India Hybrid STOL plane: भारत में, पिछले कुछ दशकों में हवाई यात्रा में तेजी से बढोतरी हुई है. जिसके पीछे की वजह किफायती विमानों व रेट की उपलब्धता मानी जाती है. इसी कड़ी में भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप LAT एयरोस्पेस ने देश के पहले हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक STOL यानी शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग विमान के स्केल मॉडल को लॉन्च किया है. इस विमान को कम और बिना तैयारी वाले रनवे से भी उड़ान भरने और उतरने के लिए डिजाइन किया गया है. यह पहल भारत के छोटे शहरों और कस्बों को बड़े शहरों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे हवाई सफर को बसों जितना ही आसान और सुलभ बनाने का रास्ता खुल गया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, LAT एयरोस्पेस की स्थापना जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल और पूर्व सीओओ सुरोभी दास ने की है, जहां गोयल ने इस इंडस्ट्री में $20 मिलियन का निवेश किया है. इस स्टार्टअप का लक्ष्य एक ऐसी हवाई यात्रा क्रांति लाना है जो पारंपरिक हवाई अड्डों की भीड़ और लंबी प्रक्रिया से मुक्त हो. उनका 8-सीटर हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक विमान कम रनवे से ही उड़ान भरने की क्षमता रखता है, जिससे इसे भारत के 450 से अधिक अप्रयुक्त हवाई पट्टियों यानी जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है. उससे भी संचालित किया जा सकेगा.
छोटी उड़ानों का बड़ा समाधान
LAT एयरोस्पेस का STOL विमान का डिजाइन भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वहीं, यह विमान बहुत कम दूरी के रनवे से भी टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है. यह सुविधा बड़े हवाई अड्डों पर निर्भरता को खत्म करती है और बस स्टॉप की तरह ही छोटे एयर-स्टॉप से संचालन संभव बनाती है.
हाइब्रिड इंजन का इस्तेमाल
इस विमान में बिजली और पारंपरिक ईंधन (Gas Turbine Engine) दोनों का मिश्रण होगा. यह हाइब्रिड तकनीक उड़ान को अधिक टिकाऊ बनाती है और भविष्य के शून्य-उत्सर्जन लक्ष्यों को भी पूरा करती है. चूंकि इसे बड़े शहरों के भीतरी इलाकों में या छोटे शहरों के पास तैनात किया जा सकता है, इसलिए यह डोर-टू-डोर यात्रा के समय को बहुत कम कर देगा, जिससे क्षेत्रीय यात्रा बहुत तेज हो जाएगी.
आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की तैयारी
LAT एयरोस्पेस का यह प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देता है. कंपनी गुरुग्राम में 50,000 वर्ग फुट का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हब स्थापित कर रही है, जहां इन-हाउस लैब में विमान के जरूरी कंपोनेंट जैसे पॉवरट्रेन और हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक सिस्टम पर काम होगा.
वहीं, कंपनी की इंजीनियरिंग टीम विमान का वज़न कम करने, हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक सिस्टम को बेहतर बनाने और भारत की भौगोलिक ज़रूरतों के लिए एयरोडायनेमिक्स को ऑप्टिमाइज करने पर ध्यान दे रही है. कुल मिलाकर, इस विमान का मॉडल भारत की क्षेत्रीय हवाई यात्रा के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण है, जहां उड़ना सिर्फ मेट्रो शहरों का ही विशेषाधिकार नहीं रहेगा.
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