भाजपा के सत्ता से दूर होते ही फिर बागी होने लगे एकनाथ खड्से

महाराष्ट्र में भाजपा के सत्ता  से दूर होने के बाद पूर्वमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोलने वालों की संख्या  बढ़ गई है. इसमें पंकजा मुंडे के अलावा एकनाथ खड्से भी शामिल  हैं. वह पहले भी फडणवीस के खिलाफ बगावत कर चुके है।  

भाजपा के सत्ता से दूर होते ही फिर बागी होने लगे एकनाथ खड्से

मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों पारा परवान पर है. कभी सरकार बनाने के लिए हाई वोल्टेज ड्रामा चलता है, तो कभी सरकार बनने और इस्तीफा का खेल शुरू हो जाता है. इसी क्रम में अब भाजपा के अपने नेताओं ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

खडसे को क्या हो ग़या?
हाल ही में पंकजा मुंडे ने अपने हार को लेकर बगावती तेवर अपनाया लिया है, जिसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता एकनाथ खडसे की भी नाराजगी खुल कर सामने आई है. ये नाराजगी किसी और से नहीं बल्कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए देखी जा रही है. खडसे ने इशारे इशारे में ही पूर्व सीएम पर हमला बोल दिया.

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दरअसल, महाराष्ट्र के भाजपा नेता एकनाथ खडसे और पंकजा मुंडे की बुधवार मुलाकात हुई. मुंबई में पंकजा मुंडे के बंगले रॉयलस्टोन पर दोनो नेताओं की मुलाकात हुई . इस बैठक बाद एकनाथ खडसे का एक बयान आया. जिसमें वो मुंडे की हार का जिम्मेदार पार्टी के नेतृत्व को ठहराने लगे.

और फडणवीस पर कर दिया प्रहार!
इस दौरान उन्होंने कहा कि 'पंकजा मुंडे और मेरी बेटी रोहणी की विधानसभा चुनाव में हार हुई. इस बारे में चर्चा हुई, पार्टी विरोधी काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. ऐसे काम करने वालों के नाम मैंने बीजेपी प्रदेश कमिटी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील के पास भेजे है. पार्टी में बेचैनी है, दोनों सीटे पर हराने के लिए काम किया गया.' खडसे ने पार्टी के खिलाफ कुछ बोलने से बचते बचते ये भी बोला कि पार्टी दोषी नहीं है, नेतृत्व दोषी है. उन्हें हार की जिम्मेवारी लेनी चाहिए.

इशारों-इशारों में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साध दिया. जब एकनाथ खडसे को मीडिया ने ये पूछा कि क्या आप फडणवीस का नाम ले रहे है, तो उन्होंने कहा कि आप होशियार हो.

बार-बार बौरा जाते हैं खडसे
ये पहली बार नहीं है, जब जनाब एकनाथ जी पार्टी लाइन से हटकर बातें कर रहे हैं. इससे पहले लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने खुले तौर पर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. इतना ही नहीं जब अपने बगावती तेवर से उनको ये आभास हो गया था कि उन्हें टिकट नहीं मिलने वाला है, तो उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन तक दाखिल कर दिया था. लेकिन भाजपा ने उस वक्त लगाम कसने के लिए उनकी ही बेटी को उस सीट से टिकट दे दिया था.

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