अगले CJI के रूप में जस्टिस बोबड़े का चयन लगभग तय! यहां पढ़ें उनका कानूनी सफर

जस्टिस रंजन गोगोई के कार्यकाल खत्म होने के बाद देश के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े का नाम सुझाया गया है. बोबड़े के अब तक के कानूनी सफर को जानते हैं.

अगले CJI के रूप में जस्टिस बोबड़े का चयन लगभग तय! यहां पढ़ें उनका कानूनी सफर
जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े (File Photo)

नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. रिटायर होने से पहले चीफ जस्टिस का अयोध्या जमीनी विवाद पर दिया जाने वाला फैसला एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है. इसी बीच देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए चीफ जस्टिस गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नंबर के जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े का नाम सुझाया है. मुख्य न्यायाधीश ने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिख जस्टिस बोबड़े को अगला मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव रखा है. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीश का नाम वर्तमान न्यायाधीश के द्वारा रिटायरमेंट के एक महीने पहले प्रस्तावित किए जाने की परंपरा है. 17 नवंबर को रिटायर होने से पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जस्टिस बोबड़े का नाम इसलिए भी सुझाया कि उनके बाद वे सबसे सीनियर जज हैं. जस्टिस बोबड़े मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में 1 साल तक चीफ जस्टिस रह चुके हैं. इसके अलावा 12 वर्ष तक बॉम्बे हाइकोर्ट में जज भी रहे हैं. इस दौरान उन्होंने आधार, पर्यावरण और धर्म से जुड़ी कई मामलों में फैसला सुनाया है. 

माना जा रहा है कि इस सुझाव के बाद जस्टिस बोबड़े 18 नवंबर को CJI नियुक्त किए जा सकते हैं. उनका कार्यकाल 23 अप्रैल 2021 तक होगा.

जस्टिस बोबड़े के बारे में कुछ अहम जानकारियां

जस्टिस बोबड़े का सबसे बड़ा फैसला वैसे तो अयोध्या जमीनी विवाद पर आने वाला है जिसमें 5 बेंच के जज में जस्टिस बोबड़े भी शामिल हैं. जस्टिस बोबड़े सुप्रीम कोर्ट के आधार के अधिकार पर सुनाए गए तीन बेंच के जजों का  हिस्सा रहे हैं. तीन सदस्यों की इस पीठ में जस्टिस बोबड़े के अलावा जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस नागप्पन भी थे. इस ऐतिहासिक फैसले में पीठ ने आधार के बिना किसी भी भारतीय को उसके मौलिक अधिकारों से वंचित न किए जाने का  फैसला सुनाया.

जस्टिस बोबड़े ने 2016 में  दिल्ली-एनसीआर में तीन विद्यार्थियों द्वारा दाखिल किए गए याचिका पर भी फैसला सुनाया था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी. इस बेंच में जस्टिस बोबड़े के अलावा जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस  एके सिकरी भी थे. 

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में उसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन जज नियुक्त किए गए थे जिसमें पीठ जस्टिस एस. ए. बोबडे, एन वी रमन और इंदिरा बनर्जी शामिल थे. 

जस्टिस बोबड़े 2017 में गठित उस दो सदस्यीय बेंच का हिस्सा रहे हैं जिसमें एक महिला ने मेडिकल बोर्ड के प्रस्ताव के आधार पर अपने गर्भ में पल रहे शिशु के एबॉर्शन के लिए अर्जी डाली थी जिसे जस्टिस बोबड़े और जस्टिस एल. नागेश्वर राव के बेंच ने मना कर दिया. 

जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े चीफ जस्टिस गोगोई के बाद देश के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेंगे. उनका कार्यकाल 1 साल 5 महीने तक का रहेगा.