• कोरोना वायरस पर नवीनतम जानकारी: भारत में संक्रमण के सक्रिय मामले- 3,19,840 और अबतक कुल केस- 9,36,181: स्त्रोत PIB
  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 5,92,032 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 24,309 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 63.02% से बेहतर होकर 63.23% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 20,572 मरीज ठीक हुए
  • दुनिया भर के अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रति दस लाख की जनसंख्या पर सबसे कम मामले और सबसे कम मौतें हुई हैं
  • कोरोना के कुल मामलों में 86% मामले दस राज्यों से हैं
  • देश में 2 स्वदेशी टीकों को इस महीने मानव परीक्षण का प्रारंभिक चरण शुरू करने की मंजूरी मिली
  • WHO द्वारा दिए गए व्यापक परीक्षण मार्गदर्शन के अनुसार 22 राज्य प्रति दिन कोविड-19 के 140 सैंपल प्रति 10 लाख टेस्टिंग कर रहे हैं
  • IIT दिल्ली द्वारा विकसित दुनिया की सबसे किफायती प्रोब फ्री RT-PCR आधारित कोविड-19 डायग्नोस्टिक किट आज लॉन्च की जाएगी
  • वंदे भारत मिशन: 650K से अधिक भारतीय स्वदेश लौटे और 80K से अधिक विदेश की यात्रा पर गए
  • कोविड मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे पहला 'पोस्ट कोविड कोच' चलाने के लिए तैयार है

कोरोना के इलाज की 'संजीवनी' पर उठ रहे सवाल

पूरे विश्व में कोरोना वायरस के प्रकोप का सामना करने के लिए और इसको समाप्त करने के लिए वैक्सीन पर काम चल रहा है लेकिन अब इसके इलाज में प्रयोग की जा रही दवाई हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन पर कुछ देश सवाल खड़े कर रहे हैं.

कोरोना के इलाज की 'संजीवनी' पर उठ रहे सवाल

नई दिल्ली:  कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व में 58 लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. जब कोरोना का संक्रमण पूरी दुनिया में फैल रहा था तब अमेरिका समेत  कई देशों ने भारत से हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन की मांग की थी और इसका प्रयोग मरीजों पर करने से सकारात्मक प्रभाव भी दिखा था.

56 से अधिक देश अपने यहां संक्रमितों पर इस दवाई का इस्तेमाल करते थे. अमेरिका और सल्वाडोर के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे भी इस दवाई का प्रयोग करते हैं. अब कुछ यूरोपीय देशों ने इस दवाई पर सवाल खड़े किए हैं.

इन देशों ने जाहिर की नाराजगी

आपको बता दें कि कोविड 19 अहम मानी जाने वाली एंटी मलेरियल ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर संदेह कायम है. इसी कड़ी में यूरोपीय संघ के देश- फ्रांस, इटली और बेल्जियम ने COVID-19 उपचार के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल करने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.

गंभीर रूप से संक्रमितों पर न करे इस्तेमाल

उल्लेखनीय है कि पेरिस में उस आदेश को रद्द कर दिया गया जिसमें गंभीर रूप से बीमार कोरोना वायरस रोगियों के इलाज के लिए डॉक्टरों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा का उपयोग करने की इजाजत दी गई थी. इटली और बेल्जियम के अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों से क्लीनिकल ट्रायल को छोड़कर इस दवा के उपयोग पर बैन लगाने के लिए कहा.

WHO ने कहा है कि यह दवा, जिसे गंभीर रूप से बीमार कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किया जा रहा है, इसको लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं.

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WHO रद्द कर चुका है वैश्विक ट्रायल

आपको बता दें कि . कुछ दिनों पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने  सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के वैश्विक ट्रायल को रद्द कर दिया था. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी इसका पालन किया और इसे शुरू करने के एक सप्ताह के अंदर ही ग्लोबल ट्रायल को रोक दिया गया.

ICMR दवाई के पक्ष में

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) इस दवाई के पक्ष में खड़ा है. ICMR की तरफ से कहा गया है कि भारत में हुए अध्ययनों में मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन  का कोई प्रमुख दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है और इसका प्रयोग कोरोना के प्रारंभिक इलाज में सख्त चिकित्सा पर्यवेक्षण में जारी रखा जा सकता है. 

ICMR का यह बयान ऐसे समय आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कोविड-19 के संभावित इलाज के लिए चल रहे एक वैश्विक औषधि परीक्षण से, सुरक्षा संबंधी चिंता के मद्देनजर वह अस्थायी रूप से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को हटाएगा.