प्रदूषण से निपटने के लिए बुलाई बैठक, 30 में से पहुंचे केवल 5 सदस्य

पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमिटी फॉर अर्बन डिवेलपमेंट की मीटिंग बुलाई गई थी, लेकिन सीनियर अधिकारियों के न आने की वजह से मीटिंग कुछ ही मिनटों में खत्म कर दी गई. यह स्टैंडिंग कमिटी की पहली मीटिंग थी. कमिटी में कुल 30 सदस्य हैं, इसमें से सिर्फ 5 ही पहुंचे थे.

प्रदूषण से निपटने के लिए बुलाई बैठक, 30 में से पहुंचे केवल 5 सदस्य

नई दिल्लीः प्रदूषण को लेकर स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है और इसी के साथ इससे निपटने की इच्छाशक्ति का ग्राफ भी नीचे ही गिर रहा है. यह आलम तब नजर आया जब इसके लिए बुलाई गई मीटिंग में अधिकारी पहुंचे ही नहीं और यह चंद मिनटों में खत्म कर दी गई. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए क्या किया जा रहा है इसे लेकर शुक्रवार को पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमिटी फॉर अर्बन डिवेलपमेंट की मीटिंग बुलाई गई थी, लेकिन सीनियर अधिकारियों के न आने की वजह से मीटिंग कुछ ही मिनटों में खत्म कर दी गई. यह स्टैंडिंग कमिटी की पहली मीटिंग थी. कमिटी में कुल 30 सदस्य हैं, इसमें से सिर्फ 5 ही पहुंचे थे.

दिल्ली में बढ़ते पलूशन को लेकर क्या कदम उठाए गए गए है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे यह जानकारी लेने के लिए मीटिंग में डीडीए के वाइस चेयरमैन, एनडीएमसी के वाइस चेयरमैन, एमसीडी के तीनों कमिश्नर, पर्यावरण मंत्रालय के सेक्रेटरी और शहरी विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी को बुलाया गया था.

लेकिन मीटिंग में कोई सीनियर अधिकारी नहीं पहुंचा. मीटिंग में सदस्यों के न पहुंचने की बात पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तक भी पहुंची है. उन्होंने कहा कि वह इसकी खुद जानकारी लेंगे कि अधिकारी मीटिंग में क्यों नहीं गए. उन्होंने कहा कि वह प्रदूषण को लेकर बहुत गंभीर हैं. इसे कम करने के लिए साझा प्रयास जरूरी हैं. 

पर्यावरण में ढुलमुल रुख रखने वाले ट्रंप, भारत पर गंदगी बहाने का आरोप लगा रहे हैं

अगली मीटिंग 20 नवंबर को
दिल्ली के तीनों एमसीडी कमिश्नर मीटिंग में नहीं थे. एनडीएमसी के सीनियर अधिकारी के न आने की वजह से उनका प्रेजेंटेशन भी नहीं देखा गया, उन्हें ये प्रजेंटेशन देना था कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्रालय के सेक्रेटरी को भी बुलाया गया था पर वह भी नहीं आए, पर्यावरण मंत्रालय से कोई सीनियर अधिकारी भी नहीं आया, बस उप सचिव को भेज दिया गया. सूत्रों के मुताबिक कमिटी चेयरमैन जगदंबिका पाल ने इसे लेकर नाराजगी जताई है व कहा है कि इस तरह का लापरवाह रवैया ठीक नहीं है.

जिन अधिकारियों को बुलाया गया था उन्हें इसे गंभीरता से लेना चाहिए और अब अगली मीटिंग में इस पर चर्चा होगी. सूत्रों के मुताबिक अगली मीटिंग 20 नवंबर को हो सकती है. जानकारी के मुताबिक अधिकारियों के न आने से नाराज चेयरमैन लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखेंगे और अधिकारियों की लापरवाही की जानकारी देंगे. केंद्र सरकार की अर्बन डिवेलपमेंट मिनिस्ट्री ने प्रदूषण से निपटने के लिए सभी राज्यों को 1192 करोड़ रुपये दिए थे फिर अलग से दिल्ली एमसीडी को 262 करोड़ रुपये और दिए थे.

बीमार नवाज से 7 अरब की वसूली की फिराक में बेरहम 'नियाजी'