NATO का टूट गया ढाल! रूस ने दागी इस्कंदर-M मिसाइलें, Ukraine का पैट्रियट Defence System बना खिलौना

Iskander-M Patriot missile system: यूक्रेन में रूसी सेना की इस्कंदर-एम मिसाइलें अब अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भारी पड़ रही हैं. नई तकनीकों और चालों का इस्तेमाल करके रूस ने यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को इतना कमजोर कर दिया है कि मिसाइलों को बीच में रोकने की दर 34% से घटकर सिर्फ 6% या उससे भी कम हो गई है.

Written by - Prashant Singh | Last Updated : Nov 6, 2025, 04:26 PM IST
  • यूक्रेन की हवाई सुरक्षा बुरी तरह कमजोर
  • मिसाइल इंटरसेप्ट रेट घटकर 6% रह गई
NATO का टूट गया ढाल! रूस ने दागी इस्कंदर-M मिसाइलें, Ukraine का पैट्रियट Defence System बना खिलौना

Iskander-M Patriot missile system: रूस-यूक्रेन के बीच जंग जारी है. दोनों ओर से दुनिया के सबसे एडवांस हथियारों और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि दोनों देशों के पास दुनिया के सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम हैं. हालांकि, हालिया रिपोर्ट बताती है कि रूस ने यूक्रेन के डिफेंस सिस्टम पैट्रियट का तोड़ निकाल लिया है. जिसके लिए रूस इस्कंदर-M मिसाइलों बेहद घातक साबित हो रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं यह कैसे काम करती है और यूक्रेन की जंग में क्या स्थिति है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में पैट्रियट जैसे नाटो-समर्थित एयर डिफेंस सिस्टम अब उतने भरोसेमंद नहीं रहे. ऐसा इसलिए है क्योंकि रूस ने अपनी इस्कंदर मिसाइलों में कई तकनीकी बदलाव किए हैं. ये बदलाव इतने सटीक हैं कि यूक्रेन का पश्चिमी डिफेंस सिस्टम अब उन्हें समझने में नाकाम हो रहा है.

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यह समस्या एक तरफ इस्कंदर मिसाइलों के एडवांस बदलावों से आई है, तो दूसरी तरफ रूस की वॉर इकोनॉमी की ताकत से. रूस लगातार बड़ी संख्या में इस्कंदर जैसी मिसाइलें बना रहा है, जबकि यूक्रेन पश्चिमी देशों से मिलने वाली सीमित पैट्रियट मिसाइलों पर निर्भर है. जब रूस बड़ी संख्या में एक साथ हमला यानी Saturation Attacks करता है, तो यूक्रेन का सीमित डिफेंस सिस्टम काम नहीं कर पाता, जिससे रूसी हमले सफल हो जाते हैं.

इस्कंदर-एम की नई चालें
रूसी इंजीनियरों ने इस्कंदर-एम मिसाइल में कई बदलाव किए हैं, जिसने पैट्रियट जैसे डिफेंस सिस्टम की गणित बिगाड़ दी है. इस्कंदर-एम अब अनुमानित बैलिस्टिक रास्ते पर नहीं उड़ रही है. यह उड़ान के बीच में अचानक अपना रास्ता बदल देती है, गोता लगाती है, या अंतिम स्टेज में तेज स्पीड से पैंतरेबाजी करती है.
पैट्रियट जैसे सिस्टम लक्ष्य के रास्ते का अनुमान लगाकर काम करते हैं. जब मिसाइल अचानक रास्ता बदलती है, तो पैट्रियट के पास प्रतिक्रिया देने और उसे भेदने के लिए बहुत कम समय बचता है, जिससे हमला विफल हो जाता है.

डिफेंस रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी इंजीनियरों ने इस्कंदर-M मिसाइलों में रडार को धोखा देने वाले डिवाइस लगाए हैं, जो टारगेट पर पहुंचने से पहले ही नकली संकेत यानी Radar Decoy Devices छोड़ देते हैं. इससे अमेरिकी मिसाइलें नकली संकेत का पीछा करने लगती हैं और इस्कंदर-M अपने टारगेट को भेदने में सफल हो जाती है.

क्या कहते हैं आकंड़ें?
आईडीआरडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी मिसाइलों ने नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके यूक्रेन के रडार को पूरी तरह से अंधा कर दे रहे हैं. यही वजह है कि यूक्रेन पर रूस कहर बनकर टूट पड़ा है. आकंड़ों की बात की जाए तो रूस ने यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को इतना कमजोर कर दिया है कि मिसाइलों को बीच में रोकने की दर 34% से घटकर सिर्फ 6% या उससे भी कम हो गई है.

क्या है जंग की स्थिति?
रूस-यूक्रेन के बीच पिछले 3 साल से जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रहा है. वर्तमान में यूक्रेनी शहर Pokrovsk पर रूस का हमला जारी है. जहां करीब 1,00,000 लाख से ज्यादा सैनिक तैनात हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जंग रुकवाने की तमाम कोशिशें की. हालांकि, सभी नाकाम रहें.

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