Indian river crossing Tropic of Cancer: भारत में एक ऐसी रहस्यमयी नदी है, यह नदी अपने रास्ते में कई रहस्य और मोड़ छुपाए हुए बहती है. कभी उत्तर की ओर, कभी दक्षिण-पश्चिम की ओर, और आखिर में समुद्र से मिलती है. आइए आज हम आपको बताएंगे कौनसी नदी ट्रोपिक ऑफ कैंसर को दो बार काटती है.
ट्रोपिक ऑफ कैंसर को दो बार काटती है
माही नदी भारत की वह अनोखी नदी है जो ट्रोपिक ऑफ कैंसर को दो बार काटती है. यह नदी मध्य प्रदेश से निकलती है और फिर राजस्थान व गुजरात के रास्तों से बहती हुई दूसरी बार ट्रोपिक ऑफ कैंसर को पार करती है. आखरी में यह खंभात की खाड़ी में जाकर अरब सागर में मिल जाती है.
माही नदी का सफर
माही नदी मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं से निकलती है. यह धुंधेली पहाड़ियों से शुरू होकर करीब 580 किलोमीटर का लंबा सफर तय करती है. सबसे पहले यह मध्य प्रदेश से गुजरती हुई राजस्थान के वागड़ इलाके में प्रवेश करती है. यहां से यह दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़कर गुजरात पहुंचती है. आखरी में, यह गुजरात के खंभात की खाड़ी में अरब सागर में मिल जाती है. यह भारत की उन कुछ नदियों में से एक है जो पश्चिम की ओर बहती हैं, जैसे नर्मदा और तापी. माही नदी को महिसागर भी कहा जाता है.
दो बार पार करने की खासियत
ट्रॉपिक ऑफ कैंसर, यानी कर्क रेखा, उत्तरी गोलार्ध में कर्क राशि के ठीक ऊपर 23.5 डिग्री उत्तर अक्षांश पर स्थित है. यह भारत के कई हिस्सों से होकर गुजरती है. लेकिन माही नदी ही एकमात्र नदी है जो इसे दो बार काटती है. पहली बार मध्य प्रदेश में, जब यह पहाड़ों से उतर रही होती है. दूसरी बार गुजरात में, जब यह समुद्र की ओर बह रही होती है.
नदी का महत्व और चुनौतियां
माही नदी के किनारे कई मंदिर और तीर्थस्थल हैं. गुजरात का नया महिसागर जिला इसी नदी के नाम पर बना है. लोग इसे पूजते हैं और मानते हैं कि यह समृद्धि लाती है. लेकिन आजकल प्रदूषण और खारे पानी की समस्या से यह खतरे में है. वडोदरा शहर के बांधों से मछुआरों को नुकसान हो रहा है.
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