कमलेश तिवारी हत्याकांड में अभी तक की संपूर्ण जानकारी

हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की बर्बर हत्या की परतें धीरे धीरे खुलती जा रही हैं. हत्यारों ने जो कपड़े पहनकर वारदात को अंजाम दिया था, उसे बरामद कर लिया गया है. इसके अलावा दिवंगत तिवारी का परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर चुका है.   

कमलेश तिवारी हत्याकांड में अभी तक की संपूर्ण जानकारी
हत्यारे अब तक गिरफ्त से बाहर

लखनऊ: सूरत से तीन संदिग्ध आरोपियों राशिद, मोहसिन और फैजान की गिरफ्तारी के बाद कमलेश तिवारी हत्याकांड के राज पर से पर्दा उठने लगा है. इन लोगों ने गुजरात से लखनऊ आकर कमलेश तिवारी की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी. 

लखनऊ के होटल से बरामद हुआ सामान
यूपी पुलिस ने लखनऊ के होटल ''खालसा इन'' से संदिग्ध हत्यारों का सामान बरामद कर लिया है. जिसमें वह भगवा कुर्ता भी शामिल है, जिसे पहनकर हत्यारों ने कमलेश तिवारी की हत्या की थी. पुलिस ने होटल मालिक के पास से आरोपियों का पहचान पत्र भी हासिल कर लिया है. इस आईडी पर गुजरात के सूरत का पता दर्ज है. पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपी गुजरात से आकर इसी होटल में रुके थे. जिसके बाद उन्होंने कपड़ा बदला और कमलेश तिवारी की हत्या करने के लिए नाका इलाके के लिए रवाना हो गए. यही नहीं हत्या के बाद संदिग्ध हत्यारे वापस लौटकर होटल में आए कपड़ा बदला और फिर फरार हो गए. हत्यारोपियों के बरामद सामान की पड़ताल फोरेंसिक विभाग कर रहा है. 

हत्यारों के साथ चल रही महिला से पूछताछ
पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में हत्यारों के साथ सड़क पर चल रही महिला भी दिखाई दी थी. इस महिला का नाम शहनाज था. वह मड़ियाव की निवासी है. पुलिस ने उससे भी पूछताछ की है. शहनाज ने बताया कि वह कैंट उपचुनाव के लिए प्रचार कर रही थी. इस दौरान सड़क पर हत्यारोपियों ने उससे खुर्शेदबाग कॉलोनी का रास्ता पूछा था. पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि शहनाज का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन सीसीटीवी फुटेज में हत्यारों के साथ दिखने की वजह से पुलिस ने शहनाज से पूछताछ की थी. 

बेरहमी से हत्या करके मजहबी कट्टरपंथी देना चाहते थे संदेश
कमलेश तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है. जिससे पता चलता है कि उनकी हत्या बड़ी बर्बरता से की गई है. उनके चेहरे पर गोली मारी गई, जो कि शरीर के अंदर ही फंसी रह गई. इसके अलावा उनके शरीर के अलग अलग हिस्सों पर चाकुओं से 15 वार किए गए. जिसमें ठुड्डी, गला, सीने के दाहिनी ओर दो वार, बांयी तरफ सात वार, बाएं कंधे पर, पीठ के बांयी और दांयी तरफ, सीधे कंधे पर वार किए गए. हत्यारे मात्र कमलेश तिवारी की हत्या ही नहीं करना चाहते थे. ऐसा करने के लिए उन्हें गोली मारना ही पर्याप्त था.  दरअसल मजहबी कट्टपंथ में अंधे हो चुके यह हत्यारे कमलेश तिवारी की हत्या से संदेश देना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने इतनी बर्बरता की.

हत्यारे थे हाईटेक 
कमलेश तिवारी के हत्यारे तकनीक की अच्छी जानकारी रखते थे. उन्होंने गूगल के जरिए कमलेश तिवारी के बारे में जानकारी इकट्ठा की. कई वेबसाइटों पर विजिट किया. गूगल मैप से रास्ता तलाश करके लखनऊ के चारबाग स्टेशन से कमलेश तिवारी के घर तक पहुंचे. इसे पता चलता है कि हत्यारे तकनीक की अच्छी जानकारी रखते थे. 

योगी सरकार की लापरवाही पड़ी भारी
कमलेश तिवारी को कई बार धमकी दी गई थी. उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की कई बार मांग की. लेकिन प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी. उनके घर पर 56 साल की उम्र का हेड कांस्टेबल तैनात था. इसके अलावा जो गनर दिया गया था, वह अक्सर देर से ड्यूटी पर आता था. इसके अलावा उनकी सुरक्षा घटा भी दी गई थी. 

अभी तक फरार हैं हत्यारे
कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रखने वाले राशिद, मोहसिन और फैजान तो पुलिस की गिरफ्त में आ गए हैं. लेकिन उनके वास्तविक हत्यारे मोइनुद्दीन और अशफाक अब तक फरार हैं. पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई है. जांच के मुताबिक गुनहगारों की लोकेशन हरदोई से मुरादाबाद होते हुए गाजियाबाद में मिली है. हत्या करने के बाद दोनों आरोपियों अशफाक और मोइनुद्दीन की आखिरी लोकेशन बरेली में दिखी. दोनों हत्यारे बरेली में कुछ देर तक रुके थे. इसके बाद दोनों आरोपी यहां से फरार हो गए. इनकी गिरफ्तारी के लिए यूपी एसटीएफ, एटीएस समेत समेत कई टीमें जुटी हुई हैं.