यूपी में ब्राह्मण वोटों की 'माया'! बीएसपी ने पहले अयोध्या, अब वृंदावन में डाला डेरा

क्या तिलक के सहारे पार होगी मायावती की चुनावी नैया? यहां पर हमारा तिलक से मतलब ब्राह्मण वोटों से है. जिसे पाने के लिए अयोध्या के बाद अब वृंदावन में बीएसपी ने ब्राह्मण सम्मेलन कराया है और इस ब्राह्मण सम्मेलन पर विरोधी दल तंज कस रहे हैं.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 31, 2021, 09:35 PM IST
  • 'तिलक' के सहारे 'माया' की नैया होगी पार?
  • ब्राह्मण सम्मेलन से बीएसपी को मिलेगी सत्ता?
यूपी में ब्राह्मण वोटों की 'माया'! बीएसपी ने पहले अयोध्या, अब वृंदावन में डाला डेरा

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनाव में मायावती और उनकी पार्टी बीएसपी ने नया दांव फेंका है. जिसके जरिए ब्राह्मण वोट को अपनी ओर खींचने की लगातार कोशिशें हो रही हैं. इस बीच यूपी के वृंदावन में बीएसपी के कार्यकर्ता और नेता जुटे हैं. बीएसपी ने अयोध्या के बाद अब एक और धार्मिक नगरी वृंदावन में डेरा जमाया है. यहां भी ब्राह्मण सम्मेलन कराकर योगी सरकार को निशाने पर लिया है.

ब्राह्मण की आड़ में योगी पर प्रहार

बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने मथुरा में कहा कि 'ब्राह्मणों का उत्पीड़न बसपा सहन नहीं करेगी. ब्राह्मणों का मान सम्मान जो छीन लिया गया है, उसे वापस दिलाने के लिए बसपा हर संभव प्रयन्त करेगी.'

23 जुलाई से शुरू हुए बीएसपी के ब्राह्मण सम्मेलन की अगुआई पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र कर रहे हैं. उन्होंने वृंदावन पहुंचकर सबसे पहले बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन किए. सतीश चंद्र मिश्र ने दो दिन पहले ZEE Media से एक्सक्लूसिव बातचीत में भी योगी सरकार पर ठीक इसी तरह ब्राह्मणों के उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.

उन्होंने कहा था कि 'योगीराज में ब्राह्मणों पर अत्याचार हुए हैं, प्रदेश में बसपा सरकार बनी तो ब्राहमणों को मान सम्मान मिलेगा.' बीएसपी खुद को ब्राह्मणों की सबसे बड़ी हितैषी पार्टी होने का दावा कर रही है, लेकिन बीजेपी से लेकर समाजवादी पार्टी तक हर दल मायावती के इस दांव को 13 प्रतिशत ब्राह्मण वोट पाने की चुनावी चाल बता रहे हैं.

BJP का आरोप- 'बीएसपी कर रही दिखावा'

बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा था कि यूपी में अपराधियों के विरुद्ध जो कार्यवाही चल रही है उससे दोनों दल व्यथित हैं. रही बात श्री राम और कृष्ण को लेकर तो सभी को पता है कि सपा और बसपा के विचार हिंदू देवताओं और सनातन धर्म के लिए क्या आ रहे हैं यह किसी से छुपा नहीं है.

वहीं समाजवादी पार्टी प्रवक्ता सुनील साजन ने भी ब्राह्मण सम्मेलन को ड्रामा करार दिया है. उन्होंने कहा कि 'योगी जी के साढ़े 4 साल के इतिहास में उन्होंने कोशिश की है कि पिछड़ों और दलितों को कितना परेशान किया जाए इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण पर भी योगी जी ने अत्याचार किए तब बहुजन समाज पार्टी चुप थी तब केवल समाजवादी पार्टी ने ही आवाज उठाई थी.'

ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए बीएसपी 2022 में 2007 का इतिहास दोहराने का सपना देख रही है. तिलक तराजू और तलवार का नारा देने वाली बीएसपी ने 2007 में यू टर्न मारते हुए सर्वजन हिताय का नारा दिया था. तब बीएसपी के टिकट पर 41 ब्राह्मण कैंडिडेट चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे और यूपी में पहली बार मायावती की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी.

सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को भुलाया

लेकिन इसके बाद मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को भुला दिया और फिर से दलित हित की बातें करने लगीं. बीएसपी को इसका नुकसान आगे हुए विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ा. 2012 में अधिकतर ब्राह्मण मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ चले गए.

समाजवादी पार्टी के टिकट पर 21 ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव जीते, अखिलेश यादव की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. 2017 के चुनाव में ब्राह्मणों ने अपना आशीर्वाद बीजेपी को दिया. बीजेपी को ब्राह्मणों के 80 प्रतिशत वोट मिले. बीजेपी के टिकट पर 46 ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव जीते और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से यूपी में बीजेपी की सरकार बनी. तब से ब्राह्मण मतदाता बीजेपी के साथ हैं. और मायावती इसीलिए 2022 में बीजेपी के ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती हैं. 2022 में तिलक के सहारे सियासी नैया पार करने की कोशिश में हैं.

Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.

ज़्यादा कहानियां

ट्रेंडिंग न्यूज़