जीत के बाद मीराबाई ने खोल दिया ये 'राज', बताई रियो ओलंपिक की वो बात

भारत के नाम टोक्यो ओलंपिक में पहला मेडल जीतने वाली मीराबाई ने एक बड़ा राज खोला है. उन्होंने बताया कि रियो ओलंपिक में ही फैसला कर दिया था कि टोक्यो में खुद को साबित करना है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 24, 2021, 09:36 PM IST
  • जीत के बाद मीराबाई चानू ने क्या कहा?
  • 'पांच वर्षों में सिर्फ 5 दिन घर पर गई'
जीत के बाद मीराबाई ने खोल दिया ये 'राज', बताई रियो ओलंपिक की वो बात

नई दिल्ली: ओलंपिक में रजत पदक जीतकर भारतीय भारोत्तोलन में नया इतिहास रचने वाली मीराबाई चानू ने एक बड़ा राज खोला है. उनकी जीत के पीछे उनकी कौन सी कड़ी मेहनत सबसे कारगर साबित हुई. उन्होंने खुद अपने कठिन परिश्रम की जानकारी साझा की.

5 साल लगातार करती रहीं मेहनत

शनिवार को भारत के लिए पहला मेडल जीतने के बाद मीराबाई चानू ने कहा कि 'वो अब अभ्यास की परवाह किये बिना अपने परिजनों के साथ छुट्टियां बिता सकती हैं, क्योंकि पिछले पांच वर्षों में वह केवल पांच दिन के लिये मणिपुर स्थित अपने घर जा पाई.'

चानू ने बताया कि ‘पिछले पांच वर्षों में मैं केवल पांच दिन के लिये घर जा पाई थी, अब मैं इस पदक के साथ घर जाऊंगी.’ उनका परिवार नोंगपोक काकचिंग गांव में रहता है जो इंफाल से लगभग 20 किमी दूर है.

मीराबाई चानू ने खुलासा किया कि रियो ओलंपिक खेलों में असफल रहने के बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग और तकनीक पूरी तरह से बदल दी थी ताकि वह तोक्यो में अच्छा प्रदर्शन कर सके.

पूरा हुआ मीराबाई चानू का सपना

चानू ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘ओलंपिक पदक जीतने का मेरा सपना आज पूरा हो गया. मैंने रियो में काफी कोशिश की थी लेकिन तब मेरा दिन नहीं था. मैंने उस दिन तय किया था कि मुझे टोक्यो में खुद को साबित करना होगा.’

मीराबाई को पांच साल पहले रियो में भी पदक का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन वह महिलाओं के 48 किग्रा भार वर्ग में वैध वजन उठाने में असफल रही थी. उन्होंने कहा, ‘मुझे उस दिन काफी सबक मिले थे. मेरी ट्रेनिंग और तकनीक बदल गई थी. हमने उसके बाद काफी कड़ी मेहनत की.’

मुख्य कोच विजय शर्मा ने भी खुलासा किया कि रियो के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन पर काफी दबाव था. उन्होंने कहा, ‘रियो की असफलता के बाद मुझ पर भी काफी दबाव था. हम सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में नाकाम रहे थे. हमसे तब भी पदक की उम्मीद की जा रही थी.’

टोक्यो में स्वयं को साबित करने के लिये प्रतिबद्ध चानू और शर्मा ने इसके बाद इस मणिपुरी खिलाड़ी की ट्रेनिंग और तकनीक में काफी बदलाव किये. शर्मा ने कहा, ‘इसके बाद हमने अभ्यास के तरीकों में काफी बदलाव किये. इसके बाद हमने 2017 में विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में अच्छे परिणाम देखे. उसने पिछले छह वर्षों में अभ्यास के अलावा कुछ नहीं किया है.’

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