अब आगे किन मुद्दों को निपटा सकते हैं पीएम मोदी

धारा 370 हटा दी गई, राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनकर तैयार हो गया. अब देश में ऐसे कौन से महत्वपूर्ण काम बचे हुए हैं जिन्हें सत्ता पक्ष बेहद जरुरी समझता है. दशकों पहले से भाजपा और संघ परिवार कुछ खास मुद्दे उठाते रहे है. इसमें से कुछ मुद्दे तो पूरे किए जा चुके हैं, लेकिन कई और मुद्दों पर काम किया जाना अभी बाकी है.  

अब आगे किन मुद्दों को निपटा सकते हैं पीएम मोदी
फाइल फोटो

नई दिल्ली: केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही देश में अलग तरह का माहौल बन गया था. देश में ऐसे कई मुद्दे थे, जिन्हें कोई हाथ नहीं लगाना चाहता था. लोगों को ये कहकर डराया जाता था कि अगर इन मुद्दों को छुआ तो देश में आग लग जाएगी, तबाही मच जाएगी वगैरह वगैरह. इन्हीं मुद्दों में शामिल थे धारा 370, राम मंदिर निर्माण, एनआरसी, पाकिस्तान में घुसकर आतंकी अड्डों की तबाही जैसे मामले. 

लेकिन मोदी सरकार ने अपने लगातार दो कार्यकाल में इन तथाकथित विवादित मुद्दों को ना केवल हाथ में लिया बल्कि सफलतापूर्वक अंजाम तक भी पहुंचाया. लेकिन कहीं एक पत्ता तक नहीं खड़का. जिससे यह साबित हुआ कि इसके पहले जिस तरह इन मुद्दों को लेकर हौवा बनाया जाता था, वह महज दुष्प्रचार था. 

और अब भाजपा के पास कई और ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर भय का माहौल बनाकर रखा गया है. लेकिन जिस तरह नरेन्द्र मोदी सरकार इस तरह के मुद्दों का समाधान कर रही है उसे देखकर लगता है कि इनका भी नंबर जल्दी ही आएगा. 

1. जनसंख्या नियंत्रण
  देश की बढ़ती हुई आबादी की वजह से संसाधनों पर बोझ बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह से आबादी पर नियंत्रण एक जरुरी कदम लगता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल 15 अगस्त को लाल किले से भाषण देते हुए इस समस्या की तरफ संकेत देते हुए कहा था कि "हमारे यहां जो जनसंख्या विस्फोट हो रहा है, ये आने वाली पीढ़ी के लिए अनेक संकट पैदा करता है। लेकिन ये भी मानना होगा कि देश में एक जागरूक वर्ग भी है जो इस बात को अच्छे से समझता है। ये वर्ग इससे होने वाली समस्याओं को समझते हुए अपने परिवार को सीमित रखता है। ये लोग अभिनंदन के पात्र हैं। ये लोग एक तरह से देशभक्ति का ही प्रदर्शन करते हैं।"

यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री ने बढ़ती आबादी की समस्या की तरफ ध्यान दिया है. क्योंकि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 'स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2018' की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2010 से 2019 के बीच दुनिया में जनसंख्या वृद्धि दर औसत 1.1 फीसदी रही. लेकिन भारत की जनसंख्या वृद्धि दर 1.2 फीसदी रही. 

हालात ऐसे ही रहे तो भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा. ऐसे में देश के संसाधनों पर बोझ और प्रदूषण की स्थिति की कल्पना करके मन सिहर जाता है. इस हालात से निपटने के लिए इसी साल जुलाई महीने में जनसंख्या विनियमन विधेयक, 2019 राज्यसभा में पेश किया गया. लेकिन आश्चर्यजनक रुप से विरोधी दलों ने इसे मुसलमान विरोधी बताकर खारिज करने की कोशिश की. 

लेकिन अब वक्त आ गया है कि सरकार धारा 370 की तरह इच्छाशक्ति दिखाते हुए जनसंख्या नियंत्रण के लिए सख्ती से कदम उठाए.

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2. इतिहास का पुनर्लेखन
भारतीय छात्र जिस शिक्षा पद्धति के तहत पढ़ाई करते हैं. उससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं. यह शिक्षा पद्धति छात्रों को भारत के वास्तविक गौरव से काट देती है. वास्तव में इसका दोष जाता है अंग्रेजों के जमाने के शिक्षाविद् लॉर्ड मैकाले पर. जिसने भारतीय छात्रों को उनके प्राचीन गौरवपूर्ण इतिहास के काटने के लिए उनपर नई तरह की शिक्षा पद्धति लाद दी. आजादी मिलने के बाद कांग्रेस ने इतिहास लेखन और स्कूली किताबों का सिलेबस तैयार करने के लिए का जिम्मा वामपंथियों के हाथ में दे दिया. जिन्होंने पूरी स्कूली शिक्षा पद्धति को आयातित विचारों से भर दिया. 

यह विडंबना ही है कि हमारे देश का संविधान तो महान सम्राट अशोक के विचारों के आधार पर तैयार किया गया है. लेकिन शैक्षणिक इतिहास में छात्रों को उनके बारे में बेहद कम पढ़ाया जाता है. सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, समुद्रगुप्त, हर्षवर्द्धन, गौतमिपुत्र शातकर्णि जैसे महान शासकों की बजाए जनता का शोषण करके अपने ऐशो आराम के लिए संपत्ति जमा करने वाले मुगल शासकों की गाथाओं के किताबों को भर दिया गया. 

सनातनी हिंदू शासकों की विजय गाथा के बजाए उनकी हार का इतिहास पढ़ाया जाता है. इस तरह की विडंबनाओं को दूर किए जाने की जरुरत है. 

इसके पहले साल 2000 में बनी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय एनसीआरटी की किताबों में इतिहास के पुनर्लेखन का काम शुरु किया गया था. लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार आने के बाद इसे रोक दिया गया. 
अब जनता को उम्मीद है कि मोदी सरकार देश की नींव को मजबूत करने के लिए भारतीय छात्रों के लिए हमारा वास्तविक इतिहास तैयार कराएगी. 

 
3. पूरे देश में नागरिक रजिस्टर तैयार करना
देश की आबादी वैसे ही बहुत ज्यादा है. उसपर से देश के अलग अलग हिस्सों में बाहर से आए घुसपैठिये देश के संसाधनों पर बोझ बन जाते हैं. पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वारा असम में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नागरिक रजिस्टर तैयार कर लिया गया है. लेकिन अवैध अप्रवासियों की पहचान के बाद भी उन्हें अब तक बाहर नहीं किया जा सका. लेकिन अवैध अप्रवासियों का बोझ देश का हर राज्य उठा रहा है. 

देश की जनता को उम्मीद है कि मोदी सरकार जल्दी ही देश भर में अवैध घुसपैठियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार कराएगी. 

4. अखंड भारत की स्थापना
भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी तो मिली. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हमारा प्यारा देश का बंटवारा करना पड़ा. आज एक जैसी संस्कृति, विरासत और भाषा होने के बावजूद भारतीय उप महाद्वीप तीन हिस्सों में बंटा हुआ है. इस में से एक हिस्सा पाकिस्तान को हमेशा भारत को कमजोर करने की साजिशों में लगा हुआ रहता है. ऐसे में इसका अस्तित्व हमेशा के लिए मिटा देना ही वास्तविक समाधान है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान को तबाह कर दिया जाए. बल्कि उसे भारत में शामिल कर लेना ज्यादा बेहतर होगा. 

पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने पाकिस्तान को जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग किया है और उसके आर्थिक स्रोतों को बंद किया है. उसे देखकर लगता है कि पाकिस्तान की जनता खुद ही अपने शासकों को मजबूर कर देगी कि वह भारत में शामिल हो जाएं. इस तरह अखंड भारत का स्वप्न जल्दी ही पूरा हो सकता है. ये भारत के लिए बेहद जरुरी भी है क्योंकि इससे जहां देश के संसाधनों में वृद्धि होगी, वहीं रक्षा पर होने वाला खर्च विकास के कामों में लगाया जा सकेगा. 

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