के दौरान सबसे ज्यादा चुनावी सभा मुख्यमंत्री ने बेगूसराय में ही की और आज बाढ़ की विभीषिका में गठबंधन की मर्यादा भूल विवादास्पद बयान दे कर मीडिया में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं. इन टीका-टिप्पणियों से एक बात तो सामने निकल कर आई है कि बिहार में 2020 में आगामी विधानसभा चुनाव में इन दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे से ले कर, चेहरों के चुनाव तक दांव फंस सकता है.

अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में भाजपा

दरअसल, भाजपा अब बिहार के मुखिया का चुनाव अपने दल से करने का मूड बना रही है. लंबे समय से बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार को केंद्र में आने का न्यौता भी कई बार इशारों-इशारों में दे दिया गया है. भाजपा बिहार के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह इन तमाम बड़े नामों पर विचार कर रही है. बिहार की राजनीति में लालू यादव की गैर-मौजूदगी में राजद के कमजोर नेतृत्व के बीच यादवों के नेता के रूप में नित्यानंद राय को बिठाने का प्रयास भी किया जा रहा है.

विपक्ष अब भी सदमे में तो नहीं!

बिहार की राजनीति की बात हो और विपक्ष खासकर राजद और कांग्रेस की बात न हो तो सियासी खेल अधूरे ही रह जाएंगे. राजद सुप्रीमो लालू यादव की गैर-मौजूदगी में पार्टी के सर्वेसर्वा उनके सुपुत्र तेजस्वी यादव लोकसभा चुनाव परिणाम की हार के सदमें से शायद बाहर नहीं निकल पाए हैं. ऐसा माना जा रहा था, पर अब तो नए कसीदे गढ़े जाने लगे हैं. दरअसल, तेजस्वी यादव बिहार में होने वाले 5 विधानसभा और 1 लोकसभा सीट पर उम्मीदवारों की योजना बनाने के बजाए हरियाणा में अपने सगे-संबंधियों के चुनाव प्रचार में लगे हैं. इसके अलावा विधानसभा चुनाव को ले कर भी किसी भी रोडमैप की तैयारी के जल्दबाजी में नहीं दिखते. 

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा कुछ तैयारियों में जरूर दिखते हैं पर पार्टी की साख और स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार का सियासी पारा कितना चढ़ता है और इसके परिणाम क्या होंगे.