आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 को लोकसभा से मिली मंजूरी

लोकसभा ने अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके बाद इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा, यह विधेयक संबंधित अनिवार्य रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021 का स्थान लेगा.  आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि आखिर ये विधेयक क्या है?

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Aug 3, 2021, 04:40 PM IST
  • अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक 2021 लोकसभा से मंजूरी
  • जानिए क्या है आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021?
आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021 को लोकसभा से मिली मंजूरी

नई दिल्ली: लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच मंगलवार को ‘अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक, 2021’ को मंजूरी दे दी. जिसमें राष्ट्र की सुरक्षा एवं जन-जीवन और सम्पत्ति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से अनिवार्य रक्षा सेवाएं बनाये रखने का उपबंध किया गया है.

अनिवार्य रक्षा सेवा अध्यादेश को मंजूरी!

यह विधेयक संबंधित ‘अनिवार्य रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021’ की जगह लेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाया गया है. इसका मकसद यह है कि हथियारों एवं गोला-बारूद की आपूर्ति में बाधा नहीं आए.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में आयुध कारखानों के नियोक्ताओं एवं मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों से अच्छी चर्चा की गई है. इसमें कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखा गया है, इस विधेयक को आम-सहमति से पारित किया जाना चाहिए.

इससे पहले विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि देश की उत्तरी सीमा पर जो स्थिति है उससे पूरा सदन अवगत है. इसलिए हमारी सेना को आयुध की निर्बाध आपूर्ति होनी चाहिए.

क्या है आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक 2021?

आंदोलन और हड़ताल किये जाने पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए जारी किए गए ‘आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021’ में क्या कुछ अहम है? अधिसूचना में ये बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति, जो अध्यादेश के तहत अवैध हड़ताल का आयोजन करता है अथवा इसमें हिस्सा लेता है, उसे एक साल जेल या 10,000 रुपए तक जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है.

इस विधेयक में कहा गया है कि रक्षा उपकरणों के उत्पादन, सेवाओं और सेना से जुड़े किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के संचालन या रखरखाव के साथ-साथ रक्षा उत्पादों की मरम्मत और रखरखाव में कार्यरत कर्मचारी अध्यादेश के दायरे में आएंगे.

साथ ही विधेयक में ये भी कहा गया है कि इसके तहत दूसरे लोगों को आंदोलन या हड़ताल में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना भी एक दंडनीय अपराध होगा. बीते दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग 200 वर्ष पुराने आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण की योजना को मंजूरी दी थी.

इसके लिए कोई कानून नहीं था- राजनाथ

राजनाथ सिंह ने बताया कि पहले का कानून 1990 में खत्म हो चुका है. आवश्यक रक्षा आयुध सेवाओं के लिए कोई कानून नहीं था. उस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा था, इसलिए मंत्रिमंडल ने 30 जून को अध्यादेश को मंजूरी दी. भट्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी कर्मचारी और अधिकारी के हितों को प्रभावित करने वाला कोई प्रावधान विधेयक में नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘हमारे मित्रों (सदस्यों) ने जो आपत्तियां दी हैं वे निराधार हैं. कहीं भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं होता है. कर्मचारियों को मिलने वाली सुख-सुविधा में कोई कटौती नहीं होती है.’ रक्ष राज्य मंत्री ने सदस्यों से अपील की, ‘सभी लोग मिलकर इस विधेयक को पारित करें क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है.’

विपक्ष ने विधेयक का किया विरोध

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन के प्रेमचंद्रन ने ‘अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक, 2021’ को पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसमें कर्मचारियों की हड़ताल रोकने का प्रावधान है जो संविधान में मिला मौलिक अधिकार है.

एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि यह विधेयक कामगार वर्ग के लोकतांत्रिक अधिकारों को समाप्त करने वाला है और सदन में व्यवस्था नहीं होने पर इस विधेयक को पेश नहीं कराया जाना चाहिए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार आयुध कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना चाहती है.

उन्होंने कहा, ‘सदन नहीं चल रहा है तो इस तरह का विधेयक पारित नहीं होना चाहिए. हम चाहते हैं कि पेगासस मामले पर चर्चा हो और फिर सभी मुद्दों पर चर्चा हो.’ तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने भी विधेयक का विरोध किया.

निचले सदन ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ही ‘अनिवार्य रक्षा सेवा विधेयक, 2021’ को मंजूरी दे दी. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि देश की रक्षा तैयारियों के लिये सशस्त्र बलों को आयुध मदों की निर्बाध आपूर्ति बनाये रखना और आयुध कारखानों का बिना किसी व्यवधान के कार्य जारी रखना अनिवार्य है.

रक्षा से संबद्ध सभी संस्थानों में अनिवार्य रक्षा सेवाओं के अनुरक्षण को सुनिश्चित करने के लिये लोकहित में या भारत की सम्प्रभुता और अखंडता या किसी राज्य की सुरक्षा या शिष्टता या नैतिकता के हित में सरकार के पास शक्तियां होनी चाहिए. इसमें कहा गया है कि चूंकि संसद सत्र नहीं चल रहा था और तुरंत विधान बनाने की जरूरत थी, ऐसे में राष्ट्रपति ने 30 जून, 2021 को ‘अनिवार्य रक्षा सेवा अध्यादेश, 2021’ प्रख्यापित किया था.

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