नवंबर का आखिरी, अब तक नहीं आई सर्दी... क्या कोई संकट आ रहा है

दिल्ली की पहचान में शामिल रही इसकी सर्दियां कहीं खो गई हैं. बीते तीन-चार सालों से तो प्रदूषण और इस पर होने वाली राजनीति ही इसकी पहचान गई है. शासन-प्रशासन स्तर पर इससे निपटने के कोई प्रयास हो नहीं रहे हैं. लोग भी अपनी जिम्मेदारी समझ नहीं रहे हैं. नवंबर के आखिरी दिन हैं. लेकिन माहौल में सर्दी के निशान बिल्कुल नहीं हैं.

नवंबर का आखिरी, अब तक नहीं आई सर्दी... क्या कोई संकट आ रहा है

नई दिल्लीः अभी से पांच साल पहले तक सुर्खियों में होती थी दिल्ली की सर्दी. अक्टूबर बीता नहीं कि कयास लगने शुरू कि इस बार तो और पड़ेगी सर्दी, रिकॉ़र्ड टूटेगा. फिर बात इंतजाम पर जाकर खत्म होती थी. पिछले दो तीन सालों से यह सिलसिला खत्म सा हो गया है. आज दिल्ली तो है पर उसकी सर्दियां नहीं रह गईं हैं. रह गया है तो प्रदूषण और बाकी रह गई है गर्मी, जो जाते हुए नवंबर से भी चिपकी हुई है. कई बार जब किसी वजह से तारीख याद करने की कोशिश होती है तो आश्चर्य से खुद पर एक नजर जरूर चली जाती है. अरे! नवंबर है और मैंने स्वेटर-जैकेट नहीं पहना... यह हालात हैं अब.

यह हालात क्यों
दुनिया भर में मौसम तेजी से बदल रहा है. कभी बेमौसम भारी बरसात, कभी चक्रवात, तो कभी जानलेवा गर्मी और सिमटती सर्दी विशेषज्ञों के लिए यह शोध के नए विषय बन गए हैं. जलवायु परिवर्तन एक ऐसा बड़ा मुद्दा है जो हर देश की चिंता बना हुआ है और हर देश में नीतियां बनाने वाले इस पर विचार कर रहे हैं. आज-कल के आलम यह हैं कि गर्मी का मौसम ज्यादा समय तक चल रहा है. लोग बिना स्वेटर के बाहर घूमते दिख रहे हैं. यही नहीं घर के भीतर भी सोते समय पंखा चलाना पड़ता है. प्रदूषण की मार लोगों पर अलग ही पड़ रही है. कभी-कभी मौसम का इस तरह बदल जाना वाकई परेशान करने वाला है.

क्या है इस बदलाव की वजह
भारत में मौसम और पर्यावरण से जुड़ी जानकारियां इकट्ठी करने वाली एक वेबसाइट है, स्काईमेट. इससे जुड़े अधिकारी ने बताया कि पिछले साल भी सर्दी देरी से ही आई थी, इस बार उम्मीद थी कि थोड़ा पहले सर्दी आ जाएगी. नवंबर के पहले हफ्ते में पश्चिमी विक्षोभ बने थे जिस कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में बर्फबारी हुई थी. इस महीने में चौथा पश्चिमी विक्षोभ जारी है. जब पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ जाता है तो उत्तर दिशा से बर्फीली हवाएं चलती हैं, उसके कारण दिल्ली-एनसीआर में तापमान गिरना शुरू हो जाता है. स्काइमेट के मुताबिक इस बार एक के बाद एक लगातार हल्के पश्चिमी विक्षोभ आ रहे हैं, हालांकि सक्रिय रूप से चार ही पश्चिमी विक्षोभ थे जिसकी वजह से पहाड़ों पर अच्छी बर्फबारी हुई. स्काइमेट के पलावत कहते हैं, "पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिमी दिशा से चलने वाली बर्फीली हवाओं की दिशा बदल जाती है. यही वजह है कि तापमान गिर नहीं पा रहे हैं.

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नहीं चल रही है साफ हवा
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर भी उत्तर-पश्चिमी दिशा से आने वाली हवाओं के कारण घटेगा. ऐसे में दमघोंटू हवा से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. स्वच्छ हवा के चलने से वायु की गुणवत्ता भी सुधरेगी. दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर या तो खराब या कुछ हद तक सामान्य रहा.

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ जब आगे बढ़ेगा तो फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और इस महीने की 28, 29 और 30 तारीख के बीच 5-6 डिग्री तापमान गिर सकता है.

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जलवायु परिवर्तन की चिंता दुनिया भर में है, मगर क्यों
इसी महीने के शुरुआती हफ्तों में आसियान सम्मेन हुए थे. इसमें संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने जलवायु परिवर्तन की ओर ध्यान दिलाया था. उन्होंने एक गंभीर रिपोर्ट के आंकड़े सामने रखे और कहा कि समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. इस समस्या से निपटने के लिए जल्द ही कदम उठाने होंगे. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर लगाम लगाने की दिशा में सही कोशिश नहीं की गई तो 2050 तक दुनियाभर में 30 करोड़ लोग समुद्र में बह जाएंगे.

उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश, चीन और जापान पर समुद्र का जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक जोखिम है. आज दुनिया में जीवन की निरंतरता यानी वर्तमान अवस्था में खुद को बनाए रखने की क्षमता के आगे सबसे बड़ा जोखिम जलवायु परिवर्तन है. मौसम के निर्धारित दिनों में हो रहा बदलाव कहीं जलवायु परिवर्तन के बड़े संकट की ओर इशारा तो नहीं है? 

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