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बिहार उपचुनाव के बाद बैकफुट पर JDU, बाहुबली उम्मीदवार भी हारे

बिहार उपचुनाव परिणाम के बाद सबसे बड़ा झटका जदयू को लगा है. अब भाजपा के लिए जदयू पर दबाव बनाना आसान हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी की लहर की चर्चाएं भी जोरों पर आने लगी है. ऐसे में क्या होगा एनडीए का रोडमैप पर भी सबकी नजर है.    

बिहार उपचुनाव के बाद बैकफुट पर JDU, बाहुबली उम्मीदवार भी हारे

पटना: बिहार उपचुनाव परिणाम जदयू के लिए बुरी खबर लेकर आया है. आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जदयू की जमीन खिसकने वाली है. बिहार में 5 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव परिणाम में 4 सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाने के बाद भी जदयू सिर्फ 1 सीट ही बचा पाई.  जदयू को सबसे बड़ी हार सीवान के दरौंधा में मिली. जहां जदयू सांसद कविता सिंह के पति और सीवान में बाहुबली की छवि रखने वाले अजय सिंह अपना किला बचा पाने में पूरी तरह फेल हो गए. उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह ने 25000 से भी ज्यादा वोटों से पराजित किया. 

किशनगंज में ओवैसी अव्वल तो भाजपा ट्रैक पर

बिहार में 5 सीटों पर उपचुनाव में से एनडीए की ओर से जदयू ने 4 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा किया था. 1 सीट किशनगंज भाजपा के पाले में गिरी थी जहां से भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह अपने एआईएमआईएम के प्रत्याशी कमरूल होदा से 10000 वोटों से पराजित होती नजर आ रही हैं. असदुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पहली बार किशनगंज विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद भी भाजपा की साख यहां बढ़ती नजर आ रही है. भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह को 35 फीसदी वोट मिले हैं जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र में भाजपा के लिहाज से काफी अच्छा  देखा जा रहा है.   

दरौंधा में उखड़ गए जदयू के पांव

दरअसल, दरौंधा सीट बंटवारे को लेकर भाजपा और जदयू में रार भी देखने को मिली थी. भाजपा यहां से ओमप्रकाश यादव को उतारने का मन बना चुकी थी लेकिन बाहुबली अजय सिंह की जिद की वजह से इस सीट पर भी जदयू का प्रत्याशी मैदान में उतरा. उधर भाजपा ने अजय सिंह को सबक सिखाने के लिए निर्दलीय प्रत्याशी कर्णजीत सिंह को समर्थन देना शुरू कर दिया. और चुनाव परिणाम के शुरूआती रूझानों में ही जदयू को अपनी गलती पर पछतावा करने के अलावा कुछ नजर ही नहीं आ रहा है. 

उपचुनाव परिणाम से रिचार्ज हो गई राजद 

भागलपुर के नाथनगर, बांका के बेलहर के अलावा सिमरी बख्तियारपुर सीट पर भी जदयू ने अपने प्रत्याशी उतारे थे. लेकिन सिर्फ एक सीट नाथनगर पर जदयू प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मंडल राजद प्रत्याशी रबिया खातून से मामूली बढ़त बना पाने में सक्षम हो पाए. लोकसभा चुनाव के बाद से ही कमजोर देखी जा रही महागठबंधन उपचुनाव परिणाम के बाद रिचार्ज हो गई है. राजद 2 सीटों बेलहर और सिमरी बख्तियारपुर को अपने खाते में करने में सफल हुई तो किशनगंज की सीट पर औवैसी की पार्टी के उम्मीदवार कमरूल होदा ने जीत दर्ज की. 

मुख्यमंत्री नीतीश के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी का माहौल

इस सब के बाद सबसे बड़ा नुकसान जदयू को ही होता दिख रहा है. भाजपा के लिए बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू पर दबाव बनाना काफी आसान हो सकता है. बिहार में राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा वैसा भी है जो मानता है कि अब सूबे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ एक एंटी इंकम्बेंसी का माहौल भी खड़ा होता दिखने लगा है. उनके अनुसार भाजपा अगले विधानसभा चुनाव में बड़ी पार्टी बनने की कोशिश में लगी हुई है. फिलहाल कमजोर राजद और मजबूर जदयू को देखकर ऐसा लगता है कि भाजपा को कुछ खास मुश्किलें नहीं होनी चाहिए. 

समस्तीपुर में लोजपा ने फिर की किलेबंदी

वहीं बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के सासंद रामचंद्र पासवान की मृत्यु के बाद सीट खाली हुई थी. इसके बाद लोजपा की ओर से दिवंगत रामचंद्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज इस सीट से कांग्रेस के अशोक सिंह के खिलाफ खड़े थे. प्रिंस राज ने अशोक सिंह को 1 लाख 2 हजार 90 वोटों से पराजित कर बिहार के सबसे कम उम्र के सांसद बने. बिहार उपचुनाव परिणाम ने जदयू को बैकफुट पर ला कर खड़ा कर दिया है. अब इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या तरीका अपनाते हैं पार्टी को मजबूत करने के लिए यह देखना दिलचस्प होगा.